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  • चीन सीमा तक सड़क तैयार, कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान
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  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से, जल्द आएगा शेड्यूल
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  • सूनी रही जामा मस्जिद
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  • जागरण विशेष भले मर जाएं पर मुफ्तखोरी हमें मंजूर नहीं..
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  • बीसीईसीई ने बढ़ाई नामांकन की तिथि
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  • क्वारंटाइन सेंटर में रसोई की संख्या बढ़ाएं : नीतीश
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  • ट्रैक पर सोए 16 मजदूर ट्रेन से कटे
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  • खगड़िया में चार, भागलपुर व बांका में एक-एक लोग कोराना पॉजिटिव
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  • वैदिक मंत्रों से गूंजा व्हाइट हाउस, पुरोहित ने किया पाठवाशिंगटन : अमेरिका में राष्ट्रीय प्रार्थना दिवस पर राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में एक हंिदूू पुरोहित ने पवित्र शांति पाठ कराया। कोरोना महामारी से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कुशलता के लिए यह शांति पाठ किया गया।’पेज 14
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  • मुख्यमंत्री ने क्वारंटाइन सेंटर के बारे में पूछा
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  • तीन लाख किसानों के खाते में सौ करोड़ रुपये ट्रांसफर
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  • पटना में खुला बाजार पहले ही दिन पांच करोड़ का कारोबार
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  • सिर्फ छह लोगों की वजह से 234 हुए संक्रमित
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  • आश्रम बना बुजुर्गो का राशन बैंक, रोज मिल रहा भोजन
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  • यहां मिलेगी सहायता
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  • सैंडिस स्टेडियम के बाहर बनेगा स्वीमिंग,
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  • 22 घंटे तक गुल रही बिजली
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  • -राजकोट से अपने नौ माह के बच्चे संग आई चांदनी ने सुनाया दर्द, कहा-
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  • खेरेहिया मध्य विद्यालय के कमरे का ताला तोड़कर चोरी
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  • गोराडीह में जमीन विवाद में वृद्ध की पीटकर हत्या
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  • पहली बार ऑनलाइन होगी एलसैट प्रवेश परीक्षा
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  • आज के विजेता : 08 मई के अंक में प्रकाशित तस्वीर पुलिस लाइन के पास से तिलकामांझी की ओर जानी वाली सड़क थी। सबसे पहले इसका सही जवाब देने वालों का नाम इस प्रकार है। सोमनाथ राय गौरीपुर, वेद पराशर तुलसीनगर, प्रशांत गौरव अकबरनगर, पारसमणि पीयूष सच्चिदानंद नगर, आशीष सर्राफ मंदरोजा, भानु विसाज जय विहार कॉलोनी, प्रियंका कुमारी जय विहार कॉलोनी, प्रशांत कुमार सच्चिदानंद नगर, अभिषेक कुमार सिकंदरपुर, प्रत्यूष कुमार सच्चिदानंद नगर, अनिकेत राज हनुमान घाट, प्रभाष कुमार जय विहार कॉलोनी, वेद विसाज जय विहार कॉलोनी, रवि कांत रवि बिहपुर, शिवम तिवारी भीखनपुर, दीपिका कुमारी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, राहुल झा अलीगंज, अभिषेक कुमार वारसलीगंज, निक्की गुप्ता मारूफगंज, जीतू सिंह बड़ी खंजरपुर, मनीष कुमार इंग्लिश चिचरौन, सौरभ शर्मा भीखनपुर, देव गुप्ता मारूफचक, फंटूश कुमार सच्चिदानंद नगर, शिव मंडल कंपनी बाग।
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  • आटा नरम, दाल गरम
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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
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  • सतर्क रहना जरूरी राज्य में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और विकास कार्यो को बढ़ावा देने के साथ रोजगार सृजन के लिए लॉकडाउन के नियमों में आंशिक छूट देना समय की मांग है, लेकिन इस दौरान अत्यधिक सतर्कता भी जरूरी है। कुछ क्षेत्रों में थोड़ी छूट के बाद लोग जिस तरह बेतहाशा घरों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, उससे कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। इसलिए जहां भी लॉकडाउन में ढील दी जा रही है, वहां प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतते हुए कोताही करने वालों से सख्ती से पेश आना होगा। लोगों को भी चाहिए कि आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलें। साथ ही शारीरिक दूरी, मास्क और साफ-सफाई का ख्याल रखें। यदि सरकार के दिशा-निर्देशों का सही से पालन नहीं किया गया तो स्थिति बेकाबू हो सकती है। इससे बचने के लिए आम लोगों का सहयोग जरूरी है, लेकिन बहुत से लोग ऐसा नहीं करके कोरोना संक्रमण के खतरे को बढ़ा रहे हैं। समझना होगा कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए किसी भी तरह की अफवाह या फिर गलत धारणा से बचते हुए सतर्क रहना जरूरी है। यह उचित और सुरक्षित व्यवस्था है कि प्रदेश के बाहर से लौट रहे प्रवासी तुरंत अपने घर नहीं जाएंगे। इन लोगों को भी चाहिए कि वे स्वेच्छा से अपनी जांच कराने के लिए आगे आएं और चिकित्सकों की निगरानी में निर्धारित समय तक क्वारंटाइन सेंटर में रहें। सरकार उनकी देखरेख के प्रति सजग और तत्पर है। सभी जिला अस्पतालों में कोरोना वायरस के नमूना संग्रह की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। प्रयास किया जाना चाहिए कि बाहर से आए अधिक से अधिक लोगों के नमूने लिए जाएं, ताकि कहीं पर कोरोना का एक भी संदिग्ध मरीज छूटने न पाए। कई लोग दूसरे प्रदेशों से चोरी-छिपे यहां पहुंच रहे हैं। वैसे लोग पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। उनकी तलाश में पुलिस लगातार परेशान है, लेकिन वे स्वेच्छा से सामने नहीं आ रहे। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस उन लोगों से क्वारंटाइन सेंटर जाने और जांच कराने का आग्रह करती है, तो वे सुनने को तैयार नहीं हैं। यह प्रवृत्ति घातक होने के साथ समस्या को बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। ऐसा कतई नहीं किया जाना चाहिए।
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  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
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  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
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  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीगांवों में रोजगार के स्रोत खुलेदेशभर से बिहारी मजदूर अपने राज्य लौट रहे हैं। वे कह रहे हैं कि लॉकडाउन के कारण काम धंधा नहीं मिल रहा था। फैक्ट्री मालिक कोई राहत नहीं दे रहे थे। पैसे खत्म होने से मकान किराया व खाने का खर्च वहन करना मुश्किल हो रहा था। मकान किराया बाद में देने की बात वे नहीं मान रहे थे। वहां की सरकारें भी मदद नहीं कर रही थीं। ऐसी परिस्थिति में प्रवासी मजदूरों के घर लौटने के सिवा कोई चारा नहीं था। वे वोट बैंक हैं। इसलिए उनके वापसी को लेकर सभी पार्टियां शोर मचाने लगीं। लेकिन उनमें से किसी ने यह नहीं कहा कि अगर उनके शासनकाल में गांवों में संसाधनों के अनुरूप फैक्टियां लगाईं गई होतीं तो आज बिहारी मजदूरों को ऐसी विपत्ती की घड़ी में बाहर नहीं रहना पड़ता। अब भी इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। मिथिलेश कुमार, बलुआघाट, भागलपुर।खेल स्पर्धाएं निरस्त होना सहीकोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सभी के लिए शारीरिक दूरी बनाए रखना जरूरी है। बड़े खेलों में खिलाड़ियों व दर्शकों के लिए इसका पालन करना थोड़ा मुश्किल है। ऐसे में खेलों को अभी शुरू करना चुनौती भरा माना जा रहा है। यही वजह है कि ओलंपिक, आइपीएल जैसे खेल समारोह स्थगित कर दिया गए हैं। अधिकांश खेल प्रतियोगिताएं बंद हैं। बहुत सोच-विचार के बाद ही उसे शुरू किया जाएगा। इसके लिए खेल प्रेमियों को धैर्य रखना चाहिए। टी. मनु, कटिहार।मातृ दिवस पर करें मां का सम्मान10 मई को हमलोग मातृ दिवस मनाने जा रहे हैं। मां ने सदा हमारे दुख-सुख का ख्याल रखा। अपने स्नेह व अनुशासन से सींच कर अपने लाल को सैनिक, डॉक्टर, अभियंता, अधिवक्ता, आइएएस, शिक्षक आदि बनाए। हमें मातृ दिवस पर सभी माताओं का चरणस्पर्श कर उनका सम्मान करना चाहिए। सत्यनारायण,खरीक पूर्वी घारारी, भागलपुर।
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  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
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  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
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  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
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  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
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  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है
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  • सरकार ने उधारी लक्ष्य 12 लाख करोड़ रुपये किया
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  • पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
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  • कंपनियों के संचालन में जापान ने मांगी मदद
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  • शेयर बाजारों को मिला रिलायंस का दम
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  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा-31 अगस्त तक आए विवादित ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
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  • वैदिक मंत्रों से गूंजा व्हाइट हाउस
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