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More from Front Page

  • पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
  • वेबसाइट पर पढ़े
  • कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसानपिथौरागढ़ : कैलास मानसरोवर यात्रियों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें पहाड़ के दुरूह रास्तों पर पैदल नहीं चलना पड़ेगा। चीन सीमा स्थित लिपुलेख तक वह सीधे वाहन से जा सकेंगे।’पेज 11
  • हरिद्वार में गंगा में अस्थि विसर्जन की सशर्त अनुमति
  • रिकवरी रेट और बढ़ा, सरकार ने कहा-कोरोना के साथ जीना होगा
  • मधुबनी की महिला की मुंबई में कोरोना से हुई मौत
  • पूर्वी चंपारण में एक, दरभंगा में चार समस्तीपुर में छह नए संक्रमित मिले
  • संख्या के अनुपात में प्रखंड स्तर पर चल रहे क्वारंटाइन सेंटर में रसोई बढ़ाएं: मुख्यमंत्री
  • ट्रैक पर सोए मध्यप्रदेश के 16 मजदूर ट्रेन से कटे
  • जिलों में 28 दिनों और 29 जिलों में 21 दिनों में एक भी नया केस नहीं
  • एक सप्ताह में 103 ग्रीन जिले हुए रेड या ऑरेंज
  • जयपुर : राजस्थान के आदिवासी मुफ्त का राशन नहीं ले रहे हैं। कहते हैं राशन तभी लेगें जब बदले में काम करेंगे। भौचक हुआ प्रशासन कह रहा कर्ज समझ स्वीकारें। ’पेज 12
  • एक जुलाई से होंगी सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं
  • इंतजार खत्म’सिर्फ बारहवीं कक्षा की परीक्षाएं ही कराएगा बोर्ड’दिल्ली के दंगा प्रभावित क्षेत्रों में होंगी दसवीं की भी परीक्षाएं
  • आइसीएसई बोर्ड भी जल्द लेगा परीक्षा
  • देश बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा
  • नामांकन के लिए आवेदन की तिथि बढ़ी
  • पटना के पांच बीएमपी जवान हुए कोरोना संक्रमित
  • औराई में सीएसपी संचालक से 4.15 लाख रुपये लूटे
  • पूर्वी चंपारण में एक, दरभंगा में चार समस्तीपुर में छह नए संक्रमित मिले
  • एक जुलाई से होंगी सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं
  • रिकवरी रेट और बढ़ा, सरकार ने कहा-कोरोना के साथ जीना होगा
  • हरिद्वार में गंगा में अस्थि विसर्जन की सशर्त अनुमति
  • पूर्वी चंपारण में एक, दरभंगा में चार समस्तीपुर में छह नए संक्रमित मिले
  • एक जुलाई से होंगी सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं
  • रिकवरी रेट और बढ़ा, सरकार ने कहा-कोरोना के साथ जीना होगा
  • हरिद्वार में गंगा में अस्थि विसर्जन की सशर्त अनुमति
  • पूर्वी चंपारण में एक, दरभंगा में चार समस्तीपुर में छह नए संक्रमित मिले
  • एक जुलाई से होंगी सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं
  • रिकवरी रेट और बढ़ा, सरकार ने कहा-कोरोना के साथ जीना होगा
  • हरिद्वार में गंगा में अस्थि विसर्जन की सशर्त अनुमति

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  • चिंता न करें, अन्य बीमारियों की तरह ही थम जाएगा कोरोना
  • क्वारंटाइन सेंटर में गड़बड़ी की शिकायत मिले तो सूचित करें
  • कोरोना के खिलाफ भाजयुमो ने शुरू किया सेवा-संकल्प अभियान
  • दलसिंहसराय में भूमि विवाद में तेजाब से हमला, दर्जनभर झुलसे
  • मेड़ विधि से करें मक्के की खेती
  • प्रेमिका के घर वालों ने युवक को पीटा, मौत
  • आरक्षण के मुद्दे पर दलीय सीमाएं टूटीं, साथ आए 22 विधायक

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  • आपूर्ति विभाग की बैठक में डीएम ने कहा-पहले नोटिस दें फिर करें कार्रवाई
  • 16 तक कटरा में सात घंटे बंद रहेगी बिजली
  • चक्कर खाकर गिरे प्रोफेसर पुत्र की मौत
  • तेज रफ्तार ट्रक ने पूर्व फौजी को कुचला
  • फोटो स्टेट संचालक नहीं पहुंचा घर
  • अपराधियों ने वैन लूटी, चालक को फेंका
  • प्रशासनिक अनुमति की जरूरत नहीं निर्धारित दिन व समय पर खोलें दुकानें
  • आधार नहीं देने पर राशन कार्ड होगा रद
  • नगर निगम का खजाना खाली कर्मचारियों को वेतन के लाले
  • सब्जी मंडी में रोज मिलती शारीरिक दूरी की अनदेखी
  • लॉकडाउन के कवच से ही कोरोना वायरस से बचा जा सकता है। इसे हराने के लिए शारीरिक दूरी जरूरी है। इसका पालन करना देश के हर नागरिक का कर्तव्य है। शासन व प्रशासन इससे उत्पन्न होने वाली भयावह स्थिति से अवगत करा रहे हैं और लॉकडाउन का पालन करने का अनुरोध कर रहे हैं। कुछ लोग इसका उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसा करके वे खुद को खतरे में डाल रहे साथ ही परिवार, समाज व देश के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। इस संकट की घड़ी में प्रशासन, पुलिस के साथ ही इस जंग को लड़ रहे हर किसी को पूरा सहयोग करें। डॉ. मो. अजहरुल हक सचिव, अकलीमा उवि ।
  • शनिवार, ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया विक्रम संवत 2077

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  • यूपी के सुल्तानपुर से साइकिल से साहेबगंज पहुंचे प्रवासी
  • क्वारंटाइन केंद्रों में सफाई की स्थिति बदतर
  • सीएम तक पहुंची हकीकत हरकत में प्रशासनिक महकमा
  • 80 से लिए गए सैंपल, 531 की रिपोर्ट निगेटिव, दो भर्ती
  • जंक्शन पर हिसार और जामनगर से पहुंचे 2339 प्रवासी और विद्यार्थी
  • अखबार पढ़ना जरूरी, इससे कोरोना का कोई खतरा नहीं
  • रक्षा करना प्रभु..
  • अब जन्मभूमि को ही कर्मभूमि बनाने का लिया संकल्प
  • कोरोना योद्धाओं को किया सम्मानित
  • ईद के लिए रखे पैसों से भूखों को खिलाएं खाना

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  • बीएड प्रवेश परीक्षा 14 जून को संभावित मांगी केंद्रों की सूची
  • मुशहरी में तेज बुखार से पीड़ित बच्चे की मौत
  • देवरिया के एक बच्चे में एईएस की पुष्टि
  • डॉ. मंजूबाला को बनाया गया निदेशक, ग्रहण किया पदभार
  • समय का सदुपयोग कर घर बैठे करें पढ़ाई
  • ऑनलाइन आइआइटी और मेडिकल की तैयारी
  • हिंदी रोजगारपरक विषय ध्यानपूर्वक अध्ययन जरूरी
  • इलाज की जगह बीमारी से डर भाग रहे चिकित्सक
  • तू कितनी अच्छी है ..

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  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।-डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीममता बनर्जी की ओछी राजनीतिदेश में हालात कुछ भी हो, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार अपनी ओछी राजनीति से बाज नहीं आती। बंगाल भी भारत का अंग है, यह शायद ममता को याद ही नहीं रहता। इसी वजह से वह अपनी तानाशाही नीति का प्रयोग करती नजर आती हैं। पार्टी की राजनीति और देशहित का कार्य दोनों अलग-अलग हैं। ममता सरकार केंद्र की भाजपा सरकार का विरोध करे, लेकिन देशहित के कार्य में स्वतंत्र रूप से सहयोग करे। ममता की तानाशाही नीति की वजह से बंगाल विकास के पहिए से ही उतर चुका है। ममता सरकार में बंगाल का हाल पुराने कश्मीर की तरह हो गया है। हर देशहित के कार्य में अड़चन लगाने वाली ममता सरकार ने इस बार पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर कार्गो के आवागमन पर रोक लगा दी है। इससे उन्होंने यह साबित किया है कि उनके विरोध के सामने देशहित कुछ भी नहीं है। -शैलेश रंजन, डुमरा, सीतामढ़ी सकारात्मक बदलावलॉकडाउन की अवधि में भी कुछ सकारात्मक बदलाव हुए हैं। प्रकृति शुद्ध हुई है। परिवार एकजुट हुए हैं। जीवन सादा हो गया है और इस भागदौड़ भरी जिंदगी में थोड़ी स्थिरता सी आ गई है। सबसे बड़ी बात यह कि हमने थोड़ी कमी में भी जीना सीख लिया है। लेकिन, इस लॉकडाउन के कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं। लॉक डाउन की इस लंबी अवधि में आíथक गतिविधियां जैसे रुक सी गई हैं। आय के सभी साधन बंद हैं और हमें जरूरी खर्चो के बारे में भी सोचना पड़ रहा है। पहले से ही आíथक संकट ङोल रहे परिवारों के लिए कोरोना वायरस किसी मुसीबत से कम नहीं है। सभी अपने रोजगार और भविष्य के प्रति चिंतित हैं। इस मुश्किल समय में हमें बजट बनाकर खर्च करने की जरूरत है। हमें अपनी आवश्यकताओं की प्राथमिकता तय करनी होगी। खर्चो पर नियंत्रण रखकर हम फिजूलखर्ची से बच सकते हैं और भविष्य के लिए कुछ बचत भी कर सकते हैं। बच्चों को भी चीजों को संभालकर रखने और बचत करने की आदत डलवानी चाहिए। इससे वे भी जिम्मेदार बनते हैं। -कृतिका श्रीवास्तव, मोतिहारी
  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
  • (6) शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है

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  • डेयरी किसानों के लिए पैकेज पर हो रहा विचार
  • संस्थाओं को फिलहाल पंजीकरण से छूट
  • भारत की पहली जीत
  • बत्र का कार्यकाल बढ़ा
  • भारतीय टीम के क्वारंटाइन के लिए तैयार बीसीसीआइ
  • .. जियो प्लेटफॉर्म्स में एक और बड़ा निवेश
  • द. कोरिया में शुरू हुई फुटबॉल लीग
  • सरकार ने उधारी लक्ष्य 12 लाख करोड़ रुपये किया
  • लॉकडाउन में दिखा दी कोयले की ढुलाई, जीएसटी टीम का छापा
  • पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
  • कंपनियों के संचालन में जापान ने मांगी मदद
  • शेयर बाजारों को मिला रिलायंस का दम
  • रितिक की मुरीद हैं सारा अली खान

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  • कोरोना तेरा नाश हो ! तू पंकज को ले गया
  • कर्नाटक सरकार की ओर से विशेष ट्रेन की सेवा दोबारा शुरू करने के बाद शुक्रवार को बेंगलुरु के केआर मार्केट में प्रवासी कामगारों का हुजूम उमड़ पड़ा। ’ प्रेट्र
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा-31 अगस्त तक आए विवादित ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
  • हरियाणा में तीस मुस्लिम परिवारों ने की हंिदूू धर्म में वापसी
  • फीचर फोन वाले कोरोना मरीज भी नहीं दे पाएंगे सरकार को चकमा
  • चीन पर हर्जाने का दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
  • चीन सीमा तक सड़क तैयार, कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान
  • मई में किफायती पेपर किट से शुरू हो जाएगी जांच
  • महाराष्ट्र से पैदल ही बड़ी संख्या में पलायन कर रहे मजदूर
  • पैकेज में हुई देरी तो बेरोजगारी की आएगी सुनामी
  • महाराष्ट्र में लगातार तीसरे दिन एक हजार से ज्यादा नए मामले

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  • संक्रमण के तीसरे दिन सूंघने की शक्ति खो सकता है रोगी
  • द्वितीय विश्व युद्ध के अंत की 75वीं वर्षगांठ
  • भारतवंशी डॉक्टर पिता पुत्री की कोरोना से मौत
  • वुहान मार्केट की कोरोना वायरस के प्रसार में रही भूमिका: डब्ल्यूएचओ
  • स्पेन में समुद्र तटों पर जाने की इजाजत
  • विश्व बैंक ने अपना पहला ऋण फ्रांस को दियावैश्विक वित्तीय संस्था विश्व बैंक ने पहला ऋण 1947 में फ्रांस को दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फ्रांस ने 50 करोड़ डॉलर का कर्ज मांगा था। हालांकि विश्व बैंक ने 25 करोड़ डॉलर का ऋण स्वीकृत किया।
  • भले मर जाएं पर मुफ्तखोरी हमें मंजूर नहीं
  • वैदिक मंत्रों से गूंजा व्हाइट हाउस
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी फिल्म ‘लक्ष्मी बॉम्ब’
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