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More from Front Page

  • आकाशवाणी व दूरदर्शन भी देंगे गिलगिट के मौसम की जानकारी
  • रिकवरी रेट और बढ़ा, सरकार ने कहा-कोरोना के साथ जीना होगा
  • 31 अगस्त तक आए ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
  • प्रवासी श्रमिकों को गौ आश्रय स्थलों से जोड़ें
  • शराब की हो ऑनलाइन बिक्री या होम डिलीवरी
  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से, जल्द आएगा शेड्यूल
  • मोस्ट वांटेड गैंगस्टर बिल्ला गिरफ्तार
  • दैनिक जागरण फिर बना देश का नं. 1 अखबार
  • कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान, चीन सीमा तक सड़क तैयार
  • ट्रेन से कटकर 16 मजदूरों की मौत

More from Front Page

  • संदिग्ध परिस्थिति में विवाहिता की मौतलक्ष्मीगंज : रामकोला थाने के पगार गांव के पूर्वी टोला में यशोदा (22) पत्नी कन्हैया की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। परिवार के लोग खेत में काम करने गए थे। साढ़े तीन बजे पति घर आए तो दरवाजा अंदर से बंद था। अंदर से आवाज नहीं आई तो दरवाजा तोड़ा गया। कमरे में यशोदा फंदे से लटकी मिली। कप्तानगंज सीएचसी ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई।
  • बिहार बार्डर पर बढ़ी प्रशासन की सख्ती
  • पूर्व राज्यमंत्री ने दी आर्थिक सहायता
  • तू कितनी अच्छी है ..
  • अवधि पूरा होने पर घर भेजे गए 29 लोग
  • नोडल अधिकारी ने किया निरीक्षण, दिए निर्देश
  • वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये शुरू हुआ न्यायिक कार्य
  • मेडिकल कॉलेज व खिरकिया पुल के लिए पहली किस्त अवमुक्त
  • पुलिस की गाड़ी से कूदने वाले युवक की मौत
  • प्रधान और समर्थकों पर मारपीट का आरोप
  • खसरे से एक दर्जन पीड़ित, लोगों में भय
  • 22 रोजगारसेवकों को कारण बताओ नोटिस
  • कोरोना वारियर्स को दिए गए निर्देश
  • मारपीट में आधा दर्जन घायल
  • मूल्यांकन में बरतें पारदर्शिता

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  • वीडियो कांफं्रेसिंग के जरिये होगी मामलों की सुनवाई
  • सभासद, पूर्व सभासद समेत 29 पर मुकदमा
  • सचिव, प्रधान, टीए से वसूल होंगे 81 हजार
  • बाहर से आने वालों पर नजर रखें समितियां
  • गुजरात से आए लोगों ने किया वाहन के लिए हंगामा,पैदल गए
  • आपरेशन के बाद महिला की हालत खराब
  • उत्पादन को उद्योग तैयार,बाजार की चिंता
  • मुम्बई से लौटा एक और युवक कोरोना पॉजिटिव
  • रेडक्रॉस दिवस पर विभिन्न वर्ग के लोग हुए सम्मानित

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  • सरकार का प्रयास सराहनीय: सांसद
  • विवाद में घायल महिला की मौत
  • शासन के आदेशों का अनुपालन कराएं

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  • टीबी के साथ कोरोना की भी कराएं जांच
  • बाइक सवार को ठोकर मारकर पलटी पिकअप
  • मारपीट को लेकर चार लोगों पर मुकदमा
  • जमीन पर कब्जा करने पहुंचे सैकड़ों ग्रामीण
  • 14995 कापियों का हुआ मूल्यांकन
  • पॉजिटिव मरीज की तीसरी रिपोर्ट भी निगेटिव
  • मकान ध्वस्तीकरण में नहीं हुआ नियमों का पालन

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  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीमहिलाओं की सुरक्षा को सरकार उठाए कदमदेश में महिला सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। आए दिन हो रही घटनाओं को देख कर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हर क्षेत्र में महिलाएं पुरूषों से कदमताल कर रहीं है। किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है। वो चाहे सरकारी कार्यालय हो या बात आसमान छूने की। मगर फिर भी महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है। दुष्कर्म, हत्या जैसी घटनाओं से महिलाएं अकेले में बाहर निकलने से डरती हैं। सरकार को चाहिए कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुरक्षित माहौल का सृजन करें। ताकि महिलाएं भी अपने आप सुरक्षित महसूस कर सकें। इसके लिए सरकार को जो महिला सुरक्षा के लिए कानून बनाया है उसका शक्ति से पालन कराए। तब जाकर महिलाएं आपने आपको सुरक्षित महसूस करेंगी। छोटू, बभनगांवा,बस्ती।मास्क व फिजिकल डिस्टेंसिंग का करें पालनकोरोना वायरस से हर कोई परेशान है। वर्तमान समय में इससे अनेकों लोग काल के गाल में समा रहे हैं। इससे बचाव पर ध्यान देने की जरूरत है। संक्रमण के हालात तेजी से बदल रहे हैं। नए मामले आ रहे हैं तो ठीक होने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में लोगों को घर में व बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग व शारीरिक दूरी का पालन करना चाहिए। एडवाइजरी जारी होने के बाद भी अभी भी कुछ लोग लापरवाही बरत रहे हैं। लॉकडाउन का पालन करते हुए औरों को भी इसके लिए जागरूक करना होगा। चंद्रभूषण पांडेय, भरवलिया पांडेय, संत कबीरनगर संक्रमण फैलने का डरलॉकडाउन में अन्य प्रदेशों से लोग भागकर अपने घरों को आ रहे हैं। इनको होम क्वारंटाइन करने के लिए जांच करके छोड़ दिया जा रहा हैं। यह लोग घर आने के बाद परिवार में घुल मिलकर रहते और बाहर घूमते हैं। इससे गांवों में संक्रमण फैलने का डर बना रहता हैं। पूरा गांव भय के साये में रहता हैं। सरकार को चाहिए कि इन्हें पहले की तरह क्वारंटाइन सेंटर में रखें और 14 दिन के बाद छोड़ें। मनोज प्रभाकर, बुकनिहा खालसा, सिद्धार्थनगर
  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर

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  • 69000 शिक्षक भर्ती की उत्तरकुंजी जारी
  • आरेंज जोन में भी 12 से शुरू होगा मूल्यांकन
  • सूबे की एमएसएमई इकाइयों को तकनीकी सहयोग देगा डेनमार्क
  • आचार्य की सींची सरस्वती को छूकर निकली थी ‘मधुशाला’
  • ग्राम रोजगार सेवकों के बकाया 225 करोड़ रुपये 12 मई को मिलेंगे
  • किसान निधि की आपत्तियां जून तक निपटाएं : शाही
  • एप से प्रवासी कामगारों को रोजगार भी
  • मिले निर्देश, छह जुलाई से शुरू होगा विश्वविद्यालय व कॉलेजों में नया सत्र
  • वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का निधन

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  • आर्थिक संकट के बावजूद समाचार पत्रों की हरसंभव मदद करेंगे: भूपेश बघेल
  • वायुसेना, नौसेना व कोस्ट गार्ड के 37 हवाई अड्डों का होगा आधुनिकीकरण
  • वित्त राज्यमंत्री ने कोरोना योद्धाओं के लिए दिए 50 हजार पीपीई व मास्क
  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लड बैंक
  • पैकेज में हुई देरी तो बेरोजगारी की आएगी सुनामी: राहुल गांधी
  • घाटी में तीसरे दिन भी तनाव पथराव में डीएसपी घायल
  • शेयर बाजारों को रिलायंस का दम
  • जियो प्लेटफॉर्म्स में फेसबुक के बाद एक और बड़ा निवेश
  • जापान ने मांगी कंपनियों के संचालन में मदद
  • देश बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा
  • टूटा था गेस्ट हाउस का दरवाजा रातों में जागकर देते रहे हम पहरा
  • महाराष्ट्र में लगातार तीसरे दिन एक हजार से ज्यादा नए मामले
  • राहत पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र

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  • पंजाब में खेतों में जा गिरा मिग-29
  • भारतीय टीम के क्वारंटाइन के लिए तैयार बीसीसीआइ
  • भारतीय महिला अंडर-17 फुटबॉल टीम की फिटनेस बेहतर : कोच
  • द. कोरिया में शुरू हुई फुटबॉल लीग
  • खबरें एक मिनट में
  • हरिद्वार में गंगा में अस्थि विसर्जन की सशर्त अनुमति
  • चार चचेरे भाइयों और चाचा-भतीजा समेत नौ की मौत से अंतौली में मातम
  • आज के प्रमुख टीवी कार्यक्रम
  • उप्र में कामगारों का हंगामा

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  • किम ने चिन¨फग को कोरोना पर जीत का बधाई संदेश भेजा
  • भले मर जाएं पर मुफ्तखोरी हमें मंजूर नहीं..
  • हरियाणा में तीस मुस्लिम परिवारों ने की हंिदूू धर्म में वापसी
  • चीन से कोई बड़ी गलती हुई या फिर वह अक्षम है: ट्रंप
  • स्वच्छता की आदतों से आधा हो सकता है संक्रमण का खतरा
  • शारीरिक दूरी के साथ जॉगिंग कर रहा रोबोट
  • कोरोना से फैल रही नफरत की सुनामी पर यूएन ने जताई चिंता
  • वैदिक मंत्रों से गूंजा व्हाइट हाउस
  • स्पेन में समुद्र तटों पर जाने की इजाजत
  • एलजी पॉलीमर्स पर 50 करोड़ जुर्माना
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