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  • एनजीटी ने एलजी पॉलीमर्स पर ठोका 50 करोड़ जुर्माना
  • सासनी में पथराव और फायरिंग, आठ लोग घायल
  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लड बैंकहिसार : दिल्ली से सटा होलंबी कलां गांव एम्स को बीते 18 सालों से रक्तदान कर रहा है। जब भी आवश्यकता होती है एक अपील पर जुट जाते हैं गांव वाले। कोरोना के दौर में तीन बार कर चुके हैं रक्तदान। ’पेज 12
  • शराब की ऑनलाइन बिक्री पर विचार करे सरकार: सुप्रीम कोर्ट
  • कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान, चीन सीमा तक सड़क तैयार
  • 69 हजार शिक्षक भर्ती की फाइनल उत्तरकुंजी जारी, रिजल्ट में टालमटोल
  • ट्रैक पर सोए 16 मजदूर ट्रेन से कटे
  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से
  • रिकवरी रेट और बढ़ा, सरकार ने कहा-कोरोना के साथ जीना होगा
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा-31 अगस्त तक आए ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
  • चीन से कोई बड़ी गलती हुई या फिर वह अक्षम है: ट्रंप

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  • ईद के लिए रखे पैसों से भूखों को खिलाएं खाना
  • बाहरी लोगों पर नजर रखें समितियां : डीएम
  • खानपान अच्छा तो बढ़ेगी रोग प्रतिरोधक क्षमता
  • गांव जसराना में तनाव, पुलिस तैनात
  • तेजी से जांची जा रहीं कॉपियां
  • क्वाइंटाइन सेंटर में नहीं हैं माकूल इंतजाम
  • योग कर बढ़ा रहे रोग प्रतिरोधक क्षमता
  • तू कितनी अच्छी है ..
  • डीएलएड प्रशिक्षुओं को मिल रही ऑनलाइन पढ़ाई
  • मथुरा रोड पर पलटा डीजल से भरा टैंकर

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  • 36 कुंतल चावल के मामले में पूर्ति निरीक्षक ने की जांच
  • ट्रक से कुचलकर नव दंपती की मौतचंदपा थाने के निकट ट्रक ने मारी टक्कर, बाइक पर सवार थे पति-पत्नी
  • 23 साल बाद पालिका ने बढ़ाई लाइसेंस फीस और किरायाबोर्ड की बैठक में सर्व सम्मति से पास हुए 17 प्रस्ताव कुछ प्रस्तावों पर ङोलनी पड़ी सभासदों की नाराजगी
  • हॉटस्पॉट इलाके में बढ़ी सतर्कता, कराया जा रहा सर्वे
  • जिला पंचायत अध्यक्ष ने निरस्त कर दिए एएमए केआदेश
  • शनिवार, 9 मई, 2020ज्येष्ठ कृ़ष्ण पक्ष 2 वि. 2077

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  • जंयती घर पर मनाएं
  • भोजन बांटने निकले मददगार
  • आगरा के लोगों को रोकने में नाकाम
  • हार्डवेयर कारोबारी को पीटा, तोड़फोड़
  • अहमदाबाद से आए मजदूर की क्वारंटाइन सेंटर में मौत
  • ग्राम विकास प्रमुख ने बांटा गरीबों को राशन
  • घर में घुसकर मारपीट, रिपोर्ट दर्ज
  • सच्चे कोरोना योद्धा हैं एंबुलेंस चालक: आशीष
  • कोरोना वॉरियर्स का जोरदार सम्मान

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  • इंतजार है आशियाना बसाने का
  • 12 मई को होगी खरीफ की फसल की गोष्ठी
  • संदीप हत्याकांड में दो आरोपित गिरफ्तार
  • चार माह लटक सकता है रेलवे पुल निर्माण
  • बहादुरपुर देवकरण में दो पक्षों में मारपीट, फायरिंग
  • लॉकडाउन में फंसे 151 वाहनों के पंजीकरण
  • हाईटेंशन लाइन पर चढ़े संविदा कर्मियों समेत पांच के खिलाफ लिखाई रिपोर्ट
  • खाद्य सामग्री बांटी
  • संस्था ने अवैध रूप से हटाए हॉस्पिटल से सफाई कर्मचारी
  • तीन गांव में पागल कुत्ते का आतंक, घेरकर मारा

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  • हवाई शुल्क : उदयपुर, जोधपुर, भोपाल, जम्मू-कश्मीर, कोलकाता, गुवाहाटी, बागडोगरा, अहमदाबाद, मुम्बई, चेन्नई, हैदराबाद, पटना, रांची, काठमांडो 2 रुपये प्रति कापी ओवरसीज 2 डी.एच. (यू.ए.ई.) संस्थापक-स्व. पूर्णचन्द्र गुप्त, पूर्व प्रधान सम्पादक-स्व.नरेन्द्र मोहन सम्पादकीय निदेशक-महेन्द्र मोहन गुप्त, प्रधान सम्पादक-संजय गुप्त, जागरण प्रकाशन लि. के लिए धीरेन्द्र मोहन गुप्त द्वारा दैनिक जागरण प्रेस ए-32 सेक्टर 2, ताला नगरी इण्डस्ट्रियल एरिया, रामघाट रोड अलीगढ़ से प्रकाशित एवं मुद्रित। सम्पादक (उत्तर प्रदेश) -आशुतोष शुक्ल* दूरभाष : 8429021357, 0571-2780076 ए-ें्र’: ं’्र¬ं1ँं’्र.Aं¬1ंल्ल.ङ्घे, फ.ठ.क. ठ. , वढकठ/2013/53914 * इस अंक में प्रकाशित समस्त समाचारों के चयन एवं सम्पादन हेतु पी.आर.बी. एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी। समस्त विवाद अलीगढ़ न्यायालय के अधीन ही होंगे। वर्ष 7 अंक 252
  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
  • धैर्य खो रहा विपक्षमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष राम गो¨वद चौधरी को पत्र लिखकर सही नसीहत दी है कि यदि वह कोरोना नियंत्रण मुहिम में जुटे तंत्र का मनोबल नहीं बढ़ा सकते तो कम से कम निर्थक आरोप लगाकर मनोबल गिराना तो नहीं चाहिए। आसार कम ही हैं कि चौधरी और अन्य विपक्षी नेता इस नसीहत का ध्यान रखेंगे, पर विपक्ष को याद रखना चाहिए कि कोरोना संकट वैश्विक आपदा है। इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, पर जहां तक इस आपदा से निपटने का सवाल है, योगी आदित्यनाथ के विजन, प्रबंधन और क्रियान्वयन की सराहना पूरी दुनिया में की जा रही है। उत्तर प्रदेश का भौगालिक और जनसांख्यिक विस्तार अधिकतर देशों से अधिक है। इतने बड़े भूभाग और जनसंख्या को कोरोना संकट से यथासंभव महफूज रखने का प्रबंधन आसान नहीं है। योगी सरकार ने बहुत व्यवस्थित तरीके से इसे करके दिखाया। मुख्यमंत्री की शायद यही उपलब्धि विपक्ष को बेचैन कर रही है। विपक्षी दल जिस तरह कभी श्रमिकों, तो कभी कोई अन्य सवाल उठाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं, उसे आम आदमी भी पसंद नहीं कर रहा होगा। वजह है कि केारोनाकाल में सरकार ने न सिर्फ अन्य राज्यों में फंसे छात्रों और श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई बल्कि लाखों परिवारों को खाना, राशन और पैसा भी पहुंचाया। बेशक इतने बड़े अभियान में कुछ गड़बड़ियां रह गई होंगी, कुछ लोग सहायता पाने से वंचित रह गए होंगे, पर ऐसी छोटी बातों को तूल देकर सरकार की पूरी कवायद को खारिज कर देना उचित नहीं है। कोरोना राजनीति नहीं बल्कि योगदान करने का विषय है। विपक्षी दलों को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए कि जिस अभियान में सरकार के अलावा छोटे-बड़े उद्यमी, व्यवसायी, दुकानदार, गरीब किसान, मजदूर, बच्चे, शिक्षक, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी और अन्य सामाजिक वर्गो के लोग अपनी स्थिति के हिसाब से योगदान कर रहे हैं, उसमें उन्होंने क्या योगदान किया? कोरोना संकट से घिरे लोगों से यह बात छिपी नहीं है कि कौन उनकी मदद कर रहा और कौन राजनीति। मौका मिलने पर लोग जवाब भी देंगे।
  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ -डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीशुद्ध व निर्मल हो गयीं गंगा गंगा को निर्मल करने के लिए सत्तर के दशक से अब तक केंद्र सरकार ने कई बार कदम उठाए, उसकी सफाई के लिए हजारों करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि खर्च की भी कर दी, परंतु नतीजा फिर वहीं ढाक के तीन पात है, परंतु आज जिस कदर विश्व में कोरोना वायरस के कारण लगभग विश्व के अधिकतर देशों में लॉकडाउन लगा हुआ। हमारे देश में भी लॉकडाउन का तृतीय चरण चल रहा है। जिसके कारण आज वायुमंडल भी स्वच्छ होने लगा है देश ही नहीं बल्कि विश्व की सभी नदियां भी साफ होने लगी हैं। -मुकेश अग्रवाल, आगरा रोड, हाथरस
  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है

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  • राहत पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
  • जियो प्लेटफॉर्म्स में फेसबुक के बाद एक और बड़ा निवेश
  • जापान ने मांगी कंपनियों के संचालन में मदद
  • देश बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा
  • कोरोना वायरस से पांच लोगों की मौत, 113 नए मरीज मिले
  • पंकज त्रिपाठी सुना रहे हैं जीवन से जुड़ी कहानियां..

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  • अलीगढ़, 9 092ए0908 2020
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