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More from Front Page

  • दैनिक जागरण फिर बना देश का नं. 1 अखबार
  • ट्रेन से कटकर 16 मजदूरों की मौत
  • प्रवासी श्रमिकों को गौ आश्रय स्थलों से जोड़ें
  • रिकवरी रेट और बढ़ा, सरकार ने कहा-कोरोना के साथ जीना होगा
  • लॉकडाउन का पालन कराने गई पुलिस पर हमला
  • कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान, चीन सीमा तक सड़क तैयार
  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से, जल्द आएगा शेड्यूल
  • 31 अगस्त तक आए ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
  • वेबसाइट पर पढ़े
  • शराब की ऑनलाइन बिक्री पर विचार करे सरकार
  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लडबैंकहिसार : दिल्ली से सटा होलंबी कलां गांव एम्स को बीते 18 सालों से रक्तदान कर रहा है। जब भी आवश्यकता होती है एक अपील पर जुट जाते हैं गांव वाले। कोरोना के दौर में तीन बार कर चुके हैं रक्तदान। ’पेज 10

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  • दो क्षेत्र हॉट स्पॉट से बाहर, बाकी पर ड्रोन से नजर
  • घरों में अदा की जुमा की नमाज, महामारी के सर्वनाश को दुआ
  • हॉट स्पॉट से मुक्त हुआ भैंसानी, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
  • गेहूं खरीद में आई थोड़ी कमी
  • ईद के लिए रखे पैसों से भूखों को खिलाएं खाना
  • कोरोना योद्धा एंबुलेंस कर्मचारियों की सराहना

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  • ..लॉकडाउन बना प्रदूषण से बेदम हुई हवा की दवा
  • चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती युवक की मौत
  • हम नहीं डरते किसी से..
  • आज अपनों के बीच पहुंच जाएंगे 38 लोग
  • 67 रिपोर्ट निगेटिव, नए हॉट स्पॉट में सर्वे हुआ पूरा
  • पीएम का आपत्तिजनक फोटो वायरल करने पर दो गिरफ्तार
  • मारपीट से अधेड़ की मौत, काटा हंगामा
  • लॉकडाउन में व्यापारियों को मिले कुछ राहत
  • हाई रिस्क में तैनात सुरक्षा प्रहरियों की भी सैंपलिंग, 23 रिपोर्ट निगेटिव
  • जान हथेली पर लेकर प्रवासी घर जाने को तैयार

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  • ऑनलाइन शिक्षा में दिखायी दिलचस्पी
  • उत्पीड़न पर कोतवाल से मिले व्यापारी
  • पहले सही जवाब देने वालों के नाम
  • बिना अनुमति दुकान खोलने पर कई पकड़े
  • सूखी लकड़ी एकत्र करने के विवाद में दो पक्षों में चार जख्मी
  • एसपी ने पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित किया
  • कहीं भी नहीं हो रहा शारीरिक दूरी का पालन
  • विश्व रेडक्रॉस दिवस पर किया गया रक्तदान
  • स्मार्ट फोन का अधिक प्रयोग लगवा ना दे चश्मा
  • 83 वाहनों के काटे चालान, दुकानदारों को चेताया
  • मुठभेड़ में गैंगस्टर समेत दो गो तस्कर गिरफ्तार
  • गोकशी करते दो गिरफ्तार, दो फरार

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  • प्रेमी युगल ने जान दी
  • शहीदों पर टिप्पणी करने वाली छात्र पर मुकदमा
  • नए सत्र में छह जुलाई से शुरू होगी पढ़ाई
  • किसान को पीटा, थूका और भाग गए, तनाव
  • पुलिस ने रोका, ईपीई पर जाम लगा कामगारों ने किया हंगामा
  • मौलाना साद के ससुर स्वस्थ होकर घर पहुंचे
  • नहीं मिला उपचार जच्चा-बच्चा की मौत

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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
  • धैर्य खो रहा विपक्षमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष राम गो¨वद चौधरी को पत्र लिखकर सही नसीहत दी है कि यदि वह कोरोना नियंत्रण मुहिम में जुटे तंत्र का मनोबल नहीं बढ़ा सकते तो कम से कम निर्थक आरोप लगाकर मनोबल गिराना तो नहीं चाहिए। आसार कम ही हैं कि चौधरी और अन्य विपक्षी नेता इस नसीहत का ध्यान रखेंगे, पर विपक्ष को याद रखना चाहिए कि कोरोना संकट वैश्विक आपदा है। इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, पर जहां तक इस आपदा से निपटने का सवाल है, योगी आदित्यनाथ के विजन, प्रबंधन और क्रियान्वयन की सराहना पूरी दुनिया में की जा रही है। उत्तर प्रदेश का भौगालिक और जनसांख्यिक विस्तार अधिकतर देशों से अधिक है। इतने बड़े भूभाग और जनसंख्या को कोरोना संकट से यथासंभव महफूज रखने का प्रबंधन आसान नहीं है। योगी सरकार ने बहुत व्यवस्थित तरीके से इसे करके दिखाया। मुख्यमंत्री की शायद यही उपलब्धि विपक्ष को बेचैन कर रही है। विपक्षी दल जिस तरह कभी श्रमिकों, तो कभी कोई अन्य सवाल उठाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं, उसे आम आदमी भी पसंद नहीं कर रहा होगा। वजह है कि केारोनाकाल में सरकार ने न सिर्फ अन्य राज्यों में फंसे छात्रों और श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई बल्कि लाखों परिवारों को खाना, राशन और पैसा भी पहुंचाया। बेशक इतने बड़े अभियान में कुछ गड़बड़ियां रह गई होंगी, कुछ लोग सहायता पाने से वंचित रह गए होंगे, पर ऐसी छोटी बातों को तूल देकर सरकार की पूरी कवायद को खारिज कर देना उचित नहीं है। कोरोना राजनीति नहीं बल्कि योगदान करने का विषय है। विपक्षी दलों को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए कि जिस अभियान में सरकार के अलावा छोटे-बड़े उद्यमी, व्यवसायी, दुकानदार, गरीब किसान, मजदूर, बच्चे, शिक्षक, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी और अन्य सामाजिक वर्गो के लोग अपनी स्थिति के हिसाब से योगदान कर रहे हैं, उसमें उन्होंने क्या योगदान किया? कोरोना संकट से घिरे लोगों से यह बात छिपी नहीं है कि कौन उनकी मदद कर रहा और कौन राजनीति। मौका मिलने पर लोग जवाब भी देंगे।
  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीदम तोड़ता आरटीआइदेश में सूचना का अधिकार कानून लागू हुए एक दशक बीत चुका है। आम जनता की भागीदारी और जागरूकता ने इस कानून की सफलता के स्तर को लगातार ऊपर उठाने का काम किया है। इस कानून को लाने का मकसद शासन और प्रशासन में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ उनकी जवाबदेही तय करना था। आम आदमी भी सूचना का अधिकार कानून का इस्तेमाल करके सरकारी मशीनरी में व्याप्त भ्रष्टाचार को कम करने और लोगों के प्रति उसकी जवाबदेही तय करने में काफी हद तक सफल रहा हैं। इस कानून की सफलता की एक बड़ी वजह केंद्रीय और राज्य सूचना आयुक्तों को दी गई स्वायत्तता थी, लेकिन आरटीआइ संशोधन बिल के जरिए केंद्रीय और राज्य सूचना आयुक्तों के कार्यकाल व वेतन भत्तों के निर्धारण की शक्ति केंद्र सरकार को सौंप दी गई है। राजीव कुमार, रमालाठेके खोलना अविवेकपूर्ण निर्णयएक ओर जहां कोरोना वायरस के खौफ से जरूरी सामानों के अलावा सब कुछ बंद पड़ा है वहीं पर शराब की दुकानों को खोलने का सरकार के निर्णय को अविवेकपूर्ण ही कहा जाएगा। इस कोरोना काल में एक ओर सरकार लोगों को शारीरिक क्षमता को बढ़ाने पर बल दे रही है वहीं शराब की दुकानें खोल कर लोगों को कमजोर कर रही हैं। डाक्टरों की माने तो शराब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम करती है। जिससे कोरोना वायरस का खतरा बढ़ सकता है। इस समय में जब मंदिर, मस्जिद समेत सभी औद्योगिक इकाइयां तक बंद है ऐसे में शराब की दुकान खोलने के सरकारी फैसले को किसी भी दशा में सही नहीं बताया जा सकता है। इतना ही नहीं जिस तरह से शराब की दुकान खुलने के बाद शारीरिक दूरी की अनदेखी की गई है वह तो किसी भी दशा में सही नहीं ठहराया जा सकता है। पुष्पांकर पाल, जानसठसावधानी, कोरोना से बचाव का उपाय कोरोना वायरस के मामले में देश में तेजी से बढ़ रहे हैं। जान गंवाने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बिजनौर में भी तेजी से मरीजों की बढ़ोतरी हो रही है। यह संकट कब तक है? यह कहना बड़ा मुश्किल है, इसलिए एक लंबी लड़ाई लड़नी है। इसके लिए सावधानी ही एक बड़ा उपाय है। विशाल जनसंख्या वाले देश में कोरोना तेजी से फैल गया तो इससे निपट पाना काफी मुश्किल भरा होगा। अभी से सभी लोगों को बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। शारीरिक दूरी का पालन करना चाहिए। चूंकि सब्जी मंडियों और शराब की दुकानों पर लॉक डाउन का उल्लंघन हो रहा है। ओमकार सिंह, बिजनौर
  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है

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  • वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का निधन
  • भाजपा को गरीबों की नहीं पूंजीपतियों के हितों की है चिंता: अखिलेश
  • एप से प्रवासी कामगारों को मिलेगा योजनाओं का लाभ व रोजगार
  • 69000 शिक्षक भर्ती की उत्तरकुंजी जारी, रिजल्ट में टालमटोल
  • मठ-मंदिर खोलने की अखाड़ा परिषद ने उठाई आवाज
  • सूबे की एमएसएमई इकाइयों को तकनीकी सहयोग देगा डेनमार्क
  • कोरोना मुक्ति की उम्मीद जगा रहा साल का पहला सूर्य ग्रहण
  • छह जुलाई से शुरू होगा विवि व कॉलेजों में नया सत्र
  • ग्रीन जोन मे जांची जाएंगी स्नातक की कॉपियां, बढ़ेंगे केंद्र

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  • बीएसएफ के 30 और कर्मी कोरोना संक्रमित
  • राहत पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
  • महाराष्ट्र में तीसरे दिन एक हजार से ज्यादा नए केस
  • तीस मुस्लिम परिवारों ने की हंिदूू धर्म में वापसी
  • टेस्टिंग पर जोर, पर किट पर खामोशी
  • चीन पर हर्जाने का दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

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  • मेरठ, 9 092ए0908 2020
  • सामुदायिक प्रसार को रोकने को एसिम्प्टोमैटिक लोगों की होगी जांच
  • टूटा था गेस्ट हाउस का दरवाजा, रातों में जागकर देते रहे हम पहरा
  • घाटी में तीसरे दिन भी तनाव बरकरार, पथराव में डीएसपी घायल
  • वायुसेना, नौसेना व कोस्ट गार्ड के 37 हवाई अड्डों का होगा आधुनिकीकरण
  • द. कोरिया में शुरू हुई फुटबॉल लीग
  • पैकेज में हुई देरी तो बेरोजगारी की आएगी सुनामी : राहुल
  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लड बैंक
  • एनजीटी ने एलजी पॉलीमर्स पर ठोका 50 करोड़ जुर्माना
  • हरिद्वार में गंगा में अस्थि विसर्जन की सशर्त अनुमति
  • उप्र और मप्र में कामगारों का हंगामा
  • पंजाब में खेतों में जा गिरा मिग-29, पायलट सुरक्षित

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  • स्वच्छता की आदतों से आधा हो सकता है संक्रमण का खतरा
  • अमेरिका में भारतवंशी डॉक्टर पिता-पुत्री की कोरोना से मौत
  • संक्रमण के तीसरे दिन सूंघने की शक्ति खो सकता है कोरोना रोगी
  • 31 अगस्त तक आए ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
  • कोरोना से फैल रही नफरत पर यूएन ने जताई चिंता
  • चीन से कोई बड़ी गलती हुई या फिर वह अक्षम है: ट्रंप
  • स्पेन में समुद्र तटों पर जाने की इजाजत
  • वैदिक मंत्रों से गूंजा व्हाइट हाउस
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