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More from Front Page

  • पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
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  • हिमाचल में लुभा रही निर्मल नदियों की सुखद कल-कल ’पेज 11
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  • वेबसाइट पर पढ़े
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  • सूनी रही जामा मस्जिद
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  • मरीजों को बचाना सरकार की पहली प्राथमिकता
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  • ट्रेन से कटकर 16 मजदूरों की मौत
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  • जागरण फिर बना देश का नं. 1 अखबार
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  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से, जल्द आएगा शेड्यूल
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  • क्वारंटाइन सेंटर में पुलिस ने भांजी लाठी
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  • उक्त व्यक्ति कर्नाटक से आया है। उसे क्वारंटाइन किया गया है। वह घर भाग रहा था। बारिश की वजह से फिसलने के कारण उसका हाथ टूटा है। परमजीत सिरमौर, सीओ, शंभूगंज
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  • कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान, चीन सीमा तक सड़क तैयार
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  • खगड़िया में चार, सहरसा में दो लोग कोरोना से संक्रमित
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  • संख्या के अनुपात में क्वारंटाइन सेंटर में रसोई की संख्या बढ़ाएं: नीतीश
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  • लॉकडाउन का पालन करेंपुलिस बल अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों की सुरक्षा में कर्मयोद्धा की तरह दिन-रात लगे हुए हैं। इन्हीं में सिकंदरा थाने में कार्यरत एसआइ विजय कुमार सिंह कर्मयोद्धा की भूमिका में दिन-रात क्षेत्र में गश्ती कर लोगों से लॉकडाउन का पालन करते हुए घरों में रहने की अपील कर रहे हैं। वेबजह घूम रहे लोगों से घरों में ही रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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  • इन्होंने दिया सबसे पहले जवाब : 8 मई को प्रकाशित तस्वीर एनएच-333-ए खैरा-सोनो मार्ग की है। सही उत्तर देने वालों के नाम हैं.. मिथिलेश तांती सिकंदरा, प्रियांशु कुमार बर्णवाल महिसौड़ी, करण कुमार साव हांसडीह, राजीव कुमार गुप्ता नरियाना, दिवाकर कुमार कृष्णपट्टी, परशुराम तांती लठाने, कृषाणु उज्ज्वल सिरचंद नवादा, राहुल कुमार लखनपुर, सुजल सिंह जमुई व मुन्ना सिंह भछियार। ’
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  • खाद्यान्न का वितरण
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  • विपक्ष मुद्दा विहीन : दामोदरसंवाद सूत्र, सिमुलतला(जमुई): बिहार में विपक्ष मुद्दा विहीन हो गई है। उपरोक्त बातें पूर्व मंत्री एवं जिला जदयू अध्यक्ष दामोदर रावत ने कहीं। इससे पहले जिलाध्यक्ष ने कई गांवों में जाकर लोगों से आपदा के इस घड़ी में उनका कुशलक्षेम जाना।
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  • ट्रक की ठोकर से किसान सलाहकार जख्मीसंवाद सूत्र, झाझा(जमुई): गुरुवार की रात झाझा-जमुई मुख्य सड़क पर कटौना गांव के समीप अज्ञात ट्रक ने मोटरसाइकिल पर सवार एक किसान सलाहकार को ठोकर मार दी। किसान सलाहकार गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल का इलाज एक प्राइवेट नर्सिंग होम में चल रहा है। महापुर पंचायत के किसान सलाहकार श्रवण कुमार को भोजन कोषांग में तैनात किया गया था। गुरुवार की रात प्रखंड के सभी क्वारंटाइन सेंटरों के प्रवासी कामगारों को भोजन कराकर मोटरसाइकिल से अपना घर जमुई जा रहे थे। इसी दौरान कटौना गांव के समीप विपरीत दिशा से आ रही एक ट्रक ने ठोकर मार दी। चिकित्सक ने बताया कि श्रवण का एक पैर के टूट गया है। सिर में भी गंभीर चोट है। घटना की सूचना पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी अनुज कुमार समेत अन्य पदाधिकारी घायल कर्मी को देखने के लिए अस्पताल पहुंचे और हर संभव मदद करने का भरोसा दिया।
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  • रेड जोन से ग्रीन जोन में आ रहे कई कर्मी
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  • गुमशुदा युवक को घर पहुंचाया गया
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  • लायंस क्लब की पहल पर रक्तदान शिविर का आयोजन
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  • दो की रिपोर्ट निगेटिवसंवाद सूत्र, झाझा(जमुई): बाहर से आ रहे प्रत्येक प्रवासी कामगारों का कोरोना जांच किया जाना है। शुक्रवार को प्रखंड मुख्यालय के नए भवन में रह रहे कामगारों में से 31 लोगों का सैंपल लिया गया है। अस्पताल प्रबंधक गजेन्द्र सिंह ने बताया कि पहले दो कामगार की भेजी गई रिपोर्ट निगेटिव आ गई है।
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  • क्वारंटाइन सेंटरों में अभी हैं 167 प्रवासी
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  • अन्य दुकानों को भी खोलने की मिले अनुमति
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  • चार दिनों में नौ श्रमिक स्पेशल ट्रेन पहुंची झाझासंवाद सूत्र, झाझा(जमुई): हावड़ा-पटना मुख्य रेलखंड के झाझा रेलवे स्टेशन होकर चार दिनों में नौ श्रमिक स्पेशल ट्रेन बिहार के विभिन्न कोने से पहुंची है। इस दौरान आरपीएफ द्वारा कुछ स्पेशल ट्रेन के कामगारों को एक फॉर्म भी उपलब्ध कराया गया। कामगार अपना पूरा पता से लेकर मोबाइल नंबर तक लिखकर रेलवे पदाधिकारी को सुपुर्द करेंगे। शुक्रवार को डाउन लाइन से एक श्रमिक स्पेशल झाझा पहुंची। डाउन लाइन की यह पहली स्पेशल ट्रेन रहने के कारण रेलवे अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा काफी सतर्कता बरती गई थी। साथ ही स्टेशन को आरपीएफ एवं रेल पुलिस द्वारा नाकेबंदी किया हुआ था। पलाभी से जसीडीह स्टेशन तक चली इस श्रमिक स्पेशल के प्रत्येक यात्री को प्लेटफॉर्म पर उतरने नहीं दिया। ट्रेन सुबह करीब 11:45 बजे स्टेशन पहुंची और 11:55 बजे जसीडीह के लिए रवाना हो गई। इस दौरान ट्रेन के लोको पाइलट एवं गार्ड को बदला गया। मालूम हो कि गुरुवार की दोपहर करीब 3:05 बजे केरल-बेतिया श्रमिक स्पेशल झाझा स्टेशन पहुंची थी और 3:15 बजे बेतिया के रवाना हो गई थी। इन दोनों स्पेशल ट्रेन के कामगारों के बीच एक फॉर्म उपलब्ध कराया गया जिसमें कामगार के पूरा पता वर्णित करना था। वहीं 5 मई को इस रेलखंड से दो श्रमिक स्पेशल एवं 6 मई को पांच श्रमिक स्पेशल ट्रेन राज्य के विभिन्न रेलवे स्टेशन पर पहुंची हैं। श्रमिक स्पेशन के आते ही रेलवे अधिकारी एवं आरपीएफ द्वारा सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
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  • प्रतिबंध के बावजूद बिक रहा गुटखासंवाद सूत्र, बरहट(जमुई): कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन किया गया है। इस दौरान तंबाकू युक्त गुटखा पर पूरी तरह से बैन है। इसके बावजूद प्रखंड के मलयपुर बाजार, पाड़ो, बाजार, मुट्ठीगंज समेत कई इलाकों में धड़ल्ले से इसकी बिक्री हो रही है। मौके का फायदा उठाकर दुकानदार इसे दोगुने रेट तक पर बेच रहे हैं। शुक्रवार को दैनिक जागरण की रियलिटी चेक में तमाम ऐसी दुकानें मिली। लॉकडाउन के दौरान तमाम एक्टिविटीज के साथ-साथ गुटखा और पान की दुकानों पर बैन है लेकिन इसके बावजूद बड़े आराम से इसकी बिक्री चालू है। आलम यह है कि लॉकडाउन के चलते गुटखे की डिमांड बढ़ जाने से दुकानदारों ने दाम भी बढ़ा दिया है। इन्हें प्रशासन का भी कोई डर नहीं है। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि दाम बढ़ जाने के बावजूद गुटखा खाने के शौकीनों में कोई कमी नहीं आई है।
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  • बीड़ी श्रमिकों की समस्याओं को दूर करने का मांगसंवाद सूत्र, झाझा(जमुई): लॉकडाउन में बीड़ी उद्योग की कमर टूट जाने से बीड़ी श्रमिकों के समक्ष भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। इस मामले में बिहार प्रदेश बीड़ी मजदूर संघ के पदाधिकारी ने श्रम मंत्री को पत्र लिखकर बीड़ी श्रमिकों की समस्याओं को दूर करने का मांग की है। प्रत्येक श्रमिक को दो-दो हजार रुपये देने सहित अन्य कई मांगों को रखते हुए प्रदेश महासचिव परमेश्वर यादव ने बताया कि बिहार में दस लाख से अधिक बीड़ी श्रमिक एवं बीड़ी उत्पादक हैं। श्रमिक को प्रतिदिनि एक हजार बीड़ी बनाने पर 70 से 95 रुपये मजदूरी मिलती है। कोरोना महामारी की वजह से पूरे भारत मे लॉकडाउन है जो आवश्यक भी है परंतु बीड़ी कामगार को परिवार चलाना कठिन हो गया है। कई परिवार भूखे सोने को विवश है। बीड़ी कामगार असंगठित, अशिक्षित व आर्थिक दुर्बल राज्यों ने बीड़ी श्रमिक को न्यूनतम वेतन नहीं मिलने की घोषणा की है। अशिक्षित होने के कारण श्रमिक को मालिक का नाम भी पता नहीं है। 90 प्रतिशत बीड़ी व्यवसाय उन ठीकेदारों से किया जाता है जो सरकार कानून का उल्लंघन करते हैं।
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  • मजदूरों का हंगामा,भोजन की व्यवस्था कराने की मांगसंवाद सूत्र, खैरा(जमुई): अमारी पंचायत के सुरौंधा गांव में प्रवासी मजदूरों के लिए बनाए गए क्वारंटाइन वार्ड में शुक्रवार को मजदूरों ने हंगामा कर ससमय भोजन की व्यवस्था कराने की मांग की है। मजदूरों ने बताया कि यहां पर खाने-पीने में काफी कठिनाई हो रही है। ससमय भोजन नहीं दिया जा रहा है। साथ ही साथ पानी की व्यवस्था भी इस वार्ड में नहीं की गई है जिससे हम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजदूरों ने जिलाधिकारी से क्वारंटाइन में खाने-पीने की व्यवस्था की मांग की है। इस बाबत अंचलाधिकारी शिवकुमार शर्मा ने बताया कि मजदूरों को हर समय खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है। वार्ड में एक गार्ड एवं अन्य पदाधिकारी को प्रतिनियुक्त किया गया है ताकि समस्याओं को बताया जा सके।
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  • मैसूर में फंसे दो दर्जन कामगारों ने सांसद से मांगी मदद, चिराग ने दिया भरोसा
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  • राशन के लिए घर आई वृद्ध महिला को मुखिया पति ने पीटा
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  • 51 वीं सालगिरह पर गिफ्ट लेकर पहुंची पुलिस
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  • अनुमान से बहुत अधिक लौट रहे हैं प्रवासी
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  • शनिवार, जेष्ठ कृष्ण पक्ष द्वितीया, विक्रम संवत् 2077
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  • शराब के साथ धराया
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  • बालू से लदा ट्रैक्टर जब्त
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  • भाई ने भाई से की मारपीट
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  • प्रोवीसी बनने पर डॉ. ठाकुर को दी बधाई
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  • सोनो में एक महीने तक निश्शुल्क लंगर की व्यवस्था
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  • विधानसभा वार खर्च की जाए विधायक मद की राशि
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  • 478 रोजेदारों को दी खाद्य सामग्री
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  • सतर्कता से ही कोरोना संक्रमण से बच सकते हैं
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  • आहर निर्माण में अनियमितता पर ग्रामीणों का प्रदर्शन
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  • महाजनों ने लॉकडाउन को ‘अवसर’ में बदला, कट रही चांदी
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  • अब नहीं चलेगी नगर निकायों की मनमानी
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  • मुजफ्फरपुर में सीएसपी संचालक से 4.15 लाख रुपये की लूट
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  • अगले हफ्ते और तेज होगी प्रवासी बिहारियों के लौटने की रफ्तार
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  • लॉकडाउन में तलाश ली खुशी, घर की छत पर उगा ली साग-सब्जी
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  • मुजफ्फरपुर में हाई शुगर से पीड़ित मासूम की मौत
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  • तीन लाख किसानों के खाते में सौ करोड़ रुपये ट्रांसफर
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  • दलीय सीमाएं टूटी, आरक्षण पर साथ आए 22 विधायक
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  • जदयू प्रखंड अध्यक्षों से सीएम ने क्वारंटाइन सेंटर के इंतजाम
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  • विदेश से आएंगे 2075 लोग गया में किए जाएंगे क्वारंटाइन
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  • बछिया के जन्म की प्रयोग स्थली बनेगा माधोपुर कृषि विज्ञान केंद्र
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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
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  • सतर्क रहना जरूरी राज्य में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और विकास कार्यो को बढ़ावा देने के साथ रोजगार सृजन के लिए लॉकडाउन के नियमों में आंशिक छूट देना समय की मांग है, लेकिन इस दौरान अत्यधिक सतर्कता भी जरूरी है। कुछ क्षेत्रों में थोड़ी छूट के बाद लोग जिस तरह बेतहाशा घरों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, उससे कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। इसलिए जहां भी लॉकडाउन में ढील दी जा रही है, वहां प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतते हुए कोताही करने वालों से सख्ती से पेश आना होगा। लोगों को भी चाहिए कि आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलें। साथ ही शारीरिक दूरी, मास्क और साफ-सफाई का ख्याल रखें। यदि सरकार के दिशा-निर्देशों का सही से पालन नहीं किया गया तो स्थिति बेकाबू हो सकती है। इससे बचने के लिए आम लोगों का सहयोग जरूरी है, लेकिन बहुत से लोग ऐसा नहीं करके कोरोना संक्रमण के खतरे को बढ़ा रहे हैं। समझना होगा कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए किसी भी तरह की अफवाह या फिर गलत धारणा से बचते हुए सतर्क रहना जरूरी है। यह उचित और सुरक्षित व्यवस्था है कि प्रदेश के बाहर से लौट रहे प्रवासी तुरंत अपने घर नहीं जाएंगे। इन लोगों को भी चाहिए कि वे स्वेच्छा से अपनी जांच कराने के लिए आगे आएं और चिकित्सकों की निगरानी में निर्धारित समय तक क्वारंटाइन सेंटर में रहें। सरकार उनकी देखरेख के प्रति सजग और तत्पर है। सभी जिला अस्पतालों में कोरोना वायरस के नमूना संग्रह की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। प्रयास किया जाना चाहिए कि बाहर से आए अधिक से अधिक लोगों के नमूने लिए जाएं, ताकि कहीं पर कोरोना का एक भी संदिग्ध मरीज छूटने न पाए। कई लोग दूसरे प्रदेशों से चोरी-छिपे यहां पहुंच रहे हैं। वैसे लोग पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। उनकी तलाश में पुलिस लगातार परेशान है, लेकिन वे स्वेच्छा से सामने नहीं आ रहे। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस उन लोगों से क्वारंटाइन सेंटर जाने और जांच कराने का आग्रह करती है, तो वे सुनने को तैयार नहीं हैं। यह प्रवृत्ति घातक होने के साथ समस्या को बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। ऐसा कतई नहीं किया जाना चाहिए।
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  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
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  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
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  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीगांवों में रोजगार के स्रोत खुलेदेशभर से बिहारी मजदूर अपने राज्य लौट रहे हैं। वे कह रहे हैं कि लॉकडाउन के कारण काम धंधा नहीं मिल रहा था। फैक्ट्री मालिक कोई राहत नहीं दे रहे थे। पैसे खत्म होने से मकान किराया व खाने का खर्च वहन करना मुश्किल हो रहा था। मकान किराया बाद में देने की बात वे नहीं मान रहे थे। वहां की सरकारें भी मदद नहीं कर रही थीं। ऐसी परिस्थिति में प्रवासी मजदूरों के घर लौटने के सिवा कोई चारा नहीं था। वे वोट बैंक हैं। इसलिए उनके वापसी को लेकर सभी पार्टियां शोर मचाने लगीं। लेकिन उनमें से किसी ने यह नहीं कहा कि अगर उनके शासनकाल में गांवों में संसाधनों के अनुरूप फैक्टियां लगाईं गई होतीं तो आज बिहारी मजदूरों को ऐसी विपत्ती की घड़ी में बाहर नहीं रहना पड़ता। अब भी इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। मिथिलेश कुमार, बलुआघाट, भागलपुर।खेल स्पर्धाएं निरस्त होना सहीकोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सभी के लिए शारीरिक दूरी बनाए रखना जरूरी है। बड़े खेलों में खिलाड़ियों व दर्शकों के लिए इसका पालन करना थोड़ा मुश्किल है। ऐसे में खेलों को अभी शुरू करना चुनौती भरा माना जा रहा है। यही वजह है कि ओलंपिक, आइपीएल जैसे खेल समारोह स्थगित कर दिया गए हैं। अधिकांश खेल प्रतियोगिताएं बंद हैं। बहुत सोच-विचार के बाद ही उसे शुरू किया जाएगा। इसके लिए खेल प्रेमियों को धैर्य रखना चाहिए। टी. मनु, कटिहार।मातृ दिवस पर करें मां का सम्मान10 मई को हमलोग मातृ दिवस मनाने जा रहे हैं। मां ने सदा हमारे दुख-सुख का ख्याल रखा। अपने स्नेह व अनुशासन से सींच कर अपने लाल को सैनिक, डॉक्टर, अभियंता, अधिवक्ता, आइएएस, शिक्षक आदि बनाए। हमें मातृ दिवस पर सभी माताओं का चरणस्पर्श कर उनका सम्मान करना चाहिए। सत्यनारायण,खरीक पूर्वी घारारी, भागलपुर।
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  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
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  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
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  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
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  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
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  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है
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  • जियो प्लेटाफॉर्म्स में 11,367 करोड़ रुपये का एक और बड़ा निवेश
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  • चीन में स्थित अमेरिकी कंपनियों को लुभाने में जुट गया है भारत
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  • नई दिल्ली, एएनआइ : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सíवसेज सेंटर में दो अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर रुपया-डॉलर में वायदा कारोबार को हरी झंडी दिखाई। ये दोनों एक्सचेंज बीएसई इंडिया आइएनएक्स व एनएसई-आइएफएससी हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पिछले एक दशक के दौरान भारत से संबंधित वित्तीय सेवा कारोबार का एक बड़ा विदेशी बाजारों में चला गया है। इन दोनों एक्सचेंजों पर यह शुरुआत उन्हीं कारोबारों को भारत वापस लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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  • सेंसेक्स इंट्रा-डे में 645.13 अंक चढ़ने के बाद बढ़त बरकरार नहीं रख पाया, सबसे ज्यादा 4.81 प्रतिशत की बढ़त एचयूएल के शेयरों में दर्ज
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  • पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
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  • पुराना स्टॉक निकालने के लिए ऑफर की भरमार
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  • इकोनॉमी की रिकवरी तय: निर्मला सीतारमण
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  • शेयर बाजारों को मिला रिलायंस का दम, लौटी तेजी
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  • डेयरी किसानों के लिए पैकेज पर हो रहा विचार
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  • गिफ्ट सिटी में रुपया-डॉलर का वायदा कारोबार शुरू
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  • चीन पर हर्जाने का दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
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  • प्रसार को रोकने के लिए एसिम्प्टोमैटिक लोगों की होगी जांच
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  • पंजाब में खेतों में जा गिरा मिग-29, पायलट सुरक्षित
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  • कोविड-19 से मुकाबले के लिए दो दवाओं के ट्रायल को मंजूरी
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  • कोरोना को लेकर सर्वे कर रही टीम का रजिस्टर फाड़ा
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  • कोरोना तेरा नाश हो ! तू पंकज को ले गया
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  • कफ्यरू बढ़ाने पर कोटा में भड़के लोग, प्रदर्शन कर थाना को घेरा
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  • वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का निधन
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  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा-31 अगस्त तक आए विवादित ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
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  • एनजीटी ने एलजी पॉलीमर्स पर ठोका 50 करोड़ जुर्माना
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