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More from Front Page

  • दिव्यांगों कार्मिकों को दफ्तर आने से राहत
  • कोविड-19 से मुकाबले के लिए दो दवाओं के ट्रायल को मंजूरी
  • व्यावसायिक यात्री वाहनों को परमिट में छूट
  • फीचर फोन वाले कोरोना मरीज भी नहीं दे पाएंगे सरकार को चकमा
  • प्रवासी श्रमिकों को दो-दो हजार रुपये की आर्थिक मदद
  • आकाशवाणी व दूरदर्शन भी देंगे गिलगिट के मौसम की जानकारी
  • कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान, चीन सीमा तक सड़क तैयार
  • ट्रैक पर सोए 16 मजदूर ट्रेन से कटे
  • वेबसाइट पर पढ़े
  • नगर संस्करण * मूल्य ै 6.00पृष्ठ 14

More from Front Page

  • ऋषिकेश में लॉकडाउन के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बुधवार को घाट रोड पर कुछ इस तरह उमड़ी भीड़ ’ जागरण
  • ऋषिकेश में नगर निगम के बाहर हाईवे पर फिजिकल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किए बिना सब्जी की खरीदारी करते लोग ’ जागरण
  • राहत कोष में दिए एक लाख 11 हजार
  • सुसुवा के किनारे से हटाया अतिक्रमण
  • कोरोना संक्रमित स्टाफ नर्स की रिपोर्ट निगेटिव
  • मनरेगा के श्रमिकों को बांटे मास्क व सेनिटाइजर
  • कोरोना मुक्त विश्व के निर्माण को आएं साथ
  • महापौर ने क्वारंटाइन सेंटर पहुंचकर निपटाया विवाद
  • जीएमवीएन के गेस्ट हाउस में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा करते (बाएं से दाएं) महापौर अनीता ममगाईं, जीएमवीएन के उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार सिंघल व अन्य ’ जागरण
  • सीएम के समक्ष रखी परिवहन व्यवसायियों की समस्या
  • तीर्थनगरी में शारीरिक दूरी के नियम तार-तार

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  • ऑनलाइन फेरे लेकर एक-दूजे के हुए नीलू और अनिमेष
  • प्रवासियों को लाने से पहले बढ़ानी होगी क्वारंटाइन क्षमता
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  • कोरोना के दो नए मामले, छह मरीज स्वस्थ
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  • मंडी में सैंपलिंग को सीएमओ को भेजा पत्र
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  • दून अस्पताल में फिर शुरू होंगे सीटी स्कैन
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  • कोरोना से जीत के काफी करीब पहुंचा दून अस्पताल
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  • दून में 34 रजिस्ट्री, 45 लाख मिला राजस्व
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  • स्वास्थ्य कíमयों के लिए मुफ्त सेवाएं देगा ऊबर
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  • पीएम राहत कोष में दिए 51 हजार रुपये
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  • सर्वर न चलने से बिल जमा नहीं कर पाए उपभोक्ता
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  • राहत कोष में दी 2.8 लाख की धनराशि
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  • अनुकृति ने दिए मास्कदेहरादून: पूर्व मिस इंडिया ग्रैंड इंटरनेशनल अनुकृति गुसांई ने सामाजिक संस्था उत्तराखंड महिला एवं बाल कल्याण की महिलाओं की ओर से 1000 कॉटन फेस कवर मास्क, 2000 सेनिटाइजर, 1000 साबुन, 300 इम्यूनिटी बूस्टर डीआइजी अरुण मोहन जोशी को भेंट किए। अनुकृति गुसांई ने देहरादून पुलिस द्वारा किए जा रहे कार्य की बहुत प्रशंसा की। (जासं)
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  • बीसीसीआइ से की सीएयू की शिकायत
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  • डीजीपी ने सीएम को सौंपा 3.11 करोड़ का चेक
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  • 77 वर्षीय वृद्धा ने प्रधानमंत्री केयर्स फंड में दिए एक लाख
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  • गेहूं की फसल सुरक्षित रखने में जुटे किसान
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  • पदोन्नति का लाभ नहीं मिलने से एएनएम नाराज
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  • डोईवाला में खेतों से गेहूं की बची फसल को घर ले जाते किसान ’ जागरण
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  • छात्रों के लिए हेल्पलाइन जारी करें डिग्री कॉलेज
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  • स्वयं सहायता समूहों में उत्साह ग्रामीण अंचलों में स्वयं सहायता समूहों विशेष तौर पर महिला स्वयं सहायता समूहों ने विषम परिस्थितियों में भी उल्लेखनीय काम किया गया है। 3580 स्वयं सहायता समूहों जिनके 12 हजार से अधिक सदस्यों ने 11 लाख मास्क तैयार कर संस्थाओं को उपलब्ध कराए हैं। कोविड-19 में जरूरतमंदों को सहायता पहुंचाने में बहुत से स्वयं सहायता समूह सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। बहुत से स्वयं सहायता समूह, आíथक गतिविधियां कर रहे हैं। ऊधमसिंहनगर जिले के पहानिया में 600 से अधिक महिलाएं मूंज घास से हस्तशिल्प में काम कर रही हैं।
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  • ऊर्जा के तीनों निगमों में ई-ऑफिस की तैयारी
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  • वाराणसी की तर्ज पर चमकेंगे तीर्थनगरी के गंगा घाट
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  • ऑनलाइन पढ़ाई में नेटवर्क बना रोड़ा
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  • ग्रामीणों से डाउनलोड कराया आरोग्य सेतु एप
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  • राजस्व टीम ने किसानों के नुकसान का किया आकलन
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  • झारखंड जाने को निकले श्रमिक, पुलिस ने रोका
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  • कठंग में बाघिन की दस्तक से भय में लोग
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  • बंदिशें हटाकर खनन से जुटाएंगे 750 करोड़
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  • खुदाई में मिली देवमूर्ति, पेड़ पर विराजे देवता
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  • गोमांस व उपकरणों के साथ दो शातिर गिरफ्तार
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  • पुलिस, कैडेट और सफाई कर्मियों का किया सम्मान
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  • टैक्स से जनता का उत्पीड़न कर रही सरकार
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  • ‘शहिरे छोडिके गांव आएंगे’ जौनसारी गीत की धूम
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  • शराब के दाम बढ़े, दुकानों पर भीड़ रही सामान्य
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  • तू कितनी अच्छी है ..
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  • एकता के दिल को छू गई श्री श्री की बात!
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  • बाहर जाने को ऑनलाइन पास को करें आवेदन
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  • रक्तदान कर मनाया गया रेडक्रॉस दिवस
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  • लॉकडाउन: तपस्या पर पानी फेर रही ‘छूट’
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  • घर पर कानून की बारीकियां सीख रहे अधिवक्ता
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  • दो लाख में बस बुक कर सूरत से दून पहुंचे 30 लोग
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  • मनुष्य द्वारा किया गया अच्छा व्यवहार उसे ताकत देता है और दूसरों को उसी तरह से अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है।प्लेटो
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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
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  • आर्थिक मोर्चे पर चुनौतीकोरोना संक्रमण के बीच लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियां ठप होने से सरकार के सम्मुख बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालात इस कदर गंभीर हैं कि सरकार को वेतन देने के लिए बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार ने शराब और पेट्रोल-डीजल पर हेल्थ केयर टैक्स लगाकर राजस्व की भरपाई करने का प्रयास किया है। यह उचित फैसला है। सरकार को राजस्व जुटाने के और भी तरीके तलाशने होंगे। मसलन तंबाकू उत्पादों को भी इस दायरे में रखा जा सकता है। इसके अलावा कैबिनेट बैठक में औद्योगिक विकास को गति देने के भी प्रयास किए गए हैं, लेकिन उद्योगों के सामने तमाम तरह की चुनौतियां हैं। मसलन प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रमिक अपने गांवों को लौट चुके हैं। ऐसे में उद्योगों के लिए उत्पादन शुरू करना आसान नहीं है। गुरुवार को पुरोला से 42 श्रमिक पैदल ही बिहार के चंपारण के लिए रवाना हो गए थे। यह अलग बात है कि पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और वापस पुरोला के राहत कैंप में भेज दिया। यह तो एक बानगी भर है। इसमें कोई दो राय नहीं कि कोरोना काल में मुसीबतों का अंबार है, लेकिन यह समय एक अवसर भी है। सरकार भी इसे समझ रही है। करीब 60 हजार लोग विभिन्न राज्यों से उत्तराखंड स्थित अपने गांवों में लौट आए हैं। मजबूरी ही सही, लेकिन खाली हो रहे पहाड़ के गांवों के लिए यह एक अच्छा संकेत है। रिवर्स पलायन पर जोर दे रही सरकार अब इन लोगों को रोकने का प्रयास कर रही है। पलायन आयोग को उम्मीद है तीस फीसद लोग यहीं रोजगार की संभावना तलाशेंगे। ऐसे में सरकार भी इन लोगों के पुनर्वास के लिए संजीदा हुई है और इनके लिए स्वरोजगार की संभावनाएं खोजी जा रही हैं। यही वजह है कि कैबिनेट ने फैसला लिया है कि ऐसे लोगों को ऋण मुहैया कराए जाएंगे, जिस पर अनुदान दिया जाएगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वरोजगार की संभावना तलाश रहे लोगों को सिर्फ अनुदान ही नहीं, अन्य स्तर पर भी मदद की जरूरत पड़ेगी। प्रशिक्षण के साथ ही उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान भी करना होगा। निश्चित ही इसके परिणाम मिलने में समय लगेगा, लेकिन यदि गंभीरता से काम हुआ तो इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी।
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  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
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  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
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  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
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  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीपैट्रोल का दाम बढ़ाना उचित नहींलॉकडाउन के तीसरे चरण में राज्य सरकार ने शराब, डीजल और पैट्रोल के दाम बढ़ाकर लोगों को मुश्किल में डाल दिया है। हालांकि शराब के दाम बढ़ाने के पीछे सरकार का यह तर्क है कि इससे ठेकों पर खरीदारों की भीड़ कम होगी। जिससे कोरोना संक्रमण का खतरा कम होगा। लेकिन डीजल व पैट्रोल का दाम बढ़ाना कोई समझदारी नहीं है। क्योंकि लॉकडाउन में भले ही लोग एक स्थान से दूसरे स्थान कम जा रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके खरीदारों की जेब तो ढीली होगी ही। मंत्रिमंडल ने गुरुवार को पेट्रोल, डीजल और शराब के दाम बढ़ाने को मंजूरी दे दी। प्रति लीटर पेट्रोल अब दो रुपये और डीजल एक रुपया महंगा हो गया है। वहीं देशी शराब से लेकर विदेशी शराब की प्रति बोतल में 20 रुपये से लेकर 475 रुपये तक बढ़ाए गए हैं। पेट्रोल, डीजल की कीमतें गुरुवार मध्य रात्रि और शराब की बढ़ी कीमतें शुRवार से लागू होंगी।राजेश्वर उनियाल, गणोश विहारसावधानी बरतना जरूरीघातक कोरोना वायरस के चलते दुनिया में आज खौफ का माहौल है। अभी तक ढाई लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और संRमित का आंकड़ा 38 लाख को पार कर चुका है। हालांकि राहत की बात यह है कि हमारे देश में स्थिति नियंत्रण में है। यहां लॉकडाउन का तीसरा चरण चल रहा है, जिसमें सरकार की ओर से जनता को कई गतिविधियों में छूट दी गई है। लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि हम कोरोना संRमण को लेकर बेपरवाह हो जाएं। यदि हमने सावधानी न बरती तो संRमण कहीं भी फैल सकता है चाहे वह आपका पुराना परिचित फल-सब्जी विRेता या राशन डीलर ही क्यों ना हो। उनसे पहले की ही तरह पूरी आत्मीयता से सामान खरीदें लेकिन कोरोना से बचाव के लिए सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करना भी जरूरी है।उमेश पंत, देहरादून
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  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
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  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
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  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
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  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है
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  • अगले सप्ताह तक विदेश में फंसे 15,000 भारतीय स्वदेश लौटेंगे
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  • टेस्टिंग पर जोर, पर किट पर खामोशी
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  • शराब की ऑनलाइन बिक्री पर विचार करे सरकार : सुप्रीम कोर्ट
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  • बीएसएफ के 30 और कर्मी कोरोना संक्रमित
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  • सामुदायिक प्रसार को रोकने को एसिम्प्टोमैटिक लोगों की होगी जांच
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  • 37 हवाई अड्डों का होगा आधुनिकीकरण
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  • शेयर बाजारों को रिलायंस का दम
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