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  • जागरण विशेष भले मर जाएं पर मुफ्तखोरी मंजूर नहीं..
  • दैनिक जागरण फिर बना देश का नं. 1 अखबार
  • हरिद्वार में अस्थि के विसर्जन की अनुमति
  • लोगों के अनुपात में रसोई की संख्या बढ़ाएं : नीतीश
  • 12वीं की लंबित परीक्षाएं जुलाई में
  • बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा है देश: मैकेंजी
  • सरकार की सलाह, लोगों को कोरोना के साथ जीना होगा
  • पटना के पांच बीएमपी जवान सहित 29 और हुए संक्रमित
  • भारत ने ढेर किए चार पाकिस्तानी सैनिक
  • घर लौटते समय ट्रैक पर सो रहे 16 मजदूर ट्रेन से कटे
  • राजधानी में खुले बाजार पहले ही दिन पांच करोड़ रुपये का हुआ कारोबार
  • वेबसाइट पर पढ़े
  • चीन सीमा तक सड़क तैयार

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  • स्किल्ड कामगारों का बन रहा डाटा
  • 38 लाख लोगों को 10 जून तक मिलेगा राशन कार्ड
  • सीएम ने क्वारंटाइन सेंटर के इंतजाम के बारे में पूछा
  • इस्तीफे की मांग पर प्रेमचंद्र को संविधान पढ़ने की सलाह
  • बिहार में शिशु मृत्युदर में आई गिरावट: मंत्री
  • गरीब कल्याण पैकेज ने रचा इतिहास : संजय
  • डिप्टी सीएम ने 11 हजार कार्यकर्ताओं से की बात
  • दूसरे राज्यों से सैकड़ों लोगों ने किया संपर्क
  • अपने नेताओं से दूर हो गए हैं तेजस्वी : निखिलराज्य ब्यूरो, पटना : प्रदेश जदयू के प्रवक्ता निखिल मंडल ने शुक्रवार को कहा कि कुंठा और हताशा के प्रतीक बन चुके नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस आपदा की घड़ी में दिल्ली में आराम कर रहे हैं। वह विधायक, सांसद और पार्टी के पदाधिकारियों की पहुंच से दूर हो गए हैं। यही नहीं राजद के विधायकों से जनता का मिलना एक सपना हो चुका है। निखिल ने कहा कि तेजस्वी यादव के इस भगोड़ेपन की आदत के कारण अब लगता है कि ट्विटर, फेसबुक, टीवी व अखबार नहीं होता तो नेता प्रतिपक्ष का चेहरा बिहार की जनता अब तक भूल गयी होती।
  • गुजरात से 1220 यात्रियों को लेकर पहुंची पहली ट्रेन
  • पांच दिन में 13,473 विद्यार्थी आए
  • आरक्षण के सवाल पर साथ आए 22 विधायक
  • विदेश से आएंगे 2075 लोग गया में किए जाएंगे क्वारंटाइन
  • बिहार से हारेगा कोरोना
  • खबरें एक मिनट में
  • अगले हफ्ते और तेज होगी प्रवासियों के लौटने की रफ्तार
  • गोधरा की कंपनी ने भोजन, भाड़ा भी दिया

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  • संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा बोर्ड का निर्णय सही : हाईकोर्ट
  • बेसबॉल की नेशनल प्लेयर को हत्या की धमकी
  • इंतजार की आंच पर ‘राहत की दाल’
  • कोरोना मरीज स्वस्थ, अपार्टमेंट वाले हैं कैद
  • बाजार में बढ़ी भीड़, 40 दुकानें कराईं बंद
  • पकड़ने गए थे चोरों को, मिला 24 लाख का सोना
  • सीएम के खिलाफ पोस्ट करने वाले दो गिरफ्तार
  • शनिवार, ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया, वि.सं. 2077

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  • कैसे हुआ कोरोना, नहीं समझ पा रहे डॉक्टर
  • बीएमपी बना हॉटस्पॉट, सभी जवानों की होगी कोरोना जांच
  • पांच बच्चों समेत 11 स्वस्थ होकर लौटे घर
  • कोरोना को हराना है
  • पीएमसीएच को किट व सैनिटाइजर दिएजासं, पटना : पीएमसीएच के डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा के लिए ग्रामीण स्नेह फाउंडेशन ने शुक्रवार को भारी मात्र में पीपीई किट और हैंड सैनिटाइजर मुहैया कराए। फाउंडेशन के सदस्यों ने पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. विद्यापति चौधरी, अधीक्षक डॉ. बिमल कारक, ओएसडी प्राचार्य डॉ. कुमार अरुण, उपाधीक्षक डॉ. सीमा सिन्हा, मुख्य आकस्मिकी पदाधिकारी डॉ. अभिजीत सिंह, डॉ. दिनेश कुमार आदि उपस्थित थे।राहत केंद्रों पर 31 हजार को कराया गया भोजन : शहरी क्षेत्रों में संचालित सभी आपदा राहत केंद्रों पर शुक्रवार को 31433 गरीबों को भोजन कराया गया। 278 प्रवासी केंद्रों पर ठहरे हुए हैं।
  • सिर्फ छह लोगों से 234 हुए संक्रमित

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  • मालसलामी में दवा दुकान में लगी आग
  • ट्रैक्टर की ठोकर से पलटा रिक्शा छह साल के मासूम की मौत
  • मनेर में राशन की कम आपूर्ति को ले उपमुखिया व डीलर भिड़े
  • तीन लाख किसानों के खाते में सौ करोड़ रुपये ट्रांसफर
  • शराब तस्करी को लेकर दो पक्ष भिड़े, फायरिंग
  • सीडीपीओ के पुत्र को थप्पड़ मारने वाले की जल्द होगी पहचान
  • वृद्ध हत्याकांड में छोटी पहाड़ी के तीन आरोपित
  • बिक्रम में रोक के बावजूद हो रहा बालू का खनन, 15 वाहन जब्त
  • दो विवि में गड़बड़ी की जांच का आदेश

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  • चिड़ियाघर में आया नया मेहमान
  • मुंबई में फंसे कलाकार मदद की लगा रहे गुहार
  • अगर इस मुबारक मौके पर आप भी कुछ कहना-लिखना चाहते हैं, तो हमें ई-मेल करें- Aं¬ङ्घ्र38स्रं3.Aं¬1ंल्ल.ङ्घे। कृपया अपना एक अच्छा सा फोटो भी जरूर भेजें।
  • तू कितनी अच्छी है ..
  • सरस्वती को छूकर निकली थी ‘मधुशाला’
  • आइएसएम हर परिस्थिति में देगी बेहतर शिक्षा
  • एएन कॉलेज के छात्रों ने प्रवासी मजदूरों को किया जागरूक
  • ईद के लिए रखे पैसों से भूखों को खिलाएं खाना
  • सुधा का टॉफी फ्लेवर वाला शीतल पेय लांच
  • रवींद्र संगीत की प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध हुए कलाप्रेमी
  • ऑनलाइन पढ़ाई साबित हो रही हवा-हवाई
  • मासूम की जान बचाने को रोजा तोड़कर रक्तदान

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  • भूमि विवाद में तेजाब से हमला, दर्जनभर झुलसे
  • आरा जेल में पथराव के बाद 15 कैदी बक्सर शिफ्ट
  • नवादा में अंचलाधिकारी पर युवक ने किया हमला
  • प्रेमिका के स्वजनों ने प्रेमी को जमकर पीटा, मौत
  • किशनगंज को किया गया सील, कफ्यरू जैसे हालात

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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
  • सतर्क रहना जरूरी राज्य में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और विकास कार्यो को बढ़ावा देने के साथ रोजगार सृजन के लिए लॉकडाउन के नियमों में आंशिक छूट देना समय की मांग है, लेकिन इस दौरान अत्यधिक सतर्कता भी जरूरी है। कुछ क्षेत्रों में थोड़ी छूट के बाद लोग जिस तरह बेतहाशा घरों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, उससे कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। इसलिए जहां भी लॉकडाउन में ढील दी जा रही है, वहां प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतते हुए कोताही करने वालों से सख्ती से पेश आना होगा। लोगों को भी चाहिए कि आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलें। साथ ही शारीरिक दूरी, मास्क और साफ-सफाई का ख्याल रखें। यदि सरकार के दिशा-निर्देशों का सही से पालन नहीं किया गया तो स्थिति बेकाबू हो सकती है। इससे बचने के लिए आम लोगों का सहयोग जरूरी है, लेकिन बहुत से लोग ऐसा नहीं करके कोरोना संक्रमण के खतरे को बढ़ा रहे हैं। समझना होगा कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए किसी भी तरह की अफवाह या फिर गलत धारणा से बचते हुए सतर्क रहना जरूरी है। यह उचित और सुरक्षित व्यवस्था है कि प्रदेश के बाहर से लौट रहे प्रवासी तुरंत अपने घर नहीं जाएंगे। इन लोगों को भी चाहिए कि वे स्वेच्छा से अपनी जांच कराने के लिए आगे आएं और चिकित्सकों की निगरानी में निर्धारित समय तक क्वारंटाइन सेंटर में रहें। सरकार उनकी देखरेख के प्रति सजग और तत्पर है। सभी जिला अस्पतालों में कोरोना वायरस के नमूना संग्रह की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। प्रयास किया जाना चाहिए कि बाहर से आए अधिक से अधिक लोगों के नमूने लिए जाएं, ताकि कहीं पर कोरोना का एक भी संदिग्ध मरीज छूटने न पाए। कई लोग दूसरे प्रदेशों से चोरी-छिपे यहां पहुंच रहे हैं। वैसे लोग पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। उनकी तलाश में पुलिस लगातार परेशान है, लेकिन वे स्वेच्छा से सामने नहीं आ रहे। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस उन लोगों से क्वारंटाइन सेंटर जाने और जांच कराने का आग्रह करती है, तो वे सुनने को तैयार नहीं हैं। यह प्रवृत्ति घातक होने के साथ समस्या को बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। ऐसा कतई नहीं किया जाना चाहिए।
  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीसंवेदनहीनता से ही खतरे में मानवता चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना काल लंबा चलेगा या इसे यूं समङों के 2020 कोरोना ईयर के तौर पर जाना जाएगा। ऐसे में चार महीने के अनुभवों ने एहसास करा दिया कि हम संकट में भी मर्यादित व अनुशासित आचरण प्रदर्शित नहीं कर पाए। यह तो गनीमत मानिए कि हमारी सरकार की तत्परता के कारण अमेरिका और यूरोप जैसे भयावह स्थिति नहीं बन पाई जबकि उन देशों की जनसंख्या के स्वरूप व गुणवत्ता के मामले में हम कहीं नहीं ठहरते। इस संदर्भ में हमें भविष्य की रणनीति बनाते समय जनसंख्या के आकार और स्वरूप पर विचार करने ही होंगे। इसके लिए समुचित शिक्षा व्यवस्था, कारगर जनसंख्या नीति एवं नियोजित विकास पर एक साथ ध्यान देने की जरूरत है। हमारी संवेदनहीनता के कारण ही आज मानवता खतरे में है। इसी वजह से हम अपने अस्तित्व के सामने औरों अस्तित्व को स्वीकार नहीं कर पाते हैं। इसे व्यापक संदर्भ में देखे जाने की जरूरत है। मानव मानव के बीच ही नहीं अपितु हमारे आसपास समस्त जैव अजैव जगत के प्रति भी। इसमें शिक्षा व्यवस्था की अहम भूमिका हो सकती है। जो हमें संवेदनशील बनाए। सभी तरह की नकारात्मकता यहाँ तक कि धर्म के नकारात्मक प्रभाव से दूर रखे। संविधान व कानून के प्रति सम्मान का भाव जगाए। देशभक्ति की भावना जागृत रखे। इस संदर्भ में नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करते समय कोरोना संकट एवं उससे उत्पन्न परिस्थितियों का भी ख्याल रखना होगा, ताकि कम से कम संकट के समय धर्म, भाषा, क्षेत्र, जाति, नस्ल से परे हम देश, काल एवं परिस्थिति के अनुरूप व्यवहार करें हम सब। खैर फिलहाल सरकार द्वारा दिए गए गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करें हमलोग, अन्यथा यह कोरोना ईयर कहीं अगले साल तक न खींच जाए। हमें सरकार द्वारा जारी नियमों का अक्षरश: पालन करना चाहिए। किसी भी तरह की ढील का नाजायज फायदा नहीं उठाना चाहिए। मुकेश कुमार मनन, पटना
  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
  • संस्थापक-स्व. पूर्णचन्द्र गुप्त, पूर्व प्रधान सम्पादक-स्व.नरेन्द्र मोहन, सम्पादकीय निदेशक-महेन्द्र मोहन गुप्त, प्रधान सम्पादक-संजय गुप्त जागरण प्रकाशन लिमिटेड के लिये आनन्द त्रिपाठी द्वारा दैनिक जागरण प्रेस उ-5, उ-6 15 इंडस्ट्रियल एरिया, पाटलिपुत्र, पटना - 800013 से प्रकाशित एव मुद्रित, सम्पादक (बिहार/प.बंगाल) -प्रशांत मिश्र, स्थानीय सम्पादक-आलोक मिश्र* दूरभाष : 0612-2277071, 2277072, 2277073 ए.ें्र’ : स्रं3ल्लंस्रं3.Aं¬1ंल्ल.ङ्घे, फ.ठ.क. ठड. इककठ/2000/03097* इस अंक में प्रकाशित समस्त समाचारों के चयन एवं सम्पादन हेतु पी.आर.बी. एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी पटना जीपीओ रजि. नं.फ-10/ठढ-18/14-16 समस्त विवाद पटना न्यायालय के अधीन ही होंगे। वर्ष 21 अंक 27
  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है

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  • मां की छांव में

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  • द. कोरिया में शुरू हुई फुटबॉल लीग
  • सरकार ने उधारी लक्ष्य 12 लाख करोड़ रुपये किया
  • लॉकडाउन में दिखा दी कोयले की ढुलाई, जीएसटी टीम का छापा
  • पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
  • कंपनियों के संचालन में जापान ने मांगी मदद
  • शेयर बाजारों को मिला रिलायंस का दम
  • रितिक की मुरीद हैं सारा अली खान
  • डेयरी किसानों के लिए पैकेज पर हो रहा विचार
  • संस्थाओं को फिलहाल पंजीकरण से छूट
  • भारत की पहली जीत
  • बत्र का कार्यकाल बढ़ा
  • भारतीय टीम के क्वारंटाइन के लिए तैयार बीसीसीआइ
  • .. जियो प्लेटफॉर्म्स में एक और बड़ा निवेश

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  • कोरोना तेरा नाश हो ! तू पंकज को ले गया
  • कर्नाटक सरकार की ओर से विशेष ट्रेन की सेवा दोबारा शुरू करने के बाद शुक्रवार को बेंगलुरु के केआर मार्केट में प्रवासी कामगारों का हुजूम उमड़ पड़ा। ’ प्रेट्र
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा-31 अगस्त तक आए विवादित ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
  • हरियाणा में तीस मुस्लिम परिवारों ने की हंिदूू धर्म में वापसी
  • फीचर फोन वाले कोरोना मरीज भी नहीं दे पाएंगे सरकार को चकमा
  • चीन सीमा तक सड़क तैयार, कैलास मानसरोवर यात्र हुई आसान
  • चीन पर हर्जाने का दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
  • मई में किफायती पेपर किट से शुरू हो जाएगी जांच
  • महाराष्ट्र से पैदल ही बड़ी संख्या में पलायन कर रहे मजदूर
  • वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का निधन
  • महाराष्ट्र में लगातार तीसरे दिन एक हजार से ज्यादा नए मामले
  • पैकेज में हुई देरी तो बेरोजगारी की आएगी सुनामी

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  • स्पेन में समुद्र तटों पर जाने की इजाजत
  • विश्व बैंक ने अपना पहला ऋण फ्रांस को दियावैश्विक वित्तीय संस्था विश्व बैंक ने पहला ऋण 1947 में फ्रांस को दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फ्रांस ने 50 करोड़ डॉलर का कर्ज मांगा था। हालांकि विश्व बैंक ने 25 करोड़ डॉलर का ऋण स्वीकृत किया।
  • भले मर जाएं पर मुफ्तखोरी हमें मंजूर नहीं
  • वैदिक मंत्रों से गूंजा व्हाइट हाउस
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी फिल्म ‘लक्ष्मी बॉम्ब’
  • संक्रमण के तीसरे दिन सूंघने की शक्ति खो सकता है रोगी
  • द्वितीय विश्व युद्ध के अंत की 75वीं वर्षगांठ
  • भारतवंशी डॉक्टर पिता पुत्री की कोरोना से मौत
  • वुहान मार्केट की कोरोना वायरस के प्रसार में रही भूमिका: डब्ल्यूएचओ
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