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  • मरीजों का रिकवरी रेट तीस प्रतिशत तक पहुंचा
  • शराब की ऑनलाइन बिक्री पर विचार करे सरकार
  • कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान, चीन सीमा तक सड़क तैयार
  • सूबे की एमएसएमई इकाइयों को तकनीकी सहयोग देगा डेनमार्क
  • दैनिक जागरण फिर बना देश का नं. 1 अखबार
  • वेबसाइट पर पढ़े
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  • ट्रेन से कटकर 16 मजदूर मरे
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  • एप से प्रवासी कामगारों को योजनाओं का लाभ और रोजगार भी
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  • 69000 शिक्षक भर्ती की उत्तरकुंजी जारी रिजल्ट में टालमटोल
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  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से, शेड्यूल जल्द
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  • बुद्ध पूर्णिमा पर किया सम्मानित
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  • सोन नद में फिर से शुरू हुआ बालू का अवैध खनन
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  • स्टूडियो खोलने की मांग
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  • 114 विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू
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  • कोरोना वारियर्स को किया गया सम्मानित
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  • सावधानी हटी तो कोरोना पड़ेगा भारी
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  • सीएम पर अभद्र टिप्पणी
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  • कई टोलों में पेयजल संकट
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  • संवेदनशील रहकर सुचारु रूप से करें कार्य
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  • एसपी साहब, पैसा वापस करा दीजिए
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  • स्ट्रीट लाइट न जलने से परेशानी
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  • र्दुव्‍यवहार में एक नामजद 40 अज्ञात पर केस
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  • मन की मिट्टी को थोड़ा गीला-कच्चा रहने दो
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  • दो गज की दूरी, बनी बड़ी जिम्मेदारी
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  • शहीदों पर टिप्पणी करने वाली छात्र पर मुकदमा
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  • प्रवासी श्रमिकों को गौ आश्रय स्थलों से जोड़ें: मुख्यमंत्री
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  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीजमाखोरों पर नकेल कसे प्रशासनलॉकडाउन के बाद से ही जमाखोरों व खाद्यान्न माफियाओं की सक्रियता बढ़ गई है। यूपी व बिहार की सीमा पर खाद्यान्न की कालाबाजारी चरम पर है। इस पर रोक लगाने में प्रशासनिक अमला पूरी तरह से असफल रहा है। गरीबों को दिए जाने वाले खाद्यान्न के कालाबाजारी में जाने से पात्र इधर-उधर भटक रहे हैं। गोदामों से खाद्यान्न कालाबाजारी शुरू हो जाती है। कालाबाजारी रोकने की जिस पर जिम्मेदारी है वे खुद खाद्यान्न माफियाओं से मिले हैं। ऐसे में गरीबों की पहुंच से खाद्यान्न दूर होता जा रहा है। गरीबों की शिकायतों का विभागीय अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, कोटेदार उनकी सुनते नहीं हैं। गरीब जाएं तो कहां? खाद्यान्न माफियाओं पर कार्रवाई करनी चाहिए। राम उग्रह सिंह, तिखमपुर, बलिया।खराब सड़कों पर चलना दुरूहविकास को रफ्तार देने के लिए तेजी से सड़कों का जाल फैलाया जा रहा है। मकसद है कि सुदूर इलाके के गांव नगर व कस्बों से जुड़ जाएं। गांव-गिरांव के रहवासियों को दैनिक कार्यों में सहूलियत मिल सके। सड़कों के निर्माण में मानकों की अनदेखी से सड़क शीघ्र ही खराब हो जा रही हैं। आलम यह है कि सड़क में दर्जनों बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इससे लोगों को आवागमन में असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। निर्धारित मानक के अनुरूप सड़क का निर्माण जरूरी है।राम आशीष भारती, चकिया, चंदौली।शिक्षा प्रणाली में फेरबदल की जरूरतशासन द्वारा शिक्षा के विकास के लिए काफी पैसे खर्च किये जा रहे हैं, लेकिन अगर लॉकडाउन लंबा चले तो इसमें शिक्षा को बाधित न किया जाए। ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से ही छात्रों को सरकार पढ़वाने का काम करे जिससे छात्रों का साल बर्बाद न हो। इसके लिए सरकार को चाहिए कि शिक्षकों को प्रेरित करें। समय के हिसाब से शिक्षा व्यवस्था प्रणाली में फेरबदल की जरूरत है। लोकेश शुक्ला, मुफ्तीगंज, जौनपुर।
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  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
    रिस स्थित गैर सरकारी संगठन रिपोर्टर्...
  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है
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  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
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  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
    कडाउन में ढील के बाद जब कारोबारी गतिवि...
  • धैर्य खो रहा विपक्षमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष राम गो¨वद चौधरी को पत्र लिखकर सही नसीहत दी है कि यदि वह कोरोना नियंत्रण मुहिम में जुटे तंत्र का मनोबल नहीं बढ़ा सकते तो कम से कम निर्थक आरोप लगाकर मनोबल गिराना तो नहीं चाहिए। आसार कम ही हैं कि चौधरी और अन्य विपक्षी नेता इस नसीहत का ध्यान रखेंगे, पर विपक्ष को याद रखना चाहिए कि कोरोना संकट वैश्विक आपदा है। इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, पर जहां तक इस आपदा से निपटने का सवाल है, योगी आदित्यनाथ के विजन, प्रबंधन और क्रियान्वयन की सराहना पूरी दुनिया में की जा रही है। उत्तर प्रदेश का भौगोलिक और जनसांख्यिक विस्तार अधिकतर देशों से अधिक है। इतने बड़े भूभाग और जनसंख्या को कोरोना संकट से यथासंभव महफूज रखने का प्रबंधन आसान नहीं है। योगी सरकार ने बहुत व्यवस्थित तरीके से इसे करके दिखाया। मुख्यमंत्री की शायद यही उपलब्धि विपक्ष को बेचैन कर रही है। विपक्षी दल जिस तरह कभी श्रमिकों, तो कभी कोई अन्य सवाल उठाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं, उसे आम आदमी भी पसंद नहीं कर रहा होगा। वजह है कि केारोनाकाल में सरकार ने न सिर्फ अन्य राज्यों में फंसे छात्रों और श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई बल्कि लाखों परिवारों को खाना, राशन और पैसा भी पहुंचाया। बेशक इतने बड़े अभियान में कुछ गड़बड़ियां रह गई होंगी, कुछ लोग सहायता पाने से वंचित रह गए होंगे, पर ऐसी छोटी बातों को तूल देकर सरकार की पूरी कवायद को खारिज कर देना उचित नहीं है। कोरोना राजनीति नहीं बल्कि योगदान करने का विषय है। विपक्षी दलों को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए कि जिस अभियान में सरकार के अलावा छोटे-बड़े उद्यमी, व्यवसायी, दुकानदार, गरीब किसान, मजदूर, बच्चे, शिक्षक, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी और अन्य सामाजिक वर्गो के लोग अपनी स्थिति के हिसाब से योगदान कर रहे हैं, उसमें उन्होंने क्या योगदान किया? कोरोना संकट से घिरे लोगों से यह बात छिपी नहीं है कि कौन उनकी मदद कर रहा और कौन राजनीति। मौका मिलने पर लोग जवाब भी देंगे।
    कडाउन में ढील के बाद जब कारोबारी गतिवि...

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  • जापान ने भारत से मांगी कंपनियों के संचालन में मदद
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  • तीस मुस्लिम परिवारों ने की हंिदूू धर्म में वापसी
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  • टेस्टिंग पर जोर, किट पर खामोशी
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  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लडबैंक
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  • माइक्रोवेब ओवन से बनाया यूवी सैनिटाइजर
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  • महाराष्ट्र में एक हजार से ज्यादा नए मामले
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