शहरीकरण ने झीलों को नष्ट किया : उपराष्ट्रपति 33
राज्य ब्यूरो नई दिल्ली : प्रदूषित जल ने कई नदियों को खत्म कर दिया है। जबकि शहरी इलाकों में विकास की गतिविधियों ने झीलों को नष्ट कर दिया। यह जलाशय हमारे शहरों के लिए जरूरी हैं, क्योंकि ये भूमिगत जल को संतुलित रखते हैं और बारिश के पानी का संग्रह करते हैं। जिससे जलवायु अनुकूल रहता है।
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने यह बातें सोमवार को सेंटर फॉर साइंस एंड इंवायरमेंट (सीएसई) द्वारा दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम के दौरान कही। उपराष्ट्रपति ने कहा कि जल की बर्बादी रोकने के लिए उसके सरंक्षण पर काम करना जरूरी है। लोगों को यह समझाना होगा कि पानी और सीवरेज किस तरह से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जल आपूर्ति और प्रदूषित जल प्रबंधन के उचित तालमेल से ही जल संकट की समस्या से बचने की उम्मीद की जा सकती है। भारत में रोजाना चार हजार करोड़ लीटर गंदा पानी बहता है। जिससे 90 लाख हेक्टेयर जमीन को सींचा जा सकता है। जबकि इसका 20 फीसदी हिस्सा ही शोधित किया जाता है जबकि बाकी बर्बाद हो जाता है।
उपराष्ट्रपति अंसारी ने कहा कि सीएसई की रिपोर्ट में पाया गया है कि सभी राज्यों के भूमिगत जल में नाइट्रेट एक मानक स्तर से ज्यादा है, जो पीने योग्य नहीं होता है। यह नालियों से बहने वाले पानी के मिलावट का नतीजा है। उन्होंने कहा कि प्रदूषित जल के मामले में हमें अपनी सोच बदलनी होगी क्योंकि जल कीमती संसाधन है। इससे पहले सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने बताया कि सीएसई ने सात राज्यों में सर्वे किया और रिपोर्ट जारी की। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में पानी और सीवरेज के पानी के प्रबंधन में काफी कमियां हैं।