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More from Front Page

  • पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
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  • हिमाचल में लुभा रही निर्मल नदियों की सुखद कल-कल ’पेज 11
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  • वेबसाइट पर पढ़े
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  • सूनी रही जामा मस्जिद
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  • रिकवरी रेट और बढ़ा, कोरोना के साथ जीना होगा
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  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से, जल्द आएगा शेड्यूल
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  • बांका में क्वारंटाइन सेंटर में पुलिस ने भांजी लाठी
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  • उक्त व्यक्ति कर्नाटक से आया है। उसे क्वारंटाइन किया गया है। वह घर भाग रहा था। बारिश की वजह से फिसलने के कारण उसका हाथ टूटा है। परमजीत सिरमौर, सीओ, शंभूगंज
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  • खगड़िया में चार, कटिहार में एक लोग कोरोना से संक्रमित
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  • कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान, चीन सीमा तक सड़क तैयार
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  • संख्या के अनुपात में क्वारंटाइन सेंटर में रसोई की संख्या बढ़ाएं: नीतीश
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  • ट्रैक पर सोए 16 मजदूर ट्रेन से कटे
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More from Front Page

  • दो पक्षों के बीच मारपीट मामले में दर्ज किया गया तीन अलग-अलग मुकदमासंवाद सूत्र, मुंगेर : मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सीताकुंड डीह में दो पक्षों के बीच भिड़ंत के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 25 आरोपितों में से 19 को गिरफ्तार किया है। एसपी लिपि सिंह ने बताया कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सीताकुंड डीह में दो पक्षों के बीच गाली-गलौज, मारपीट और पथराव की घटना हुई थी। घटना के बाद एएसपी हरिशंकर कुमार के नेतृत्व में छापामारी दल का गठन किया गया था। एएसपी के नेतृत्व में गठित दल में मुफस्सिल, कोतवाली, कासिम बाजार थानाध्यक्ष और वासुदेवपुर ओपी अध्यक्ष शामिल थे। टीम ने छापामारी कर 19 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपितों में दिलीप मंडल, बिट्टू मंडल, पारस मंडल, सुमित मंडल, नवीन मंडल, सोनू मंडल, मंटू मंडल, राजीव यादव, रणवीर यादव, ¨पकु यादव, टुनटुन यादव, प्रकाश यादव, राजकुमार यादव, मिथुन यादव, रामराज यादव, नरेश यादव, रंजीत यादव, विनय यादव शामिल हैं। इसके अलावा विजय यादव की भी गिरफ्तारी हुई है। एसपी ने बताया कि दोनों पक्ष बराबर एक दूसरे के साथ मारपीट एवं पथराव की घटना को अंजाम देते थे। इसके बाद पुलिस जब गुरुवार को छापामारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई के लिए गई तो दोनों पक्षों के द्वारा पुलिस दल पर पथराव किया गया था। पुलिस दल पर पथराव की घटना को लेकर अलग से एक मुकदमा दर्ज किया गया। मामले को लेकर कुल तीन मुकदमा दर्ज किए गए हैं। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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  • बच्चों के झगड़े में दो पक्षों ने एक दूसरे पर किया पथराव
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  • छूट मिलने पर लोग उड़ाने लगे शारीरिक दूरी की धज्जियां
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  • 36 लोगों ने किया रक्तदान
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  • मुजफ्फरगंज हाट चौक मुहल्ले में पारिवारिक कलह के कारण महिला ने की आत्महत्या
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  • क्वारंटाइन कैंप को कराया जा रहा सैनिटाइज
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  • संकट की इस घड़ी में लोगों का रखें ध्यान, अपनी सुरक्षा के प्रति भी रहें जागरूक : डीजीपी
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  • सदर अस्पताल में नहीं मिल रही है मरीजों को अल्ट्रासाउंड और एक्स रे की सुविधा
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  • आधा दर्जन लोग हुए जख्मी मामले की जांच में जुटी पुलिस
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  • दूसरे पक्ष ने कहा : बच्चों के बीच में बड़े ने किया पथरावदूसरे पक्ष के सकलदेव यादव ने बताया कि सीताकुंड फील्ड के मैदान में दो पक्षों के लड़के आपस में फुटबॉल खेलते हैं। खेलने के दौरान बच्चों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। बमबम बंडल के पुत्र एवं सदानंद के पुत्र के बीच झगड़ा हुआ। इसके बाद लखन लाल मंडल सहित दर्जनों लोगों ने हमारे मुहल्ला पर पथराव कर दिया। इस दौरान विजय यादव की पत्नी हेमलता देवी को हल्की चोटें आई है। सभी का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है।
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  • इन्होंने सबसे पहले दिया जवाब : आठ मई के अंक में प्रकाशित तस्वीर शाह जुबैर रोड की है। सही जवाब देने वालों में शामिल हैं.. सुमित महेश प्रसाद बेटवन बाजार, शैर्य वर्मा गुलजार पोख्ख्ख्खर, कृष्ण कुमार नीलम रोड, प्रेम सागर शादीपुर, नीरज यादव दो नंबर गुमटी, अनुप कुमार सिन्हा नीलम चौक, आकाश कुमार संदलपुर, प्रशांत कुमार संदलपुर, मु. अकीब नीलम रोड, राजकुमार शर्मा मकसुसपुर, अमित शर्मा, उत्सव आर्या दो नंबर गुमटी, मनीष कुमार वासुदेवपुर, आदित्य कुमार जानकीनगर, सुमित कुमार माधोपुर, आयुष शास्त्रीनगर, विवेक कुमार संदलपुर, गुलशन यादव, सुनीता गुप्ता गांधी चौक, शिवम कुमार दो नंबर गुमटी, श्वेता आनंद गांधी चौक
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  • जिला प्रशासन के निर्देश के बाद भी नहीं खुली धरहरा की दुकानें
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  • नजरी गांव के एक ही परिवार के सात सदस्यों का सैंपल लिया
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  • दिव्यांगों के बीच समाजसेवी सुबोध वर्मा ने बांटी खाद्य सामग्री
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  • सरकार द्वारा घोषित योजनाओं का लोगों को नहीं मिल रहा लाभ, बढ़ी परेशानी
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  • वीसी ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को लिखा पत्र
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  • मास्क व सैनिटाइजर का किया गया वितरण
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  • कोरोना महामारी बन रही आफत
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  • कोरोना संक्रमण को मात देकर फिर घर लौटे चार मरीज
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  • मौत पर भी लगा लॉकडाउन का पहरा
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  • शर्तों के साथ मिली राहत, शारीरिक दूरी का पालन अनिवार्य
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  • धरहरा प्रखंड में हो रही है राशन की कालाबाजारी
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  • शनिवार, जेष्ठ कृष्ण पक्ष द्वितीया, विक्रम संवत् 2077
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  • रेल हड़ताल से मजदूरों के हक को मिली थी एक नई दिशा : ईआरएमयू
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  • एडीएम ने क्वारंटाइन कैंप का किया निरीक्षण
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  • दारोगा को किया गया लाइन हाजिरसंस, लखीसराय:पुलिस की वर्दी पहनकर खुद को कानून से बड़ा समझने की भूल करना लखीसराय थाना में पदस्थापित एसआइ बालमुकुंद को महंगा पड़ा। ड्यूटी के दौरान हमेशा से विवादों में रहने वाले एसआइ की एक करतूत शुक्रवार को जब सत्ता के गलियारे में पहुंची तो अपना दामन बचाने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए वरीय अधिकारी ने लाइन हाजिर कर दिया। शुक्रवार को लखीसराय थाना के सामने चेक पोस्ट पर एसआइ बालमुकुंद ने बेकसूर वृद्ध बाप एवं उनके दो बेटे को बेरहमी से पीट दिया था। तीनों लोग एक कार से रामगढ़ चौक थाना क्षेत्र के शरमा गांव से पड़ोसी जिला पटना के पंडारक गांव जा रहे थे। एक सप्ताह पहले लखीसराय की सीडीपीओ पूजा रानी के साथ र्दुव्‍यवहार एवं उनके चालक के साथ मारपीट करने जैसी घटना के बाद भी दारोगा बालमुकुंद के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से उनका मनोबल बढ़ता चला गया। लेकिन शुक्रवार को उनकी गलती ने सत्ता के गलियारे तक कारगुजारी का संदेश पहुंचा दिया। अमन शर्मा नाम के जिस युवक के कार को पुलिस ने चालान काटने के लिए शान से थाने के अंदर खड़ी कराया था उसे तो उसी समय मुक्त कर दिया। अब कार्रवाई का इंतजार था। फिर एसपी सुशील कुमार ने कार्रवाई करते हुए दारोगा बालमुकुंद को लाइन हाजिर कर दिया। एसपी सुशील कुमार ने बताया कि अनुशासन और कानून सबके लिए बराबर है। एसआइ बालमुकुंद को लाइन हाजिर किया गया है।
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  • 159वीं जयंती पर याद किए गए रवीद्रनाथसंवाद सहयोगी, जमालपुर (मुंगेर) : विश्व कवि र¨वद्र नाथ टैगोर की 159 वीं जयंती बंगाली दुर्गा स्थान जमालपुर में बिहारी बंगाली समिति के तत्वावधान में मनाई गई। जयंती समारोह के दौरान शारीरिक दूरी का विशेष ख्याल रखा गया। जयंती समारोह को संबोधित करते हुए समिति के सचिव सह भाजपा कला सांस्कृतिक मंच के जिलाध्यक्ष प्रह्लाद घोष ने कहा विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी रचना के माध्यम से पूरी दुनिया को शांति सछ्वावना का संदेश दिया। यही कारण है कि आज भी पूरी दुनिया उनको नमन करती है। बंगला भाषा में लिखित उनकी रचनाएं एकला चलो काफी मशहूर है। जिसे आज भी हर जाति धर्म संप्रदाय के लोग बोलचाल की भाषा में गुनगुनाते हैं। ऐसे महान विश्व कवि की जयंती मनाना और उन्हें याद करना गौरव की बात है। इस अवसर पर संदीप भट्टाचार्य, दीपंकर चटर्जी, विवेक, तनु मुखर्जी, असीम कर्मकार, विशाल, राजा दत्ता, संतोष कुमार मंडल, विजय कुमार साह आदि मौजूद थे।
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  • आठ मई के नाम से आज भी सहम जाता है रेल महकमा
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  • संवाद सहयोगी, जमालपुर (मुंगेर) : भारतीय रेल में आठ मई के ही दिन हुए ऐतिहासिक हड़ताल की याद को ताजा करने के लिए ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन ओपन लाइन शाखा ने शुक्रवार को गेट मीटिंग किया। गेट मीटिंग को संबोधित करते हुए सचिव केडी यादव ने कहा कि 8 मई 1974 के ऐतिहासिक रेल हड़ताल से मजदूरों की एकता को नई पहचान मिली थी। मजदूरों को कई अधिकार मिले थे। रेल हड़ताल ने पूरी दुनिया के मजदूर आंदोलन को एक नई दिशा प्रदान की थी। आज भारतीय रेल में मेंस यूनियन के साथी भी उसी एकजुटता से मजदूर हित में कार्य कर रहे हैं और आगे भी करेंगे। सचिव ने कहा कि आज पूरे विश्व में कोरोना संक्रमण की वजह से तबाही मची हुई है। महामारी से हर रोज हजारों की संख्या में लोग कालकलवित हो रहे हैं। ऐसे समय में देश में सरकार गरीब मजदूरों के साथ विश्वासघात करने का काम कर रही है। वहीं, अमीर पूंजीपतियों के हितों की रक्षा कर रही है। उनको लाखों करोड़ों रुपये की टैक्स में छूट दे रहे हैं। केंद्रीय नेता सत्यजीत कुमार ने कहा कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारी अपने जीवन तथा परिवार के सदस्यों को जिंदगी की परवाह किए बगैर इस लड़ाई में सामने खड़े हैं। डॉक्टर, नर्स, सफाई कर्मी के साथ सेना, पुलिस एवं इनके साथ ही अति आवश्यक खाद्य पदार्थों की आपूíत के लिए रात-दिन एक कर रेल यातायात से देश के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य सामग्री पहुंचाने की दिशा में रेलकर्मी भी काम कर रहे हैं लेकिन सरकार इनके काम की सराहना किए बगैर इन केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की डीए, डीआर को ही बंद कर दिया है। अब 55 व 30 के सेवानिवृत्त के स्कीम कर्मचारियों के संकुचित जबरन केंद्रीय कोष के लिए रुपए काट लेना, बेवजह गैर सरकारी करण के नाम पर रेल कर्मचारियों को दबाने की कोशिश की जा रही है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे नीति के खिलाफ मेंस यूनियन सरकार के इस निर्णय के खिलाफ रणनीति के साथ जल्द ही विरोध में उतरेगी। गेट मीटिंग के अंत में यूनियन नेताओं ने ऐतिहासिक रेल हड़ताल जिंदाबाद, एआइआरएफ जिंदाबाद के नारे लगाए।
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  • राजद व कांग्रेस इरिमी के नाम पर जनता को कर रहे हैं दिग्भ्रमित
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  • महाजनों ने लॉकडाउन को ‘अवसर’ में बदला, कट रही चांदी
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  • अब नहीं चलेगी नगर निकायों की मनमानी
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  • मुजफ्फरपुर में सीएसपी संचालक से 4.15 लाख रुपये की लूट
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  • अगले हफ्ते और तेज होगी प्रवासी बिहारियों के लौटने की रफ्तार
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  • लॉकडाउन में तलाश ली खुशी, घर की छत पर उगा ली साग-सब्जी
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  • मुजफ्फरपुर में हाई शुगर से पीड़ित मासूम की मौत
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  • तीन लाख किसानों के खाते में सौ करोड़ रुपये ट्रांसफर
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  • दलीय सीमाएं टूटी, आरक्षण पर साथ आए 22 विधायक
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  • जदयू प्रखंड अध्यक्षों से सीएम ने क्वारंटाइन सेंटर के इंतजाम
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  • विदेश से आएंगे 2075 लोग गया में किए जाएंगे क्वारंटाइन
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  • बछिया के जन्म की प्रयोग स्थली बनेगा माधोपुर कृषि विज्ञान केंद्र
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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
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  • सतर्क रहना जरूरी राज्य में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और विकास कार्यो को बढ़ावा देने के साथ रोजगार सृजन के लिए लॉकडाउन के नियमों में आंशिक छूट देना समय की मांग है, लेकिन इस दौरान अत्यधिक सतर्कता भी जरूरी है। कुछ क्षेत्रों में थोड़ी छूट के बाद लोग जिस तरह बेतहाशा घरों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, उससे कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। इसलिए जहां भी लॉकडाउन में ढील दी जा रही है, वहां प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतते हुए कोताही करने वालों से सख्ती से पेश आना होगा। लोगों को भी चाहिए कि आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलें। साथ ही शारीरिक दूरी, मास्क और साफ-सफाई का ख्याल रखें। यदि सरकार के दिशा-निर्देशों का सही से पालन नहीं किया गया तो स्थिति बेकाबू हो सकती है। इससे बचने के लिए आम लोगों का सहयोग जरूरी है, लेकिन बहुत से लोग ऐसा नहीं करके कोरोना संक्रमण के खतरे को बढ़ा रहे हैं। समझना होगा कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए किसी भी तरह की अफवाह या फिर गलत धारणा से बचते हुए सतर्क रहना जरूरी है। यह उचित और सुरक्षित व्यवस्था है कि प्रदेश के बाहर से लौट रहे प्रवासी तुरंत अपने घर नहीं जाएंगे। इन लोगों को भी चाहिए कि वे स्वेच्छा से अपनी जांच कराने के लिए आगे आएं और चिकित्सकों की निगरानी में निर्धारित समय तक क्वारंटाइन सेंटर में रहें। सरकार उनकी देखरेख के प्रति सजग और तत्पर है। सभी जिला अस्पतालों में कोरोना वायरस के नमूना संग्रह की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। प्रयास किया जाना चाहिए कि बाहर से आए अधिक से अधिक लोगों के नमूने लिए जाएं, ताकि कहीं पर कोरोना का एक भी संदिग्ध मरीज छूटने न पाए। कई लोग दूसरे प्रदेशों से चोरी-छिपे यहां पहुंच रहे हैं। वैसे लोग पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। उनकी तलाश में पुलिस लगातार परेशान है, लेकिन वे स्वेच्छा से सामने नहीं आ रहे। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस उन लोगों से क्वारंटाइन सेंटर जाने और जांच कराने का आग्रह करती है, तो वे सुनने को तैयार नहीं हैं। यह प्रवृत्ति घातक होने के साथ समस्या को बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। ऐसा कतई नहीं किया जाना चाहिए।
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  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
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  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
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  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीगांवों में रोजगार के स्रोत खुलेदेशभर से बिहारी मजदूर अपने राज्य लौट रहे हैं। वे कह रहे हैं कि लॉकडाउन के कारण काम धंधा नहीं मिल रहा था। फैक्ट्री मालिक कोई राहत नहीं दे रहे थे। पैसे खत्म होने से मकान किराया व खाने का खर्च वहन करना मुश्किल हो रहा था। मकान किराया बाद में देने की बात वे नहीं मान रहे थे। वहां की सरकारें भी मदद नहीं कर रही थीं। ऐसी परिस्थिति में प्रवासी मजदूरों के घर लौटने के सिवा कोई चारा नहीं था। वे वोट बैंक हैं। इसलिए उनके वापसी को लेकर सभी पार्टियां शोर मचाने लगीं। लेकिन उनमें से किसी ने यह नहीं कहा कि अगर उनके शासनकाल में गांवों में संसाधनों के अनुरूप फैक्टियां लगाईं गई होतीं तो आज बिहारी मजदूरों को ऐसी विपत्ती की घड़ी में बाहर नहीं रहना पड़ता। अब भी इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। मिथिलेश कुमार, बलुआघाट, भागलपुर।खेल स्पर्धाएं निरस्त होना सहीकोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सभी के लिए शारीरिक दूरी बनाए रखना जरूरी है। बड़े खेलों में खिलाड़ियों व दर्शकों के लिए इसका पालन करना थोड़ा मुश्किल है। ऐसे में खेलों को अभी शुरू करना चुनौती भरा माना जा रहा है। यही वजह है कि ओलंपिक, आइपीएल जैसे खेल समारोह स्थगित कर दिया गए हैं। अधिकांश खेल प्रतियोगिताएं बंद हैं। बहुत सोच-विचार के बाद ही उसे शुरू किया जाएगा। इसके लिए खेल प्रेमियों को धैर्य रखना चाहिए। टी. मनु, कटिहार।मातृ दिवस पर करें मां का सम्मान10 मई को हमलोग मातृ दिवस मनाने जा रहे हैं। मां ने सदा हमारे दुख-सुख का ख्याल रखा। अपने स्नेह व अनुशासन से सींच कर अपने लाल को सैनिक, डॉक्टर, अभियंता, अधिवक्ता, आइएएस, शिक्षक आदि बनाए। हमें मातृ दिवस पर सभी माताओं का चरणस्पर्श कर उनका सम्मान करना चाहिए। सत्यनारायण,खरीक पूर्वी घारारी, भागलपुर।
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  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
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  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
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  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
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  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
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  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है
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  • जियो प्लेटाफॉर्म्स में 11,367 करोड़ रुपये का एक और बड़ा निवेश
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  • चीन में स्थित अमेरिकी कंपनियों को लुभाने में जुट गया है भारत
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  • नई दिल्ली, एएनआइ : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सíवसेज सेंटर में दो अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर रुपया-डॉलर में वायदा कारोबार को हरी झंडी दिखाई। ये दोनों एक्सचेंज बीएसई इंडिया आइएनएक्स व एनएसई-आइएफएससी हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पिछले एक दशक के दौरान भारत से संबंधित वित्तीय सेवा कारोबार का एक बड़ा विदेशी बाजारों में चला गया है। इन दोनों एक्सचेंजों पर यह शुरुआत उन्हीं कारोबारों को भारत वापस लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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  • सेंसेक्स इंट्रा-डे में 645.13 अंक चढ़ने के बाद बढ़त बरकरार नहीं रख पाया, सबसे ज्यादा 4.81 प्रतिशत की बढ़त एचयूएल के शेयरों में दर्ज
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  • पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
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  • पुराना स्टॉक निकालने के लिए ऑफर की भरमार
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  • इकोनॉमी की रिकवरी तय: निर्मला सीतारमण
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  • शेयर बाजारों को मिला रिलायंस का दम, लौटी तेजी
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  • डेयरी किसानों के लिए पैकेज पर हो रहा विचार
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  • गिफ्ट सिटी में रुपया-डॉलर का वायदा कारोबार शुरू
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  • चीन पर हर्जाने का दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
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  • प्रसार को रोकने के लिए एसिम्प्टोमैटिक लोगों की होगी जांच
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  • पंजाब में खेतों में जा गिरा मिग-29, पायलट सुरक्षित
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  • कोविड-19 से मुकाबले के लिए दो दवाओं के ट्रायल को मंजूरी
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  • कोरोना को लेकर सर्वे कर रही टीम का रजिस्टर फाड़ा
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  • कोरोना तेरा नाश हो ! तू पंकज को ले गया
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  • कफ्यरू बढ़ाने पर कोटा में भड़के लोग, प्रदर्शन कर थाना को घेरा
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  • वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का निधन
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