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More from Front Page

  • प्रवासी श्रमिकों को गौ आश्रय स्थलों से जोड़ें
  • रिकवरी रेट और बढ़ा, सरकार ने कहा-कोरोना के साथ जीना होगा
  • तीस मुस्लिम परिवारों ने की हंिदूू धर्म में वापसी
  • शराब की ऑनलाइन बिक्री पर विचार करे सरकार
  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से, जल्द आएगा शेड्यूल
  • कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान, चीन सीमा तक सड़क तैयार
  • 69000 शिक्षक भर्ती की उत्तरकुंजी जारी
  • वेबसाइट पर पढ़े
  • ट्रैक पर सोए 16 मजदूर ट्रेन से कटे
  • मप्र के प्रवासी श्रमिकों के साथ महाराष्ट्र के औरंगाबाद में दर्दनाक हादसा
  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लडबैंकहिसार : दिल्ली से सटा होलंबी कलां गांव एम्स को बीते 18 सालों से रक्तदान कर रहा है। जब भी आवश्यकता होती है एक अपील पर जुट जाते हैं गांव वाले। कोरोना के दौर में तीन बार कर चुके हैं रक्तदान। ’पेज 12

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  • आइएमए ने टेलीमेडिसिन के तहत चिकित्सकों के जारी किए नंबर
  • विवि कर्मचारी भी रिस्क में, 200 लोगों तक पहुंचेगा विभागसीएमओ डा. राजकुमार ने बताया कि साकेत निवासी 45 साल के मरीज की कैलाशी अस्पताल में मौत हुई, जहां आइसीयू 48 घंटे के लिए सील किया गया है। इस मरीज के दाह संस्कार के बाद रिपोर्ट पाजिटिव आई है, ऐसे में परिजनों के अलावा सौ से ज्यादा लोगों की सूची बनाई गई है। बताया गया है कि विवि का एक कर्मचारी भी मरीज के संपर्क में रहा है, जिसकी जांच विभाग करेगा। उसे हाई रिस्क जोन में माना गया है। उधर, साकेत में बड़ी संख्या में लोगों को होम क्वारंटाइन किया जा सकता है। अन्य मरीजों के संपर्क में करीब डेढ़ सौ लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। देर रात विभाग मरीजों को मेडिकल कालेज समेत अन्य केंद्रों में भर्ती करने में जुटा रहा। निजी अस्पतालों को पीपीइ किट देगा जिला उद्वोग केंद्र: शासन ने जिला प्रशासन एवं सीएमओ को पत्र भेजकर निजी अस्पतालों में नान कोविड मरीजों के इलाज मे तेजी लाने के लिए कदम उठाने को कहा है। इसके लिए आयुष्मान पैनल के अस्पतालों को वरीयता दी जाएगी। प्रशासन द्वारा पैनल में शामिल अस्पतालों को पीपीई किट, मास्क एवं ग्लब्स उपलब्ध कराने का काम जिला उद्वोग केंद्र करेगा।
  • 13 नए मरीजों के साथ कोरोना का आंकड़ा जा पहुंचा 209 तक
  • कोरोना बेकाबू, मरीजों का पहला सैकड़ा 33 दिन, दूसरा मात्र 8 दिन में
  • साकेत, सरधना और खिवाई नए हॉटस्पॉट
  • भाजपा नेता के सहायक समेत दो की मौत..पसरा मातम

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  • मंडी और बाजार सभी खुलेंगे लेकिन चरणबद्धजागरण संवाददाता, मेरठ : शुक्रवार को कमिश्नर अनीता सी मेश्रम ने डीएम अनिल ढीगरा और एडीएम सिटी अजय तिवारी के साथ शहर में सब्जी मंडी के संचालन और प्रमुख बाजारों की व्यवस्था को लेकर मंथन किया और कार्ययोजना तैयार की। कमिश्नर ने बताया कि शनिवार से जाग्रति विहार एक्सटेंशन में अस्थाई सब्जी मंडी को शुरू करा दिया जाएगा। वहां 35 आढ़तियों को स्थान आवंटित कर दिया गया है। इसके बाद रामलीला ग्राउंड में फल मंडी शुरू कराई जाएगी। नवीन मंडी में क्या व्यवस्था होगी, इस पर भी निर्णय लिया गया। तीनों स्थानों पर आने वाले लोगों के लिए अलग अलग रंग के पास जारी किए जाएंगे। जो कि भी होगा सख्त नियमों और व्यवस्था के बीच होगा। किसी भी लापरवाही को कोई स्थान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि शहर की अर्थव्यवस्था और आवश्यक वस्तुओं से जुड़े सदर बाजार, खैर नगर, कोटला समेत प्रमुख बाजारों को खुलवाया जाएगा। हफ्ते में व्यवस्था बन जाएगी।-जासं22 आढ़तियों ने भरे फार्ममंडी समिति ने जागृति विहार एक्सटेंशन में शिफ्ट होने वाले सब्जी और फल आढ़तियों को फार्म भरने के लिए कहा था। शुक्रवार को केवल 22 आढ़तियों ने फार्म भरे थे। अधिकांश आढ़ती जाने को तैयार नहीं हैं। रवींद्र , सुशील , इकराम आदि आढ़तियों कहना है कि मौके पर कोई शेड नहीं है। उन्हें अपने इलेक्ट्रानिक तराजू, खाताबही, दस्तावेज रखने के लिए अलमारी आदि ले जानी पड़ेगी। बारिश हो गई तो कैसे काम होगा। बारिश होने पर पूरा सामान ही भीग जाएगा। बता दें कि अभी मैदान में ही मंडी शिफ्ट की जा रही है। फल मंडी के आढ़ती भी जागृति विहार एक्सटेंशन जाने को तैयार नहीं है। फल मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष हाजी इरशाद ने बताया कि व्यापारियों के पास कैश भी रहता है। खुले मैदान में कोई सुरक्षा की व्यवस्था भी नहीं होगी। ऐसे में काम मुश्किल है।
  • क्वारंटाइन से लौटे पुलिसकर्मियों पर बरसाए फूल
  • अधूरी तैयारी में कैसे शिफ्ट होगी जागृति विहार में मंडी
  • 10 और 11 को बूंदाबांदी की संभावना
  • पुलिस ने की 175 जमातियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार
  • जागरण संवाददाता, मेरठ : शुक्रवार को भी सड़कों पर पहले जैसा नजारा देखने को मिला है। पुलिस ने बेवजह घूमने वाले लोगों पर लाठी फटकारी और लाउडस्पीकर से जागरूक भी किया। कोरोना संक्रमण के विस्फोट के बाद एसएसपी अजय साहनी ने नया प्लान जारी किया था, जिसमें खाना बांटने का नाटक करने वालों के पास निरस्त कर दिए गए थे। साथ ही नुक्कड़ पर खुलने वाली चाय की दुकानों पर भी रोक लगा दी थी। शुक्रवार को हालातों में कुछ सुधार जरूर हुआ है, जो नाकाफी रहा। पुलिस लाइन के गेट नंबर पर चार के सामने ही शर्मा नगर में चाय की दुकान बदस्तूर खुली रही, जिस पर हर समय लोगों की भारी भीड़ जमा रहती है, उस पर सबसे ज्यादा पुलिसकर्मी ही मौजूद रहते हैं, इस चाय की दुकान से भी कोरोना संक्रमण की चेन सामने आ सकती है। हालांकि कुछ थाना क्षेत्रों में खाना वितरण का नाटक करने वाले लोगों के विरुद्ध मुकदमे जरूर दर्ज किए हैं। गुरुवार और शुक्रवार को दर्ज हुए मुकदमों की संख्या 500 का आंकड़ा पार कर चुकी है। सूरतेहाल यह भी है कि कारोना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है।
  • बैंक बंद कराकर स्टाफ को एंबुलेंस में डाला
  • सड़क पर उतरे कप्तान, 179 पर मुकदमा दर्ज
  • बंद दुकान से यूं बिक रहा सामान ’ जागरण
  • बेगमपुल पर लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों की खबर लेती पुलिस ’ जागरण
  • पुराने सीओ कार्यालय के पास लोगों को रोकते पुलिसकर्मी ’ जागरण
  • सरकार एक्शन मोड में
  • पास निरस्त, फिर भी सड़कों पर बेवजह घूमते रहे लोग
  • लॉकडाउन उल्लंघन के मुकदमे दर्ज
  • वाहनों को सीज कर दिया गया
  • वाहनों का चालान किया गया
  • यह है कार्रवाई

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  • छह बसों में आए 15 कामगार और छात्र
  • दौराला-मसूरी मार्ग के नवीनीकरण को मंजूरी
  • नामित अधिकारी ने की तैयारियों की समीक्षा
  • फेरी वाले पर चाकू से हमला

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  • अंग्रेजों में सबसे पहले कर्नल फिनिश को गोली मारी
  • बिन परीक्षा अगली कक्षा
  • यहां भी औरंगाबाद जैसे हादसे का इंतजार
  • बिना टेंडर डीजल सप्लाई की जांच करेंगी कमिश्नर
  • हेडकांस्टेबल और सिपाही की हालत बिगड़ी जागरण संवाददाता, मेरठ : शुक्रवार को हेड कांस्टेबल और सिपाही की तबीयत बिगड़ने पर जसवंत राय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर एडीजी प्रशांत कुमार और एसएसपी अजय साहनी दोनों को देखने पहुंच गए। डाक्टरों से बातचीत करने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को सही उपचार दिलाने के लिए कहा गया। हेडकांस्टेबल राजेश भारती और एसटीएफ में तैनात सिपाही विकास की तबीयत खराब हो गई थी।
  • शारीरिक दूरी का उड़ रहा मखौल
  • बैंककर्मी ने कोरोना से संक्रमित माता पिता के लिए मदद मांगीमेरठ: सूरजकुंड सिंडिकेट बैंक की ब्रांच में कार्यरत एक महिला असिस्टेंट मैनेजर के पिता और माता को कुछ दिन पहले कोरोना पाजिटिव मिले थे। अपनी छोटी बहन के साथ होम क्वारंटाइन महिला बैंककर्मी से सिंडिकेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है। यह शुक्रवार को देर रात वायरल हुआ। जिसमें बैंककर्मी ने अपनी व्यथा बयां की है। मेडिकल कॉलेज में कोविड वार्ड में भर्ती अपने माता पिता को हो रही परेशानी का पत्र में जिक्र किया गया है। महिला के पिता 30 अप्रैल के टेस्ट में पाजिटिव पाए गए थे। -जासं
  • तमंचा लोड करते हुए चली गोली, ढाई साल के मासूम को लगी
  • ई-मेल करें-ङ्घँ्रीऋ1ीस्र13ी1े13.Aं¬1ंल्ल.ङ्घे
  • ईद के लिए रखे पैसों से भूखों को खिलाएं खाना

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  • एक मिनट में सौ से ज्यादा ज¨ग्लग कर रहे फुटबॉलर्स
  • जरूरतमंदों को भोजन व राशन पहुंचा रहे मददगार
  • 75 हजार श्रमिकों को मिलेंगे 7.50 करोड़
  • केवी का समर ब्रेक 11 मई से, सहोदय भी जल्द लेगा निर्णय
  • हनुमानपुरी में योद्वाओं को सम्मानित करते सारथी सोसायटी के पदाधिकार’ जागरण
  • अपने घरों को स्वयं कर रहे हैं सैनिटाइजमेरठ : सूरजकुंड स्पोर्टस कालोनी रेजीडेंट्स एसोसिएशन के तत्वावधान में शुक्रवार को मशीन द्वारा घरों को सैनिटाइज किया गया। कालोनी निवासी आयुष पुरी ने बताया कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए कालोनीवासियों ने मिलकर यह कदम उठाया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर लोगों को जागरूक करने के साथ ही मास्क भी वितरित किए जा रहे हैं।
  • लॉकडाउन में शास्त्रीय संगीत से दूर होगा तनाव
  • पल्लवपुरम में कराया सैनिटाइजेशन
  • सोसायटी में कोरोना योद्धा किए गए सम्मानित
  • वेबिनार में अमेरिकी प्रोफेसर ने दीं कई महत्वपूर्ण जानकारी
  • लैपटॉप हो तो वाट्सएप वेब पर कराएं पढ़ाई
  • आरएलडी ने दी 51 हजार की मदद
  • सीसीएसयू में स्नातक में मोबाइल से रजिस्ट्रेशन
  • फाइनलिस्ट में एक-एक मिनट का होगा नॉकआउट राउंडखिलाड़ियों द्वारा भेजे जा रहे ज¨ग्लग वीडियों में से 10 बेहतरीन प्रदर्शन वालों को फाइनल राउंड के लिए चयनित किया जाएगा। इन 10 खिलाड़ियों के बीच नॉकआउट राउंड चलेगा। निर्णायक मंडल के समक्ष सभी 10 खिलाड़यिों को एक-एक मिनट का समय मिलेगा। एक मिनट में सर्वाधिक ज¨ग्लग करने वाले टॉप दो खिलाड़ियों को विजेता चुना जाएगा। शनिवार नौ मई तक आयोजन समिति को खिलाड़ी अपना वीडियो भेज सकते हैं। 10 मई को फाइनल होगा।

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  • आइआइए ने प्रधानमंत्री को भेजा उम्मीदों का प्रस्ताव
  • खुशखबरी.. मेरठ तिराहे पर रैपिड रेल के गाजियाबाद स्टेशन का निर्माण शुरू
  • संचालन की अनुमति के बाद भी शर्तो का जाल, फंसे उद्योग
  • लोनिवि ने तैयार किए 5.67 करोड़ के प्रस्ताव
  • इनोवेशन के हीरो
  • पहले दस सही जवाब देने वाले :
  • दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर निर्माण तेज

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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
  • धैर्य खो रहा विपक्षमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष राम गो¨वद चौधरी को पत्र लिखकर सही नसीहत दी है कि यदि वह कोरोना नियंत्रण मुहिम में जुटे तंत्र का मनोबल नहीं बढ़ा सकते तो कम से कम निर्थक आरोप लगाकर मनोबल गिराना तो नहीं चाहिए। आसार कम ही हैं कि चौधरी और अन्य विपक्षी नेता इस नसीहत का ध्यान रखेंगे, पर विपक्ष को याद रखना चाहिए कि कोरोना संकट वैश्विक आपदा है। इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, पर जहां तक इस आपदा से निपटने का सवाल है, योगी आदित्यनाथ के विजन, प्रबंधन और क्रियान्वयन की सराहना पूरी दुनिया में की जा रही है। उत्तर प्रदेश का भौगालिक और जनसांख्यिक विस्तार अधिकतर देशों से अधिक है। इतने बड़े भूभाग और जनसंख्या को कोरोना संकट से यथासंभव महफूज रखने का प्रबंधन आसान नहीं है। योगी सरकार ने बहुत व्यवस्थित तरीके से इसे करके दिखाया। मुख्यमंत्री की शायद यही उपलब्धि विपक्ष को बेचैन कर रही है। विपक्षी दल जिस तरह कभी श्रमिकों, तो कभी कोई अन्य सवाल उठाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं, उसे आम आदमी भी पसंद नहीं कर रहा होगा। वजह है कि केारोनाकाल में सरकार ने न सिर्फ अन्य राज्यों में फंसे छात्रों और श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई बल्कि लाखों परिवारों को खाना, राशन और पैसा भी पहुंचाया। बेशक इतने बड़े अभियान में कुछ गड़बड़ियां रह गई होंगी, कुछ लोग सहायता पाने से वंचित रह गए होंगे, पर ऐसी छोटी बातों को तूल देकर सरकार की पूरी कवायद को खारिज कर देना उचित नहीं है। कोरोना राजनीति नहीं बल्कि योगदान करने का विषय है। विपक्षी दलों को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए कि जिस अभियान में सरकार के अलावा छोटे-बड़े उद्यमी, व्यवसायी, दुकानदार, गरीब किसान, मजदूर, बच्चे, शिक्षक, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी और अन्य सामाजिक वर्गो के लोग अपनी स्थिति के हिसाब से योगदान कर रहे हैं, उसमें उन्होंने क्या योगदान किया? कोरोना संकट से घिरे लोगों से यह बात छिपी नहीं है कि कौन उनकी मदद कर रहा और कौन राजनीति। मौका मिलने पर लोग जवाब भी देंगे।
  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीदम तोड़ता आरटीआइदेश में सूचना का अधिकार कानून लागू हुए एक दशक बीत चुका है। आम जनता की भागीदारी और जागरूकता ने इस कानून की सफलता के स्तर को लगातार ऊपर उठाने का काम किया है। इस कानून को लाने का मकसद शासन और प्रशासन में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ उनकी जवाबदेही तय करना था। आम आदमी भी सूचना का अधिकार कानून का इस्तेमाल करके सरकारी मशीनरी में व्याप्त भ्रष्टाचार को कम करने और लोगों के प्रति उसकी जवाबदेही तय करने में काफी हद तक सफल रहा हैं। इस कानून की सफलता की एक बड़ी वजह केंद्रीय और राज्य सूचना आयुक्तों को दी गई स्वायत्तता थी, लेकिन आरटीआइ संशोधन बिल के जरिए केंद्रीय और राज्य सूचना आयुक्तों के कार्यकाल व वेतन भत्तों के निर्धारण की शक्ति केंद्र सरकार को सौंप दी गई है। राजीव कुमार, रमालाठेके खोलना अविवेकपूर्ण निर्णयएक ओर जहां कोरोना वायरस के खौफ से जरूरी सामानों के अलावा सब कुछ बंद पड़ा है वहीं पर शराब की दुकानों को खोलने का सरकार के निर्णय को अविवेकपूर्ण ही कहा जाएगा। इस कोरोना काल में एक ओर सरकार लोगों को शारीरिक क्षमता को बढ़ाने पर बल दे रही है वहीं शराब की दुकानें खोल कर लोगों को कमजोर कर रही हैं। डाक्टरों की माने तो शराब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम करती है। जिससे कोरोना वायरस का खतरा बढ़ सकता है। इस समय में जब मंदिर, मस्जिद समेत सभी औद्योगिक इकाइयां तक बंद है ऐसे में शराब की दुकान खोलने के सरकारी फैसले को किसी भी दशा में सही नहीं बताया जा सकता है। इतना ही नहीं जिस तरह से शराब की दुकान खुलने के बाद शारीरिक दूरी की अनदेखी की गई है वह तो किसी भी दशा में सही नहीं ठहराया जा सकता है। पुष्पांकर पाल, जानसठसावधानी, कोरोना से बचाव का उपाय कोरोना वायरस के मामले में देश में तेजी से बढ़ रहे हैं। जान गंवाने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बिजनौर में भी तेजी से मरीजों की बढ़ोतरी हो रही है। यह संकट कब तक है? यह कहना बड़ा मुश्किल है, इसलिए एक लंबी लड़ाई लड़नी है। इसके लिए सावधानी ही एक बड़ा उपाय है। विशाल जनसंख्या वाले देश में कोरोना तेजी से फैल गया तो इससे निपट पाना काफी मुश्किल भरा होगा। अभी से सभी लोगों को बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। शारीरिक दूरी का पालन करना चाहिए। चूंकि सब्जी मंडियों और शराब की दुकानों पर लॉक डाउन का उल्लंघन हो रहा है। ओमकार सिंह, बिजनौर
  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है

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  • वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का निधन
  • एप से प्रवासी कामगारों को मिलेगा योजनाओं का लाभ और रोजगार
  • मथुरा में तीन साल के बालक का दिनदहाड़े अपहरण
  • मठ-मंदिर खोलने की अखाड़ा परिषद ने उठाई आवाज
  • बीटीसी अभ्यर्थियों ने दाखिल की कैविएट
  • सहायक आयुक्त उद्योग सर्वेश कुमार दीक्षित सेवा से बर्खास्त
  • श्रम कानूनों से राहत बढ़ाएगी कारोबार व रोजगार
  • बिना तैयारी लॉकडाउन से बिगड़े हालात
  • कारखानों में रोज 12 घंटे से ज्यादा काम नहीं करेंगे कामगार
  • सूबे की एमएसएमई इकाइयों को तकनीकी सहयोग देगा डेनमार्क
  • 69000 शिक्षक भर्ती की उत्तरकुंजी जारी, रिजल्ट में टालमटोल

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  • लॉकडाउन का पालन कराने गई पुलिस पर देवबंद में हमला, पथराव
  • किसान को पीटा, थूका और भाग गए, तनाव
  • पिता के साथ दवा लेने जा रही युवती गंगनहर में कूदी
  • पीएम का आपत्तिजनक फोटो वायरल, दो गिरफ्तार
  • शहीदों पर टिप्पणी करने वाली छात्र पर मुकदमा
  • यमुना में डूबने से युवक की मौत
  • प्रेमी युगल ने जान दी
  • ईपीई पर जाम लगा कामगारों ने किया हंगामा
  • जियो प्लेटफॉर्म्स में एक और बड़ा निवेश
  • शेयर बाजारों को रिलायंस का दम
  • देश बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा
  • लॉकडाउन में दिखा दी कोयले की ढुलाई, जीएसटी टीम का छापा
  • जापान ने मांगी कंपनियों के संचालन में मदद
  • पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
  • नहीं मिल सका उपचार जच्चा-बच्चा की मौत

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  • हरिद्वार में गंगा में अस्थि विसर्जन की सशर्त अनुमति
  • विशेष ट्रेन से लाए जाएंगे श्रमिकों के शव
  • दिल्ली में कोरोना के 338 नए मामले, दो मरीजों की मौत
  • महाराष्ट्र में तीसरे दिन एक हजार से ज्यादा नए केस
  • श्रम कानून में बदलाव पर आठ दलों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखानई दिल्ली : केंद्र पर कोरोना वायरस महामारी की आड़ लेकर श्रम कानून कमजोर करने का आरोप लगाते हुए आठ राजनीतिक पार्टियों ने संयुक्त रूप से राष्ट्रपति रामनाथ को¨वद को पत्र लिखा है। शुक्रवार को भेजे गए पत्र में पार्टियों ने इस मुद्दे पर अपना विरोध जताया है। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा महासचिव डी. राजा, भाकपा (माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक महासचिव देबब्रत बिस्वास, रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी महासचिव मनोज भट्टाचार्य, राजद सांसद मनोज झा, काची तोल तिरुमावलावन के अध्यक्ष विदुतलाई चिरुताइगल और लोकतांत्रिक जनता दल नेता शरद यादव ने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। (प्रेट्र)
  • एनजीटी ने एलजी पॉलीमर्स पर ठोका 50 करोड़ जुर्माना
  • पैकेज में हुई देरी तो बेरोजगारी की आएगी सुनामी: राहुल
  • काम पर नहीं आ रहे लोगों को पूरे वेतन के खिलाफ याचिका पर नोटिस
  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लड बैंक
  • द. कोरिया में शुरू हुई फुटबॉल लीग

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  • कोरोना से फैल रही नफरत पर यूएन ने जताई चिंता
  • स्पेन में समुद्र तटों पर जाने की इजाजत
  • 31 अगस्त तक आए ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
  • चीन से कोई बड़ी गलती हुई या फिर वह अक्षम है: ट्रंप
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