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  • नवांशहर के पास मिग-29 क्रैश
  • हरिद्वार में अस्थि विसर्जन की अनुमति, तीन लोग जा पाएंगे
  • राज्य में 29वीं मौत, एक हफ्ते में सबसे कम 58 नए मामले
  • दैनिक जागरण फिर बना देश का नं. 1 अखबार
  • ट्रेन से कटकर 16 मजदूरों की मौत
  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से होंगी शुरू
  • पाकिस्तान से जुड़े मोस्ट वांटेड गैंगस्टर बिल्ला समेत सात काबू
  • नूर के साथ टिकटॉक पर आए कैप्टन; बोले, बाहर न निकलें
  • सीएम का श्रमिकों को रोकने का निर्देश, 35} ने आवेदन रद किए
  • हिजबुल आतंकी हिलाल के.दो और साथी गिरफ्तार
  • जालंधर, 09360928093ा0935093ए09309 092ए0908 2020
  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लडबैंकहिसार : दिल्ली से सटा होलंबी कला गांव एम्स को बीते 18 सालों से रक्तदान कर रहा है। जब भी आवश्यकता होती है एक अपील पर जुट जाते हैं गांव वाले। कोरोना के दौर में तीन बार कर चुके हैं रक्तदान।’ पेज 5
  • वेबसाइट पर पढ़ें
  • जागरण विशेषभले मर जाएं पर मुफ्तखोरी हमें मंजूर नहीं..

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  • अश्विनी से बोले उद्यमी, श्रमिकों की वापसी से बर्बाद होंगे उद्योग
  • हीरो साइकिल में भी उत्पादन शुरू
  • किसानों ने कहा-खेती के लिए श्रमिक नहीं मिलेंगे, ठेके की जमीन के दाम घटाएं
  • धान की रोपाई पर सरकार की नहीं चल पाई, किसान अब भी नहीं संतुष्ट
  • एफसीआइ से पंजाब को 1.11 लाख टन अनाज जारी
  • ऐसे तो हार जाएंगे कोरोना से जंग..
  • 24 घंटे में ही भाग गए क्वारंटाइन किए लोग
  • जालंधर में चलने लगीं दो हजार इंडस्ट्रियां
  • सोनालीका ने खोला लॉक, घूमा उत्पादन का पहिया

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  • गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता ने की जांच अधिकारी को बदलने की मांग
  • मजदूरों का मसीहा बन बुजुर्ग रोज बांट रहा हजारों रुपये
  • एएसआइ ने अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी की छाती में दो गोलियां मारकर की हत्या
  • खेतों में गिरा मिग-29, पायलट सुरक्षित
  • हिजबुल आतंकी के दो और साथी गिरफ्तार
  • नॉन-टीचिंग स्टाफ का साल में सिर्फ एक बार होगा तबादला
  • गैंगस्टर बिल्ला को बटाला पुलिस भी लेगी रिमांड पर
  • खौफ के वायरस से खलने लगी खून की कमी
  • शराब की बिक्री ऑनलाइन या होम डिलीवरी का सुप्रीम कोर्ट का सुझाव
  • हेरोइन के साथ रिशी आश्रम का संचालक काबू
  • पैदल आजमगढ़ जा रहे पिता व पुत्र मालगाड़ी की चपेट में आए, मौत

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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
  • चुनौतियां कम करे सरकारलगभग सवा माह बाद आखिर कई औद्योगिक इकाइयों में काम शुरू हो गया है। ट्रैक्टर निर्माण में अग्रणी सोनालिका और साइकिलों के लिए विख्यात हीरो जैसे बड़े औद्योगिक समूहों के अलावा और कई बड़ी ही नहीं, छोटी इकाइयों ने भी उत्पादन शुरू कर दिया है। यह पंजाब व पंजाबियों के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के उन लोगों के लिए भी राहतकारी है, जो रोजी-रोटी और सुरक्षित भविष्य की चिंता के कारण पंजाब छोड़कर जा रहे हैं। हालांकि, यह भी सच है कि कोरोना की महामारी के कारण बदले हालात में उद्योगों को चलाना आसान नहीं होगा। श्रमिकों और कच्चे माल की उपलब्धता इंडस्ट्री के लिए बड़ी चुनौती होगी। अभी रोजाना हजारों की संख्या में श्रमिक पंजाब से अपने गृह राज्यों को वापस जा रहे हैं। घर वापसी के लिए आठ लाख से अधिक श्रमिकों ने आवेदन किया। इससे जाहिर है कि उद्योगों को अभी पर्याप्त संख्या में श्रमिक नहीं मिलेंगे। बड़े उद्यमियों ने किसी तरह श्रमिकों की व्यवस्था कर ली तो कच्चे माल और सहायक उत्पादों की उपलब्धता की चुनौती भी सामने आएगी। कई उद्योग जिन वस्तुओं का उत्पादन करते हैं, उनके लिए सहायक उत्पादों की जरूरत होती है। ये सहायक उत्पाद प्राय: छोटी-छोटी औद्योगिक इकाइयां बनाती हैं। श्रमिकों के अभाव में ये इकाइयां काम नहीं कर पाएंगी तो बड़े उद्योगों का काम भी प्रभावित होगा। उद्यमियों को अपेक्षा है कि श्रमिकों और कच्चे माल की किल्लत की समस्या का निदान करने के लिए राज्य सरकार पहल करे। जो श्रमिक चले गए हैं, उनकी तो कोई बात नहीं, लेकिन अभी जो बचे हैं, उनको रोकने के लिए सरकार कोई ठोस कदम उठाए। उद्यमियों को इस बात की नाराजगी है कि सरकार ने श्रमिकों को उनके हित पंजाब में सुरक्षित हैं, यह विश्वास दिलाने के बजाय वोटों की राजनीति में घर वापसी के लिए ट्रेनों की निश्शुल्क सुविधा उपलब्ध करा दी। उद्यमियों का तर्क है कि हमने सरकार के निर्देश पर मुलाजिमों को पूरा वेतन दिया। उनके घर तक राशन पहुंचाया। उनको सैनिटाइज करने का पूरा ध्यान रखा। अब हमारी सरकार से अपील की है कि वह मुफ्त रेल सेवा को तुरंत रद कर श्रमिकों को रोके। अब तो उद्योग भी चलने लगे हैं।
  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
  • पढ़ाई का न हो नुकसानकोरोना संक्रमण के कारण देशभर में शिक्षण संस्थान बंद हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षा बोर्ड ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर सराहनीय कदम उठाया है, हालांकि बच्चों को थोड़ी कठिनाई भी ङोलनी पड़ रही है। इसका कारण अभी तक बच्चों की ओर से ऑनलाइन कक्षा से पढ़ाई न करना है। अगर कोरोना के कारण हालात और खराब हुए तो स्कूल जल्दी खुलने की संभावना नहीं है। इससे निश्चित रूप से बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होगा। ग्रामीण इलाकों में ऑनलाइन पढ़ाई में अधिक बाधा आ रही है, क्योंकि अधिकतर बच्चों के अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नहीं हैं और न ही नेटवर्क सही है। सरकार को इन बच्चों के बारे में भी सोचना चाहिए। ऑनलाइन पढ़ाई का अभियान गरीब बच्चों तक भी सुविधा पहुंचने के बाद ही सफल माना जाएगा।अंकुश शर्मा, लुधियानागरीब मजदूरों का पलायनदेश में कोरोना वायरस के कारण कफ्यरूग्रस्त जिलों एवं राज्यों में फंसे गरीब मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए सरकार की ओर से ट्रेनों का प्रबंध किया जा रहा है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में ऐसे मजदूर हैं, जोकि घर जाने के लिए तरस रहे हैं। कइयों को कोई साधन न मिलने पर वह पैदल ही घर लौटने के लिए मजबूर हो रहे हैं। सरकार को इन मजदूरों की भी मदद करनी चाहिए। कई गरीब मजदूर रास्ते में भोजन न मिलने से दम भी तोड़ रहे हैं। सैकड़ों ऐसे भी हैं जिनके पास फोन की सुविधा भी नहीं है। इसलिए उन्हें सरकार की ओर से घर जाने के लिए शुरू की गई कवायद की भी जानकारी नहीं मिल पाती है। इसलिए बहुत जरूरी है कि इन लोगों की भी मदद की जाए।अभिषेक तोमर, चंडीगढ़उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्ली
  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है

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  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लडबैंक
  • 216 जिलों में एक भी सक्रिय केस नहीं, मरीजों को बचाना सरकार की प्राथमिकता
  • कैलास मानसरोवर यात्र हो गई आसान
  • भले मर जाएं पर मुफ्तखोरी मंजूर नहीं..
  • आकाशवाणी व दूरदर्शन भी देंगे गिलगिट के मौसम की जानकारी
  • जालंधर, 9 092ए0908 2020
  • सामुदायिक प्रसार रोकने को एसिम्प्टोमैटिक लोगों की होगी जांच
  • रिकवरी रेट तीस प्रतिशत तक पहुंचा
  • एलजी पॉलीमर्स पर 50 करोड़ जुर्माना
  • वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का निधन
  • टूटा था गेस्ट हाउस का दरवाजा, देते रहे हम पहरा: नागर
  • कोरोना तेरा नाश हो ! तू पंकज कुलश्रेष्ठ को ले गया
  • 31 अगस्त तक आए ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला: सुप्रीम कोर्ट
  • कोविड-19 से मुकाबले को दो दवाओं के ट्रायल को मंजूरी
  • पीडीपी नेता नईम अख्तर पर पीएसए तीन माह बढ़ा

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  • शेयर बाजारों को मिला रिलायंस का दम
  • येस बैंक घोटाला
  • जियो प्लेटफॉर्म्स में मिला एक और बड़ा निवेश
  • जापान की भारत से मांग, करें कंपनियों के संचालन में मदद
  • देश बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा
  • ई-फार्मा कंपनियों के प्रचार को लेकर उठने लगे सवाल
  • राहत पैकेज के लिए टूट रहा सब्र

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  • अमेरिका में भारतवंशी डॉक्टर पिता-पुत्री की कोरोना से मौत
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  • वाशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में राष्ट्रीय प्रार्थना दिवस पर शांति पाठ करते स्वामी नारायण मंदिर के पुरोहित हरीश ब्रrाभट्ट ’एएफपी
  • किम ने चिन¨फग को कोरोना पर जीत का बधाई संदेश भेजा
  • चीन से बड़ी गलती हुई या वह अक्षम है
  • नफरत की सुनामी पर यूएन चिंतित
  • दक्षिण कोरिया में क्लब जाने वाले युवक से 13 लोग संक्रमित
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  • उद्योग चलाने के लिए देनी होगी सेल्फ डिक्लेरेशन
  • क्वारंटाइन में घूम रहे महाराष्ट्र से आए व्यक्ति पर केस दर्ज
  • सुधी पाठकों,आपके पत्रों और ई-मेल के जरिये हमें आपका स्नेह, सुझाव और प्रतिक्रियाएं मिलती रहती हैं। पत्र के साथ मित्रता के इस रिश्ते में संवाद को और सुगम बनाने के लिए अब आप हमसे सोशल मीडिया के जरिये भी जुड़ सकते हैं। इस पर आप हमें आस-पास घटित होने वाली घटनाओं, समस्याओं और अपने सुझावों से अवगत करवा सकते हैं। आपके संदेशों की प्रतीक्षा रहेगी। हमारा वाट्स एप नंबर है9878490805
  • दैनिक जागरण कार्यालय
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