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More from Front Page

  • देश में कोरोना से रिकवरी रेट 30 प्रतिशत तक पहुंचा
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  • एलजी पॉलीमर्स पर 50 करोड़ का जुर्माना
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  • शराब की ऑनलाइन बिक्री पर विचार करे सरकार: सुप्रीम कोर्ट
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  • ट्रेन से कटकर मप्र के 16 मजदूरों की मौत
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  • कैलास मानसरोवर यात्र आसान, चीन सीमा तक सड़क तैयार
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  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से
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  • ग्रीन जोन फतेहपुर जिले में मिले दो संक्रमित, इलाका सील
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  • देश बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा’पेज 9।
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  • वैदिक मंत्रों से गूंजा व्हाइट हाउसवाशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रीय प्रार्थना दिवस पर व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में हंिदूू पुरोहित ने पवित्र शांति का पाठ कराया। यह शांति पाठ कोरोना से प्रभावित व्यक्ति के स्वास्थ्य, सुरक्षा के लिए किया गया। ट्रंप के आमंत्रण पर न्यूजर्सी स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर के पुरोहित हरीश ब्रrाभट्ट प्रार्थना कराने के लिए पहुंचे थे। ’पेज 12।चीन पर हर्जाने का दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिकानई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर चीन से 600 अरब डालर का हर्जाना वसूलने के लिए केंद्र को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में दावा करने का आदेश देने की मांग की गई। यह हर्जाना कोरोना वायरस से भारत को हुए नुकसान केबदले में वसूले जाने को लेकर है। ’पेज 12।
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  • दैनिक जागरण फिर बना देश का नं. 1 अखबार
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  • एप से प्रवासी कामगारों को योजनाओं का लाभ व रोजगार भी
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  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लडबैंकहिसार: दिल्ली की सीमा से सटा होलंबी कला गांव एम्स को पिछले 18 सालों से रक्तदान कर रहा है। जब भी किसी को जरूरत होती है एक अपील पर जुट जाते हैं गांव वाले। कोरोना के इस दौर में गांव वाले तीन बार कर चुके हैं रक्तदान।’पेज 12
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  • जागरण विशेषभले मर जाएं पर मुफ्तखोरी हमें मंजूर नहीं..
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  • वेबसाइट पर पढ़ें
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  • चीन से गलती हुई या फिर वह अक्षम है: ट्रंप 12
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  • थाना तालग्राम के परिसर में प्रभारी विनोद मिश्र सहित सभी पुलिस कर्मियों को सम्मानित करते समाजसेवी विकास अग्निहोत्री ’ जागरण
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  • छिबरामऊ से जोड़ी जाएगी रेलवे अब की ओएचई
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  • कोरोना योद्धाओं के कर्मपथ को सलाम
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  • तिर्वा में फांसी के फंदे पर लटका मिला युवक का शव
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  • मास्क लगाए बिना ही मजदूरों ने किया काम
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  • कोरोना पॉजिटिव का फिर भेजा फॉलोअप सैंपल
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  • व्यापारी समेत पुत्र व भाई को पीटकर किया मरणासन्न
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  • पास पैसा है न कौड़ी, फिर भी ‘जिंदगी’ दौड़ी
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  • लॉकडाउन में टीबी की जांच ‘अनलॉक’
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  • 1295 लोगों को लेकर आई स्पेशल ट्रेन, पानी व भोजन देकर बसों से संबंधित जिलों में भेजे यात्री
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  • मुसीबत के ‘बाजार’ में मजबूरी का ‘सौदा’
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  • ड्रग वेयर हाउस से सप्लाई होंगी दवाएं
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  • दिव्यांग वृद्ध पर फेंकी खौलती लहन
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  • चुनावी रंजिश में प्रधान के भतीजे को गोली मारी
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  • प्रवासियों के लिए संजीवनी बनी राहत की रेल
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  • बच्चों के साथ स्टेशन से बाहर आतीं महिला ’ जागरण
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  • रेलवे स्टेशन पर जायजा लेने पहुंचे जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह व पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल मिश्र’ जागरण
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  • ट्रेन से झांकते बच्चे ’ जागरण
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  • पंद्रहवां रोजा इफ्तारसुन्नी>>6:52 शामशिया>>7:01 शामसोलहवां रोजा>>सहरी>>सुन्नी>>3:55 सुबहशिया>>3:49 सुबह
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  • ..आ अब लौट चलें
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  • महिला के बैंक खाते निकल गए 98 हजार
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  • सीएमओ कार्यालय परिसर पर बने औषधि भंडार से नहीं होगा दवाओं का क्रय
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  • समय से पहुंचे शासन को रिपोर्ट, होगी सख्त कार्रवाई
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  • दूसरी बाइक नहीं देने पर विवाहिता को बनाया बंधक
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  • शराब के नशे में छत से गिरा युवक, मौत
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  • कर्मयोगियों को मास्क बांट किया उत्साहवर्धन
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  • 38 दिन बाद बिहार व झारखंड को रवाना हुए 20 लोग
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  • नोडल अधिकारी ने देखी व्यवस्थाओं की हकीकत
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  • जागरण संवाददाता, कन्नौज: प्रदेश सरकार द्वारा नामित नोडल अधिकारी (कोविड-19) ने जिले में कोरोना संक्रमण रोकने को किए गए इंतजामों को बारीकी से देखा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी रिपोर्ट समय से शासन को भेजी जाएं। शुक्रवार को प्रदेश सरकार द्वारा नामित नोडल अधिकारी डॉ. राजेश साहू ने सबसे पहले सीएमओ कार्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने डाटा फी¨डग रूम में ऑपरेटरों को निर्देश दिए कि समय से सभी रिपोर्ट की फी¨डग करें, जिससे शासन को सभी सूचनाएं समय से प्राप्त हो सकें। इसके बाद कनपटियापुर स्थित लेवल-2 हॉस्पिटल का भी निरीक्षण किया तथा आइसोलेशन वार्ड को देखा। वहीं, क्रिस्तु ज्योति स्कूल में बने शेल्टर होम में भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने सदर तहसील में सामुदायिक रसोई में बन रहे भोजन की गुणवत्ता को परखा तथा विकास भवन में बने कोरोना कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने पैसिव क्वारंटाइन सेंटर आशा होटल को भी देखा। इस दौरान सीडीओ प्रेमप्रकाश त्रिपाठी, सीएमओ डॉ. कृष्ण स्वरूप, एसीएमओ डॉ. राममोहन तिवारी, डॉ. कमलचंद्र रॉय भी मौजूद थे। मेडिकल कॉलेज में की बैठक: जिला मुख्यालय के बाद नोडल अधिकारी डॉ. राजेश साहू ने कोविड-19 डेडीकेटेड अस्पताल सीएचसी तिर्वा का निरीक्षण किया तथा प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार से भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार व डॉ. वीपी प्रियदर्शी समेत कोविड प्रोग्राम में जुटे सभी डॉक्टरों के साथ बैठक की।
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  • बरसात से पहले पूरा होगा बूढ़ी गंगा का पुनरुद्धार
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  • कार्रवाई के नाम पर पुलिस बनाती रही समझौते को दबाव
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  • परीक्षकों को दस्ताने पहने न देख जेडी नाराज
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  • अधेड़ महिला का शव पेड़ पर लटका मिला
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  • सहकारी अधिकारी, तत्कालीन शाखा प्रबंधक व पूर्व सचिव सहित तीन फंसे
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  • बुखार में तड़पा मरीज, नहीं आए चिकित्सक जासं, फरुखाबाद :मऊदरवाजा निवासी आरिफ को शुक्रवार को बुखार आने के कारण लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. अभिषेक चतुर्वेदी ने प्राथमिक इलाज कर फिजीशियन डॉ. अशोक कुमार से मोबाइल पर संपर्क किया। उन्हें बुलाने के लिए सरकारी आवास पर स्वास्थ्य कर्मचारी को भेजा गया। इसके बावजूद वह मरीज को देखने नहीं पहुंचे। यही स्थिति अधिकांश चिकित्सकों की है। कुछ चिकित्सकों का रवैया ठीक न होने पर मरीजों को भुगतना पड़ता है।
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  • दिवंगत पत्रकार को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
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  • प्रवासी श्रमिक की जगह आया उसका शव
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  • फायरिंग कर दहशत फैलाने पर रिटायर फौजी गिरफ्तार
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  • प्रवेश न देने पर नशेड़ियों ने किया हंगामा
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  • हरदोई और शाहजहांपुर के लोग नाव के सहारे कर रहे आवागमन
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  • अमृतपुर थाने के ड्राइवर को पीटा, जांच शुरू
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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
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  • धैर्य खो रहा विपक्षमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष राम गो¨वद चौधरी को पत्र लिखकर सही नसीहत दी है कि यदि वह कोरोना नियंत्रण मुहिम में जुटे तंत्र का मनोबल नहीं बढ़ा सकते तो कम से कम निर्थक आरोप लगाकर मनोबल गिराना तो नहीं चाहिए। आसार कम ही हैं कि चौधरी और अन्य विपक्षी नेता इस नसीहत का ध्यान रखेंगे, पर विपक्ष को याद रखना चाहिए कि कोरोना संकट वैश्विक आपदा है। इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, पर जहां तक इस आपदा से निपटने का सवाल है, योगी आदित्यनाथ के विजन, प्रबंधन और क्रियान्वयन की सराहना पूरी दुनिया में की जा रही है। उत्तर प्रदेश का भौगालिक और जनसांख्यिक विस्तार अधिकतर देशों से अधिक है। इतने बड़े भूभाग और जनसंख्या को कोरोना संकट से यथासंभव महफूज रखने का प्रबंधन आसान नहीं है। योगी सरकार ने बहुत व्यवस्थित तरीके से इसे करके दिखाया। मुख्यमंत्री की शायद यही उपलब्धि विपक्ष को बेचैन कर रही है। विपक्षी दल जिस तरह कभी श्रमिकों, तो कभी कोई अन्य सवाल उठाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं, उसे आम आदमी भी पसंद नहीं कर रहा होगा। वजह है कि केारोनाकाल में सरकार ने न सिर्फ अन्य राज्यों में फंसे छात्रों और श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई बल्कि लाखों परिवारों को खाना, राशन और पैसा भी पहुंचाया। बेशक इतने बड़े अभियान में कुछ गड़बड़ियां रह गई होंगी, कुछ लोग सहायता पाने से वंचित रह गए होंगे, पर ऐसी छोटी बातों को तूल देकर सरकार की पूरी कवायद को खारिज कर देना उचित नहीं है। कोरोना राजनीति नहीं बल्कि योगदान करने का विषय है। विपक्षी दलों को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए कि जिस अभियान में सरकार के अलावा छोटे-बड़े उद्यमी, व्यवसायी, दुकानदार, गरीब किसान, मजदूर, बच्चे, शिक्षक, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी और अन्य सामाजिक वर्गो के लोग अपनी स्थिति के हिसाब से योगदान कर रहे हैं, उसमें उन्होंने क्या योगदान किया? कोरोना संकट से घिरे लोगों से यह बात छिपी नहीं है कि कौन उनकी मदद कर रहा और कौन राजनीति। मौका मिलने पर लोग जवाब भी देंगे।
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  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
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  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
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  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
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  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीसंकट में बरतें संयम व सावधानी>>कोरोना वायरस ने पूरे विश्व के शक्तिशाली देशों को घुटनों पर लाकर रख दिया है। सारे देश मिलकर कोरोना वायरस से मुक्ति पाने में जुटी है और डॉक्टर्स, नर्सेज एकजुट होकर लड़ रहे है। उनकी जितनी भी सराहना की जाए कम होगी। नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कठोर कदम उठाये है जो हमारे देश की भलाई के लिए है और हम सभी को एक भारतीय होने के नाते उनका साथ देना चाहिए ताकि हम देश को रोगमुक्त कर सके। कोरोना वायरस के खिलाफ यह महायुद्ध तब तक जारी रहेगा, जब तक हम इस वायरस को जड़ से खत्म न कर दें। प्रधानमंत्री द्वारा औद्योगिक विकास एवं विदेशी निवेश के लिए उचित समय पर फैसला लेना एक सराहनीय एवं सकारात्मक कदम है। इस संकट में वायरस एवं अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए संयम बरतना होगा। मोहित यादव, फरुखाबादबंद होनी चाहिए शराबकोरोना महामारी से आज आम जनता वैसे ही बहुत परेशान है। ऐसे में शराब की दुकानों को खोल देने के आदेश से आम जनजीवन बहुत बुरे तरीके से प्रभावित होने की आशंका है। कमाई है नहीं, इस पर शराब का खर्चा कहीं एक और घरेलू हिंसा का कारण न बन जाये। शराब खरीदने के चक्कर मे लॉकडाउन का उल्लंघन भी धड़ल्ले से होगा, क्योंकि शराब की दुकानें दिनभर खुलेंगी। सड़कों पर दिनभर आवाजाही बनी रहेगी, कैसे रुकेंगे ये लोग! आज सब लोग मिलकर इस कोरोना से जंग लड़ रहे हैं, शहर के हालत वैसे भी ठीक नहीं है। ऐसे में शराब की दुकानों को खोल देने से महामारी की ये लड़ाई भी कमजोर हो जाएगी, इसके दूरगामी परिणाम बहुत खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसका नजारा पहले दिन खोले गए शराब के ठेकों में दिखाई दिया। शराब की दुकानों को खोलने का आदेश वापस लिया जाना चाहिए। प्रदीप निगम, कानपुर
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  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
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  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
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  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
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  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है
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  • 69000 शिक्षक भर्ती की उत्तर कुंजी जारी
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  • विवि व कॉलेजों में छह जुलाई से नया सत्र
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  • प्रवासी श्रमिकों को गौ आश्रय स्थलों से जोड़ें
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  • कोरोना मुक्ति की उम्मीद जगा रहा साल का पहला सूर्य ग्रहण
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  • वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का निधन
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  • रमजान में औरतों के सोशल अकाउंट में क्यों झांक रहे लोग : हसीन जहां
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  • कारखानों, मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को श्रम कानूनों से सशर्त छूट
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  • फीचर फोन वाले कोरोना मरीज भी नहीं दे पाएंगे सरकार को चकमा
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  • एचयूएल से बाहर हुई जीएसकेनई दिल्ली: ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन पीएलसी (जीएसके) ने हिंदुस्तान यूनीलिवर लिमिटेड (एचयूएल) में अपनी पूरी 5.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी है। इनका मूल्य करीब 25,480 करोड़ रुपये है। जीएसके को ये शेयर उसकी सहायक शाखा जीएसके इंडिया के एचयूएल में विलय के तहत मिले थे। जीएसके ने एक बयान में कहा कि उसने अपनी सहायक शाखा जीएसके पीटीई लिमिटेड और हॉíलक्स लिमिटेड के माध्यम से एचयूएल में 13.27 करोड़ साधारण शेयर 1,905 रुपये प्रति शेयर के भाव से बेच दिए हैं। अब एचयूएल में जीएसके की हिस्सेदारी नहीं है। (प्रेट्र)आर्सेलरमित्तल को 8,250 करोड़ रुपये का घाटानई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी आर्सेलरमित्तल को इस वर्ष की पहली तिमाही यानी जनवरी-मार्च, 2020 के दौरान 110 करोड़ डॉलर वर्तमान भाव पर करीब 8,250 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले वर्ष समान तिमाही में कंपनी को 25 करोड़ डॉलर 1,875 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। कंपनी के चेयरमैन व सीईओ लक्ष्मी निवास मित्तल ने कहा कि कोविड-19 के चलते दुनियाभर में कंपनी के कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। (प्रेट्र)
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  • देश बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा
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  • जापान ने मांगी कंपनियों के संचालन में मदद
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  • जियो प्लेटफॉर्म्स में फेसबुक के बाद एक और बड़ा निवेश
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  • राहत पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
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  • शेयर बाजारों को रिलायंस का दम
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  • सामुदायिक प्रसार को रोकने को एसिम्प्टोमैटिक लोगों की होगी जांच
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  • आचार्य की सींची सरस्वती को छूकर निकली थी ‘मधुशाला’
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  • हरिद्वार में गंगा में अस्थि विसर्जन की सशर्त अनुमति
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  • पंजाब में खेतों में जा गिरा मिग-29, पायलट सुरक्षित
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  • भले मर जाएं पर मुफ्तखोरी हमें मंजूर नहीं..
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  • आकाशवाणी व दूरदर्शन भी देंगे गिलगिट के मौसम की जानकारी
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  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा-31 अगस्त तक आए ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
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  • द. कोरिया में शुरू हुई फुटबॉल लीग
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  • कोरोना की टेस्टिंग पर दिया जा रहा जोर, पर किट पर खामोशी
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  • स्पेन में समुद्र तटों पर जाने की इजाजत
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