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  • बंगाल में कोरोना से मरने वालों की दर सबसे अधिक
  • पिता ने बच्ची को मारा, उसे आक्रोशितों ने मार डाला
  • कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान, चीन सीमा तक सड़क तैयार
  • रिकवरी रेट तीस प्रतिशत तक पहुंचा, 216 जिलों में कोरोना का एक भी सक्रिय केस नहीं
  • कविगुरु को श्रद्धांजलि..
  • ट्रेन से कटकर मप्र के 16 मजदूरों की मौत
  • सीबीएसई की परीक्षाएं एक जुलाई से, शेड्यूल जल्द
  • शराब की ऑनलाइन बिक्री पर विचार करे सरकार: शीर्ष कोर्ट
  • चीन से कोई बड़ी गलती हुई या फिर वह अक्षम है: ट्रंप

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  • परिवार के साथ वक्त गुजारने का एक स्वíणम अवसर
  • गोजमुमो की ओर से चालकों को बांटी गई राहत सामग्री
  • सिक्किम कोविड-19 मुक्त,पूर्व सीएम के आरोप बेबुनियाद
  • एक ही जिले में ऑड-इवेन नंबर के निजी वाहन चलाने की अनुमति
  • मंदिर से पहले खुल गए मदिरालय, बरसे लोग
  • रोटरी सिलीगुड़ी ग्रीन ने कर्मयोगियों को दिए मास्क और सैनिटाइजर

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  • शनिवार, ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया वि.सं. 2077
  • खबरें एक मिनट में
  • स्कूल में पढ़ाई से बेहतर कुछ भी नहीं, ऑनलाइन शिक्षा अस्थाई विकल्प
  • हासीमारा में सड़क हादसे में सिलीगुड़ी के दो लोगों की मौतसंवादसूत्र, जयगांव: हासीमारा आउटपोस्ट थाना के अधीन के गुरुद्वारा के पास नेशनल हाईवे 31 पर हुई दुर्घटना में 2 लोगों की मृत्यु हो गई है । पुलिस के अनुसार सिलीगुड़ी से कार में सवार होकर दो लोग अलीपुरद्वार की ओर जा रहे थे। इसी दौरान विपरीत दिशा से आ रहे एक ट्रक से कार की सीधी टक्कर हो गई। हासीमारा आउट पोस्ट थाना प्रभारी प्रेम कुमार थामी ने बताया कि सड़क हादसे में दो लोगों की मृत्यु हुई है । उन्होंने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि यह दोनों सिलीगुड़ी के रहने वाले हैं। पुलिस घटना की जांच कर रही है। पुलिस दोनों गाड़ियों को जब्त कर थाने ले आई है। लॉकडाउन के कारण गाड़ियों की आवाजाही इस सड़क पर पहले से ही नहीं के बराबर है। अन्यथा टैफिक की समस्या हो सकती थी।
  • जनता की नादानी ने बढ़ाई पुलिस की परेशानी
  • कोरोना के माहौल में भी हो रही है अड्डेबाजी
  • एक और कोरोना मरीज ने जीती जिंदगी की जंग
  • खाद्य सामग्रियों का वितरण जारी

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  • बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ ने 382 याबा टैबलेट के साथ तस्कर को पकड़ा
  • खबरें एक मिनट में
  • बंगाल में बिगड़ते जा रहे हैं हालात
  • मुजफ्फरपुर में तेज बुखार व हाई शुगर से पीड़ित मासूम की मौत
  • पटना समेत 15 स्टेशनों को बनाया गया कोविड देखभाल केंद्र
  • दलीय सीमाएं टूटी, आरक्षण के सवाल पर साथ आए 22 विधायक
  • टैगोर जयंती पर ममता रचित कोरोना गीत गाने के आदेश को लेकर हंगामा
  • विभिन्न स्थानों पर हेल्थ डिंक का वितरण
  • कैलाश विजयवर्गीय’ फाइल फोटो
  • भूमि विवाद में तेजाब से हमला, दर्जनभर झुलसे
  • और तीन जिलों में पहुंचा कोरोना, 24 नए संक्रमित
  • खबरें एक मिनट में
  • पटना में खुला बाजार, पहले ही दिन पांच करोड़ का कारोबार
  • कोलकाता में लॉकडाउन में पांच गुना कम हुए अस्थमा अटैक के मामले
  • किराया दोगुना करे सरकार: निजी बस मालिक
  • सिलीगुड़ी, 9 092ए0908 2020

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  • खबरें एक मिनट में
  • अपने घर वापस जाने के लिए तरस रहे प्रवासी मजदूर
  • स्वास्थ्य कर्मचारियों में जरूरी सामग्री वितरित
  • शारीरिक दूरी को ध्यान में रखकर निकाली गई शोभायात्र
  • चार रूटों में सरकारी बस सेवा शुरू
  • कोरोना राहत कोष में चायपत्ती बिक्री का प्रति किलो 50 पैसा जमा होगा
  • राशन का चावल चोरी करने के आरोप में दो गिरफ्तार
  • गुटीय विवाद में गोली लगने से युवक घायल
  • सादगी से मनी कविगुरु रवींद्र की जयंती
  • डुआर्स के प्रवासी मजदूरों ने घर वापसी के लिए सीएम से लगाई मदद की गुहार
  • नर्सिग होम से मांगी सहायता
  • प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए सांसद जॉन बारला का धरना
  • पत्र ही नहीं मित्र भी इस समय कोरोना वायरस की चपेट में पूरी दुनिया है। भारत में भी इसका प्रभाव बढ़ता जा रहा है। देश में पांच हजार से अधिक लोग संक्रमित हो गए हैं। बंगाल की बात करें तो यहां पर भी संक्रमितों की संख्या रोजाना बढ़ती जा रही है। दैनिक जागरण हमेशा अपने पाठकों के लिए केवल अखबार (पत्र) ही नहीं मित्र की भूमिका में रहा है। कोरोना संकट के समय में भी जागरण अपने पाठकों के लिए मित्र की तरह खड़ा है। मित्रता निभाने के लिए दैनिक जागरण ने आपातकालीन सेवा शुरू की है। इस आपातकालीन सेवा में यदि किसी को कोई दवा की जरूरत है और वह उत्तर बंगाल के किसी जिले या सिक्किम का निवासी है। तो आप दैनिक जागरण कार्यालय सिलीगुड़ी में हमें दवाएं उपलब्ध कराएं। जिसे हम मालदा, बालुरघाट, कूचबिहार, दिनहाटा, रायगंज, अलीपुरद्वार, जयगांव , खोरीबारी ,कालिम्पोंग,और सिक्किम की राजधानी गंगटोक तक पहुंचाएगे। इस संबंध में किसी भी तरह क ी जानकारी के लिए इन नंबरों पर संपर्क करें 94340 51607 या 07332 50392

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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
  • प्रशासक नियुक्ति पर सवालबंगाल में 100 से अधिक नगर निकायों में अप्रैल-मई में चुनाव होना था। परंतु, जिस तरह से बंगाल में कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन चल रहा है जिसके चलते निकाय चुनाव नहीं हो पा रहा है। इस बीच नगर निकायों में निर्वाचित बोर्डो का कार्यकाल खत्म हो रहा है। परंतु, इस महामारी में नगर निकायों में आम लोगों से जुड़ी सेवाएं बहाल रखने के लिए राज्य सरकार को प्रशासक नियुक्त करना पड़ रहा है। कोलकाता नगर निगम में 96 वर्षो में पहली बार प्रशासक नियुक्त किया गया है। क्योंकि, सात मई को ही नगर निगम के तृणमूल बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो गया। इसी तरह से सिलीगुड़ी नगर निगम से लेकर कई और नगर पालिकाओं में निर्वाचित बोर्डो का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। उन सभी में अब प्रशासक नियुक्त करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। परंतु, बंगाल सरकार द्वारा प्रशासक नियुक्त किए जाने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। सबसे पहले कोलकाता नगर निगम में मेयर का कार्यकाल खत्म होते ही फिरहाद हकीम को ही प्रशासक और उनके साथ मेयर परिषद के सदस्य रहे तृणमूल नेताओं को बोर्ड में शामिल कर दिया गया है। इसे लेकर मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। यहां तक कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं भाजपा से लेकर माकपा व कांग्रेस नेता भी निशाना साध रहे हैं। क्योंकि, बंगाल में अधिकांश नगर निकायों पर तृणमूल का कब्जा था और अब उन्हीं लोगों को नियुक्त किया जा रहा है जो चेयरमैन, मेयर तथा मेयर परिषद सदस्य के रूप में बोर्ड में शामिल थे। हालांकि, सरकार का तर्क है कि इस समय महामारी फैली है और जो लोग निकायों के कामकाज को संचालित कर रहे थे, उन्हीं लोगों के हाथों में कमान रहने पर लोगों को बेहतर सेवाएं व सुविधा मिलेगी। नए लोगों को नियुक्त करने पर स्थिति बिगड़ सकती है। परंतु, एक सवाल यह है कि निर्वाचित बोर्ड होने पर विपक्षी पार्षद भी होते थे। परंतु, इस समय तो विपक्षी पार्षद का कार्यकाल खत्म हो गया। वे अपने इलाके में क्या करेंगे. सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा।
  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीसंवेदनहीनता से ही खतरे में मानवता चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना काल लंबा चलेगा या इसे यूं समङों के 2020 कोरोना ईयर के तौर पर जाना जाएगा। ऐसे में चार महीने के अनुभवों ने एहसास करा दिया कि हम संकट में भी मर्यादित व अनुशासित आचरण प्रदर्शित नहीं कर पाए। यह तो गनीमत मानिए कि हमारी सरकार की तत्परता के कारण अमेरिका और यूरोप जैसे भयावह स्थिति नहीं बन पाई जबकि उन देशों की जनसंख्या के स्वरूप व गुणवत्ता के मामले में हम कहीं नहीं ठहरते। इस संदर्भ में हमें भविष्य की रणनीति बनाते समय जनसंख्या के आकार और स्वरूप पर विचार करने ही होंगे। इसके लिए समुचित शिक्षा व्यवस्था, कारगर जनसंख्या नीति एवं नियोजित विकास पर एक साथ ध्यान देने की जरूरत है। हमारी संवेदनहीनता के कारण ही आज मानवता खतरे में है। इसी वजह से हम अपने अस्तित्व के सामने औरों अस्तित्व को स्वीकार नहीं कर पाते हैं। इसे व्यापक संदर्भ में देखे जाने की जरूरत है। मानव मानव के बीच ही नहीं अपितु हमारे आसपास समस्त जैव अजैव जगत के प्रति भी। इसमें शिक्षा व्यवस्था की अहम भूमिका हो सकती है। जो हमें संवेदनशील बनाए। सभी तरह की नकारात्मकता यहाँ तक कि धर्म के नकारात्मक प्रभाव से दूर रखे। संविधान व कानून के प्रति सम्मान का भाव जगाए। देशभक्ति की भावना जागृत रखे। इस संदर्भ में नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करते समय कोरोना संकट एवं उससे उत्पन्न परिस्थितियों का भी ख्याल रखना होगा, ताकि कम से कम संकट के समय धर्म, भाषा, क्षेत्र, जाति, नस्ल से परे हम देश, काल एवं परिस्थिति के अनुरूप व्यवहार करें हम सब। खैर फिलहाल सरकार द्वारा दिए गए गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करें हमलोग, अन्यथा यह कोरोना ईयर कहीं अगले साल तक न खींच जाए। हमें सरकार द्वारा जारी नियमों का अक्षरश: पालन करना चाहिए। किसी भी तरह की ढील का नाजायज फायदा नहीं उठाना चाहिए। किशोर प्रधान, कालिम्पोंग
  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
  • संस्थापक-स्व. पूर्णचन्द्र गुप्त, पूर्व प्रधान सम्पादक-स्व. नरेन्द्र मोहन, सम्पादकीय निदेशक-महेन्द्र मोहन गुप्त, प्रधान सम्पादक-संजय गुप्त, जागरण प्रकाशन लि. के लिए: आनन्द त्रिपाठी द्वारा जागरण प्रकाशन लिमिटेड, 31 िफ्लोर, जीवनदीप कॉम्पलेक्स, थर्ड माईल, सेवक रोड, सिलीगुड़ी-734008 से प्रकाशित एवं दर्पण पब्लिकेशन आइ. लि., मौजा डाबग्राम-कक, थाना : भक्तिनगर, नवापाड़ा, निकट: साउडांगी हाट और घोरामोड़, जिला: जलपाईगुड़ी (पश्चिम बंगाल)-735135 से मुद्रित, सम्पादक (बिहार/ प.बंगाल) -प्रशांत मिश्र* दूरभाष : सिलीगुड़ी कार्यालय : 0353-3043000/2590138/2590139, ए-ें्र’: 2्र’्र¬41्रAं¬1ंल्ल>>>>>>>>2’¬.Aं¬1ंल्ल.ङ्घे, ठ.क. ठ. , हइकठ/2012/49293 * इस अंक में प्रकाशित समस्त समाचारों के चयन एवं सम्पादन हेतु पी.आर.बी. एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी। समस्त विवाद सिलीगुड़ी न्यायालय के अधीन ही होंगे। वर्ष 8 अंक 278
  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है

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  • खबरें एक मिनट में
  • असम में केएलओ भर्ती मॉड्यूल का भंडाफोड़ सात उग्रवादी गिरफ्तार
  • पहली बार ऑनलाइन होगी एलसैट प्रवेश परीक्षा
  • आकाशवाणी-दूरदर्शन भी देंगे गिलगिट के मौसम की जानकारी
  • टेस्टिंग पर जोर, पर किट पर सरकार की खामोशी
  • वायुसेना, नौसेना व कोस्ट गार्ड के 37 हवाई अड्डों का होगा आधुनिकीकरण
  • उप्र में 69000 शिक्षक भर्ती की उत्तरकुंजी जारी, रिजल्ट में टालमटोल
  • हरियाणा में 30 मुस्लिम परिवार हंिदूू धर्म में लौटे
  • एलजी पॉलीमर्स पर 50 करोड़ जुर्माना
  • 31 अगस्त तक आए ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
  • महाराष्ट्र में तीसरे दिन एक हजार से ज्यादा नए मामले
  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लड बैंक
  • पैकेज में हुई देरी तो बेरोजगारी की आएगी सुनामी: राहुल
  • मई अंत तक किफायती पेपर किट से होगी जांच

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  • द. कोरिया में शुरू हुई फुटबॉल लीग
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  • खबरें एक मिनट में
  • इकोनॉमी की रिकवरी तय, 5.66 लाख करोड़ के कर्ज आवंटित : सीतारमण
  • शेयर बाजारों को मिला रिलायंस का दम
  • जियो प्लेटफॉर्म्स में एक और बड़ा निवेश
  • लोन ग्राहकों व एनबीएफसी को एसबीआइ की बड़ी राहत
  • पुराना स्टॉक निकालने के लिए ऑफर की भरमार
  • देश बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा

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  • बीएसएफ के 30 और कर्मी कोरोना संक्रमित कुल संख्या 223 पहुंची
  • कोरोना तेरा नाश हो ! तू पंकज को ले गया
  • वुहान मार्केट की रही कोरोना के प्रसार में भूमिका : डब्ल्यूएचओ
  • उप्र में एप से प्रवासी कामगारों को योजनाओं का लाभ और रोजगार भी
  • कोरोना को लेकर सर्वे कर रही टीम का रजिस्टर फाड़ा
  • स्पेन में समुद्र तटों पर जाने की इजाजत
  • कोविड-19 से मुकाबले के लिए दो दवाओं के ट्रायल को मंजूरी

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  • कोरोना से फैल रही नफरत की सुनामी पर यूएन ने जताई चिंता
  • चीन पर हर्जाने का दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
  • अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री कोरोना की चपेट में
  • चीन में बेटे ने मां को जिंदा दफनाया, तीन दिन बाद बचाया गया
  • पाकिस्तान ने जब्त की अफगान तालिबान प्रमुख की संपत्ति
  • जापान में एक और क्रूज बना संक्रमण का केंद्र
  • चीन से कोई बड़ी गलती हुई या फिर वह अक्षम है: ट्रंप
  • विश्व बैंक ने अपना पहला ऋण फ्रांस को दियावैश्विक वित्तीय संस्था विश्व बैंक ने पहला ऋण 1947 में फ्रांस को दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फ्रांस ने 50 करोड़ डॉलर का कर्ज मांगा था। हालांकि विश्व बैंक ने 25 करोड़ डॉलर का ऋण स्वीकृत किया।
  • वैदिक मंत्रों से गूंजा व्हाइट हाउस
  • अमेरिका में भारतवंशी डॉक्टर पिता-पुत्री की कोरोना से मौत
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