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  • चीन से कोई बड़ी गलती हुई या फिर वह अक्षम है: ट्रंप
  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लडबैंकहिसार : दिल्ली से सटा होलंबी कला गांव एम्स को बीते 18 सालों से रक्तदान कर रहा है। जब भी आवश्यकता होती है एक अपील पर जुट जाते हैं गांव वाले। कोरोना के दौर में तीन बार कर चुके हैं रक्तदान।’पेज 09
  • शाहजहांपुर में बंदी 300 रुपये में बना रहे पीपीई किट
  • कोरोना से उबरने का रिकवरी रेट तीस प्रतिशत तक पहुंचा
  • शराब की ऑनलाइन बिक्री पर विचार करे सरकार : सुप्रीम कोर्ट
  • कैलास मानसरोवर यात्र आसान, चीन सीमा तक सड़क तैयार
  • सूबे की एमएसएमई इकाइयों को तकनीकी सहयोग देगा डेनमार्क
  • ट्रेन से कटकर मप्र के 16 मजदूरों की मौत
  • दैनिक जागरण फिर बना देश का नं. 1 अखबार
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  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से, शेड्यूल जल्द
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  • एनजीटी ने एलजी पॉलीमर्स पर ठोका 50 करोड़ जुर्माना
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  • तू कितनी अच्छी है ..
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  • जनधन खाते से रुपया निकालने को उमड़ी भीड़
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  • 37 लाख क्विंटल गन्ना पेराई कर 37 हजार क्विंटल बनाई चीनी
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  • महामारी से बचाव के लिए लॉकडाउन का पालन करें, बेवजह बाहर निकलने से बचें
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  • राजस्थान और दिल्ली से आने वालों समेत 203 की जांच
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  • श्रमिकों का चोरी छुपे घर आने का सिलसिला जारी
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  • पुलिस पर हमला करने में फौजी समेत 11 को जेल
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  • संवत 2077, शके 1942, बसंत ऋतु ज्येष्ठ मास, कृष्ण पक्ष द्वितीया।
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  • मार्ग हादसे के बाद बिफरे परिजन
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  • भाजपा नेता ने मनाया बेटे का जन्म दिवस
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  • डीएम ने खत्म कर दिया अमरिया का हॉटस्पाट
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  • चाइल्डलाइन ने रुकवाया बाल विवाह
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  • हेयर सैलून में सैनिटाइज के बाद की कटिंग जासं, पीलीभीत: जिलाधिकारी ने शुक्रवार से ही हेयर सैलून और ब्यूटी पार्लर खोलने की छूट देने का आदेश जारी किया। नतीजा यह रहा कि हेयरसैलून में भी सुबह से दोपहर तक बाल कटवाने और से¨वग कराने वालों की भीड़ दिखाई दी। इस दौरान सुनगढ़ी थाना के नजदीक हेयर सैलून में तो पहुंचने वाले लोगों को पहले सैनिटाइज कराया जा रहा था। वहीं हेयर कटिंग और से¨वग में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों को भी सैनिटाइज किया जा रहा था। बाल कटवाने पहुंचे लोग यह भी कहते सुने गए कि शुक्र है आज इस समस्या से निजात मिल गई।
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  • बाजार के हालात देख बिफरे डीएम, जताई नाराजगी
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  • अभी नहीं सही की गई बिजली लाइन
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  • जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
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  • क्वारंटाइन कर बस से बलिया किया रवाना
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  • कोतवाली में पेड़ की डाल टूटने से बचे पुलिसकर्मी
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  • 149 वाहनों का चालान, तीन किए सीज
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  • बाइक के नंबर पर चलता मिला ट्रैक्टर
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  • रिसौली पुलिस चौकी में मनाई पार्टी
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  • बिना सूचना गायब चौकीदार निलंबित
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  • गेहूं क्रय केंद्रों पर कई जगह नहीं बारदाना
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  • एसपी बंगले से बैरंग लौटे भाजपाई ,बाद में समझौता
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  • पहले पांच सही जवाब देने वाले’ राहुल वर्मा ’ अनीता सक्सेना ’ महादेव गुप्ता ’ अश्वनी अग्रवाल ’ शलभ अग्रवाल ।
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  • ईद के लिए रखे पैसों से भूखों को खिलाएं खाना
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  • फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर उगाही करने वालों पर मुकदमा
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  • कोरोना मुक्ति की उम्मीद जगा रहा साल का पहला सूर्य ग्रहण
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  • वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का निधन
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  • रमजान में औरतों के सोशल अकाउंट में क्यों झांक रहे लोग
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  • लॉकडाउन का पालन कराने गई पुलिस पर हमला, पथराव
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  • ऑरेंज जोन में भी 12 से शुरू होगा मूल्यांकन
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  • बुजुर्ग दंपती की 50वीं वर्षगांठ पर पहुंचाया केक
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  • 69000 शिक्षक भर्ती की उत्तरकुंजी जारी, रिजल्ट में टालमटोल
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  • प्रवासियों को गौ आश्रय स्थलों से जोड़ें
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  • बुलंदशहर में प्रेमी युगल ने जान दी
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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
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  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
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  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
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  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीशराब जिंदगी से ज्यादा जरूरी नहीं पूरा देश इस समय कोरोना महामारी से लड़ रहा है। कोरोना को हराने के लॉक डाउन किया गया है। इतनी घोर तपस्या से कुछ जिले ग्रीन तथा ऑरेंज जोन में आ सके है। जबकि कई जगह अभी भी हालात बेकाबू हैं। ऐसी परिस्थिति में शराब की दुकानें खोलने की क्या आवश्यकता थी। क्या शराब लोगों की जिंदगी से ज्यादा जरूरी है? कौन नहीं जानता कि अधिकतर दुर्घटनाएं और अपराध शराब के नशे की वजह से होते हैं। ऐसे में सिर्फ राजस्व एकत्र करने के लिए शराब की दुकानें खोलने की अनुमति उचित नहीं दिखाई पड़ती। विनोद कुमार, पीलीभीतमहामारी के बीच गैस रिसावकोरोना महामारी का प्रकोप अभी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। संक्रमितों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। इसी बीच आंध्र प्रदेश में प्लास्टिक फैक्ट्री में गैस रिसाव की घटना ने वहां नई समस्या खड़ी कर दी है। 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। आंध्र प्रदेश में गैस रिसाव से मरे लोगों के परिवारों को सरकार ने आर्थिक मदद देने की घोषणा कर दी है। जांच भी शुरू करा दी गई है, लेकिन इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की कोई दूसरी घटना न होने पाए। सुमित मिश्र, बदायूंप्रवासियों की वापसीप्रवासी मजदूरों की वापसी शुरू हो चुकी है। लॉकडाउन में परिवार से दूर बिना किसी काम, मदद के सहारे रह रहे इन मजदूरों को घर भेजने का सरकार का कदम सराहनीय है, लेकिन उनको क्वारंटाइन सेंटरों में रखने की बजाय सिर्फ स्क्रीनिंग के आधार पर घर भेजना सही नहीं कहा जा सकता। व्बेहतर होता कि उन्हें क्वारंटाइन सेंटरों में क्वारंटाइन की अवधि पूरी कराकर घर भेजा जाता। ताकि कोरोना संक्रमण बढ़ने की संभावनाएं और कम रहतीं। >> सविनय कुमार, शाहजहांपुर
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  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
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  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है
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  • संस्थापक - स्व. पूर्णचन्द्र गुप्त. पूर्व प्रधान सम्पादक-स्व.नरेन्द्र मोहन. सम्पादकीय निदेशक-महेन्द्र मोहन गुप्त. प्रधान सम्पादक-संजय गुप्त, जागरण प्रकाशन लि. के लिए: मुदित चतुर्वेदी द्वारा 130, सिविल लाइंस,बरेली से प्रकाशित और उन्हीं के द्वारा दैनिक जागरण प्रेस बिहारमान नगला, पीलीभीत बाईपास रोड, बरेली से मुद्रित सम्पादक (उत्तरप्रदेश) -आशुतोष शुक्ल* दूरभाष: 0581-3941300, 2423365, ए-ें्र’: ङ्गं1ी्र’’8ङ्ग1’.Aं¬1ंल्ल.ङ्घे,फ.ठ.क. ठ., 48020/89 * इस अंक में प्रकाशित समस्त समाचारों के चयन एवं सम्पादन हेतु पी.आर.बी. एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी। समस्त विवाद बरेली न्यायालय के अधीन ही होंगे। वर्ष 31 अंक 238
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  • धैर्य खो रहा विपक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष राम गो¨वद चौधरी को पत्र लिखकर सही नसीहत दी है कि यदि वह कोरोना नियंत्रण मुहिम में जुटे तंत्र का मनोबल नहीं बढ़ा सकते तो कम से कम निर्थक आरोप लगाकर मनोबल गिराना तो नहीं चाहिए। आसार कम ही हैं कि चौधरी और अन्य विपक्षी नेता इस नसीहत का ध्यान रखेंगे, पर विपक्ष को याद रखना चाहिए कि कोरोना संकट वैश्विक आपदा है। इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, पर जहां तक इस आपदा से निपटने का सवाल है, योगी आदित्यनाथ के विजन, प्रबंधन और क्रियान्वयन की सराहना पूरी दुनिया में की जा रही है। उत्तर प्रदेश का भौगालिक और जनसांख्यिक विस्तार अधिकतर देशों से अधिक है। इतने बड़े भूभाग और जनसंख्या को कोरोना संकट से यथासंभव महफूज रखने का प्रबंधन आसान नहीं है। योगी सरकार ने बहुत व्यवस्थित तरीके से इसे करके दिखाया। मुख्यमंत्री की शायद यही उपलब्धि विपक्ष को बेचैन कर रही है। विपक्षी दल जिस तरह कभी श्रमिकों, तो कभी कोई अन्य सवाल उठाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं, उसे आम आदमी भी पसंद नहीं कर रहा होगा। वजह है कि केारोनाकाल में सरकार ने न सिर्फ अन्य राज्यों में फंसे छात्रों और श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई बल्कि लाखों परिवारों को खाना, राशन और पैसा भी पहुंचाया। बेशक इतने बड़े अभियान में कुछ गड़बड़ियां रह गई होंगी, कुछ लोग सहायता पाने से वंचित रह गए होंगे, पर ऐसी छोटी बातों को तूल देकर सरकार की पूरी कवायद को खारिज कर देना उचित नहीं है। कोरोना राजनीति नहीं बल्कि योगदान करने का विषय है। विपक्षी दलों को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए कि जिस अभियान में सरकार के अलावा छोटे-बड़े उद्यमी, व्यवसायी, दुकानदार, गरीब किसान, मजदूर, बच्चे, शिक्षक, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी और अन्य सामाजिक वर्गो के लोग अपनी स्थिति के हिसाब से योगदान कर रहे हैं, उसमें उन्होंने क्या योगदान किया? कोरोना संकट से घिरे लोगों से यह बात छिपी नहीं है कि कौन उनकी मदद कर रहा और कौन राजनीति। मौका मिलने पर लोग जवाब भी देंगे।
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  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
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  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
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  • घाटी में तीसरे दिन भी तनाव बरकरार
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  • पीडीपी नेता नईम अख्तर पर पीएसए तीन माह बढ़ा
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  • बंगाल में कोरोना से मरने वालों की दर सबसे अधिक
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  • गुजरात में लगातार बढ़ रही है कोरोना संक्रमितों की संख्या
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  • महाराष्ट्र में लगातार तीसरे दिन एक हजार से ज्यादा नए मामले
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  • मई के अंत तक किफायती पेपर किट से शुरू हो जाएगी जांच
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  • चीन पर हर्जाने का दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
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  • टेस्टिंग पर जोर, पर किट पर खामोशी
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  • पंजाब में खेतों में जा गिरा मिग-29, पायलट सुरक्षित
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  • सभी शिक्षकों को ऑनलाइन पढ़ाने का भी मिलेगा प्रशिक्षण
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  • पैकेज में हुई देरी तो बेरोजगारी की आएगी सुनामी : राहुल
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  • शेयर बाजारों को रिलायंस का दम
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  • जापान ने मांगी कंपनियों के संचालन में मदद
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  • देश बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा
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  • जियो प्लेटफॉर्म्स में फेसबुक के बाद एक और बड़ा निवेश
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  • राहत पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
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  • फीचर फोन वाले कोरोना मरीज भी नहीं दे पाएंगे सरकार को चकमा
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  • बीएसएफ के 30 और कर्मी कोरोना संक्रमित
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  • भले मर जाएं पर मुफ्तखोरी हमें मंजूर नहीं..
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  • चीन से कोई बड़ी गलती हुई या फिर वह अक्षम है: ट्रंप
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  • वैदिक मंत्रों से गूंजा व्हाइट हाउस
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