Close
All City Editions
Close
Close

You have limited access to jagran epaper
on your device.

More from Front Page

  • मरीजों को बचाना सरकार की प्राथमिकता
  • पेपर किट से शुरू हो जाएगी कोरोना जांच
  • मालगाड़ी से कटे 16 प्रवासी कामगार
  • एक से 15 जुलाई के बीच होंगी 12वीं की सीबीएसई परीक्षाएं
  • अब नई सड़क से चीन सीमा तक सीधे पहुंच जाएगी भारतीय सेना
  • देश बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा
  • हिमाचल में लुभा रही निर्मल नदियों की सुखद कल-कल शिमला : पहाड़ी क्षेत्रों से बहने वाली नदियां मैदानों में भी खुल के सांस लेने लगी हैं। इनमें घुल्य ऑक्सीजन की मात्र बढ़ गई है, प्रदूषण बहुत कम हो गया है। अब पहाड़ों जैसा शुद्ध पानी ही मैदानों में बह रहा है। ’पेज 11
  • 24 घंटे में स्वस्थ्य हुए 49 कोरोना पॉजिटिव
  • और तीन जिलों में पहुंचा कोरोना, 24 नए संक्रमित
  • जागरण फिर बना देश का नं. 1 अखबार
  • नालंदा में फूल तोड़ने के विवाद में मारपीट, बुजुर्ग की मौत
  • खाली स्टेडियम में जादुई माहौल की कमी खलेगी: कोहली

More from Front Page

  • बिहार से हारेगा कोरोना
  • खबरें एक मिनट में
  • सात अभियंताओं को नोटिस जारी
  • क्वारंटाइन सेंटर पर ही स्किल्ड कामगारों का बन रहा डाटा बैंक
  • अगले हफ्ते और तेज होगी प्रवासी बिहारियों के लौटने की रफ्तार
  • विदेश से आएंगे 2075 लोग, गया में सभी किए जाएंगे क्वारंटाइन
  • दलीय सीमाएं टूटी, आरक्षण के सवाल पर साथ आए 22 विधायक
  • तीन लाख किसानों को दिए गए सौ करोड़ रुपये
  • गैर कृषि कार्य वाले कस्बे भी बनेंगे नगर पंचायत
  • नहीं चलेगी नगर निकायों की मनमानी, नियमावली में बदलाव

More from Front Page

  • शनिवार, ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया, वि.सं. 2077
  • ईद के लिए रखे पैसों से भूखों को खिलाएं खाना
  • भू-जलस्तर के लिए संजीवनी साबित हो रही बेमौसम बरसात
  • डीएम ने कराय बीडीओ को किया शोकॉज
  • आरा से भटककर आए अधेड़ को पुलिस ने भीड़ से बचाकर भेजा घर
  • अखबार वितरकों ने पिटाई के विरोध में एसपी को दिया आवेदन
  • 56 कारतूस व राइफल समेत दो गिरफ्तार
  • डेढ़ लाख में बस भाड़ा कर वारंगल से आए 30 कामगार
  • करायपरशुराय के कार्यक्रम पदाधिकारी एक माह से गायब
  • सात दिनों बाद अस्थावां में मिला एक कोरोना पॉजिटिव
  • आज ऑनलाइन होंगे देश भर के ज्योतिषी
  • फूल तोड़ने के विवाद में बुजुर्ग की हत्या
  • था तुङो गुरूर खुद के लंबे होने का ऐ सड़क मैंने हौसले से तुङो साइकिल से नाप दिया

More from Front Page

  • बकाया पैसा मांगने पर महिला को पीटा
  • नये राशन कार्ड को 36 हजार आवेदनों की इंट्री
  • आरएसएस स्वयंसेवकों ने किया रक्तदान
  • खड़े ट्रक में मारी ठोकर चालक की हालत जख्मी
  • ताली बजाकर कोरोना वारियर्स का सम्मान
  • सीकर में फंसे 10 साल के छात्र की मां का बुरा हाल
  • बिना बैंड-बाजा सात फेरे लेने पहुंचा दुल्हा
  • डीटीओ का चालक दुर्घटना में घायल
  • शर्तों के साथ आज से राजगीर में खुलेंगी कुछ दुकानें
  • रास्ते पर शौचालय की टंकी निर्माण पर जताया एतराज
  • क्वारंटाइन लोगों को पिला रहे काढ़ा, सीखा रहे योग
  • लॉकडाउन में ढील के बाद चहल-पहल बढ़ी

More from Front Page

  • ताकि सुरक्षित रहे जीवन, चलती रहे जीविका
  • सुपौल में पूर्व पैक्स अध्यक्ष पर जानलेवा हमला, भांजे की मौत
  • आपसी वर्चस्व को लेकर नवटोलिया में हुई गोलीबारी
  • क्वारंटाइन सेंटर में पुलिस ने भांजी लाठी
  • औराई में सीएसपी संचालक से 4.15 लाख रुपये की लूट
  • मासूम की जान बचाने को रोजा तोड़कर रक्तदान
  • पांच बच्चों समेत 11 लोग स्वस्थ होकर लौटे घर
  • समस्तीपुर में भूमि विवाद को ले तेजाब से हमला, दर्जनभर झुलसे

More from Front Page

  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है? आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
  • सतर्क रहना जरूरी राज्य में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और विकास कार्यो को बढ़ावा देने के साथ रोजगार सृजन के लिए लॉकडाउन के नियमों में आंशिक छूट देना समय की मांग है, लेकिन इस दौरान अत्यधिक सतर्कता भी जरूरी है। कुछ क्षेत्रों में थोड़ी छूट के बाद लोग जिस तरह बेतहाशा घरों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, उससे कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। इसलिए जहां भी लॉकडाउन में ढील दी जा रही है, वहां प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतते हुए कोताही करने वालों से सख्ती से पेश आना होगा। लोगों को भी चाहिए कि आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलें। साथ ही शारीरिक दूरी, मास्क और साफ-सफाई का ख्याल रखें। यदि सरकार के दिशा-निर्देशों का सही से पालन नहीं किया गया तो स्थिति बेकाबू हो सकती है। इससे बचने के लिए आम लोगों का सहयोग जरूरी है, लेकिन बहुत से लोग ऐसा नहीं करके कोरोना संक्रमण के खतरे को बढ़ा रहे हैं। समझना होगा कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए किसी भी तरह की अफवाह या फिर गलत धारणा से बचते हुए सतर्क रहना जरूरी है। यह उचित और सुरक्षित व्यवस्था है कि प्रदेश के बाहर से लौट रहे प्रवासी तुरंत अपने घर नहीं जाएंगे। इन लोगों को भी चाहिए कि वे स्वेच्छा से अपनी जांच कराने के लिए आगे आएं और चिकित्सकों की निगरानी में निर्धारित समय तक क्वारंटाइन सेंटर में रहें। सरकार उनकी देखरेख के प्रति सजग और तत्पर है। सभी जिला अस्पतालों में कोरोना वायरस के नमूना संग्रह की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। प्रयास किया जाना चाहिए कि बाहर से आए अधिक से अधिक लोगों के नमूने लिए जाएं, ताकि कहीं पर कोरोना का एक भी संदिग्ध मरीज छूटने न पाए। कई लोग दूसरे प्रदेशों से चोरी-छिपे यहां पहुंच रहे हैं। वैसे लोग पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। उनकी तलाश में पुलिस लगातार परेशान है, लेकिन वे स्वेच्छा से सामने नहीं आ रहे। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस उन लोगों से क्वारंटाइन सेंटर जाने और जांच कराने का आग्रह करती है, तो वे सुनने को तैयार नहीं हैं। यह प्रवृत्ति घातक होने के साथ समस्या को बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। ऐसा कतई नहीं किया जाना चाहिए।
  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
  • उज्‍जवल भविष्य की कामनाबना रहे सामूहिकता का भाव शीर्षक लेख में डॉ. विजय अग्रवाल ने कोरोना वायरस तथा उसके प्रभाव स्वरूप उपजाई जा रही नकारात्मक स्थितियों का आकलन किया है। हमें यह समझना होगा कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज का अंत, उपन्यास का अंत, लेखक की मृत्यु, इतिहास का अंत अथवा ईश्वर की मृत्यु जैसी घोषणाएं निराशा से आक्रांत पाश्चात्य जगत में ही अधिक सामने आई हैं। भारतीय चिंतन तो सृष्टि के प्रत्येक जीव में सामूहिकता की भावना मानता है। सामूहिकता केवल एक भाव अथवा आवश्यकता ही नहीं है, यह एक सकारात्मक ऊर्जा है जिसके सहारे मानवता यहां तक पहुंची है। वैदिक चिंतन से अनुप्राणित भारत के प्रत्येक नागरिक के डीएनए में ही सामूहिकता है। यह जीवन की एक संरचना मात्र नहीं है, अपितु अपने आप में जीवन ही है। ऋग्वेद का अंतिम सूक्त सामूहिकता का आह्वान करता है-‘सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनासि जानताम्।’ कोरोना संकट स्थाई नहीं है। मानवता ने ऐसे अनेक संकट देखे हैं, उन पर विजय पाई है। गिरिधर के शब्दों में कहें तो-‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय’ से प्रेरणा लेकर सुखद एवं उच्च्वल भविष्य की कामना करें।डॉ. वेदप्रकाश, हंसराज कॉलेज, दिल्लीसंवेदनहीनता से ही खतरे में मानवता चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना काल लंबा चलेगा या इसे यूं समङों के 2020 कोरोना ईयर के तौर पर जाना जाएगा। ऐसे में चार महीने के अनुभवों ने एहसास करा दिया कि हम संकट में भी मर्यादित व अनुशासित आचरण प्रदर्शित नहीं कर पाए। यह तो गनीमत मानिए कि हमारी सरकार की तत्परता के कारण अमेरिका और यूरोप जैसे भयावह स्थिति नहीं बन पाई जबकि उन देशों की जनसंख्या के स्वरूप व गुणवत्ता के मामले में हम कहीं नहीं ठहरते। इस संदर्भ में हमें भविष्य की रणनीति बनाते समय जनसंख्या के आकार और स्वरूप पर विचार करने ही होंगे। इसके लिए समुचित शिक्षा व्यवस्था, कारगर जनसंख्या नीति एवं नियोजित विकास पर एक साथ ध्यान देने की जरूरत है। हमारी संवेदनहीनता के कारण ही आज मानवता खतरे में है। इसी वजह से हम अपने अस्तित्व के सामने औरों अस्तित्व को स्वीकार नहीं कर पाते हैं। इसे व्यापक संदर्भ में देखे जाने की जरूरत है। मानव मानव के बीच ही नहीं अपितु हमारे आसपास समस्त जैव अजैव जगत के प्रति भी। इसमें शिक्षा व्यवस्था की अहम भूमिका हो सकती है। जो हमें संवेदनशील बनाए। सभी तरह की नकारात्मकता यहाँ तक कि धर्म के नकारात्मक प्रभाव से दूर रखे। संविधान व कानून के प्रति सम्मान का भाव जगाए। देशभक्ति की भावना जागृत रखे। इस संदर्भ में नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करते समय कोरोना संकट एवं उससे उत्पन्न परिस्थितियों का भी ख्याल रखना होगा, ताकि कम से कम संकट के समय धर्म, भाषा, क्षेत्र, जाति, नस्ल से परे हम देश, काल एवं परिस्थिति के अनुरूप व्यवहार करें हम सब। खैर फिलहाल सरकार द्वारा दिए गए गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करें हमलोग, अन्यथा यह कोरोना ईयर कहीं अगले साल तक न खींच जाए। हमें सरकार द्वारा जारी नियमों का अक्षरश: पालन करना चाहिए। किसी भी तरह की ढील का नाजायज फायदा नहीं उठाना चाहिए। मुकेश कुमार मनन, पटना
  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
  • शनिवार, 9 मई, 2020: ज्येष्ठ कृष्ण 2 वि. 2077
  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
  • संस्थापक-स्व. पूर्णचन्द्र गुप्त, पूर्व प्रधान सम्पादक-स्व.नरेन्द्र मोहन, सम्पादकीय निदेशक-महेन्द्र मोहन गुप्त, प्रधान सम्पादक-संजय गुप्त जागरण प्रकाशन लिमिटेड के लिये आनन्द त्रिपाठी द्वारा दैनिक जागरण प्रेस उ-5, उ-6 15 इंडस्ट्रियल एरिया, पाटलिपुत्र, पटना - 800013 से प्रकाशित एव मुद्रित, सम्पादक (बिहार/प.बंगाल) -प्रशांत मिश्र, स्थानीय सम्पादक-आलोक मिश्र* दूरभाष : 0612-2277071, 2277072, 2277073 ए.ें्र’ : स्रं3ल्लंस्रं3.Aं¬1ंल्ल.ङ्घे, फ.ठ.क. ठड. इककठ/2000/03097* इस अंक में प्रकाशित समस्त समाचारों के चयन एवं सम्पादन हेतु पी.आर.बी. एक्ट के अंतर्गत उत्तरदायी पटना जीपीओ रजि. नं.फ-10/ठढ-18/14-16 समस्त विवाद पटना न्यायालय के अधीन ही होंगे। वर्ष 21 अंक 27
  • आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनें मजदूर
  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है

More from Front Page

  • मां की छांव में

More from Front Page

More from Front Page

  • डेयरी किसानों के लिए पैकेज पर हो रहा विचार
  • गिफ्ट सिटी में रुपया-डॉलर का वायदा कारोबार शुरू
  • जियो प्लेटाफॉर्म्स में 11,367 करोड़ रुपये का एक और बड़ा निवेश
  • चीन में स्थित अमेरिकी कंपनियों को लुभाने में जुट गया है भारत
  • नई दिल्ली, एएनआइ : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सíवसेज सेंटर में दो अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर रुपया-डॉलर में वायदा कारोबार को हरी झंडी दिखाई। ये दोनों एक्सचेंज बीएसई इंडिया आइएनएक्स व एनएसई-आइएफएससी हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पिछले एक दशक के दौरान भारत से संबंधित वित्तीय सेवा कारोबार का एक बड़ा विदेशी बाजारों में चला गया है। इन दोनों एक्सचेंजों पर यह शुरुआत उन्हीं कारोबारों को भारत वापस लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
  • सेंसेक्स इंट्रा-डे में 645.13 अंक चढ़ने के बाद बढ़त बरकरार नहीं रख पाया, सबसे ज्यादा 4.81 प्रतिशत की बढ़त एचयूएल के शेयरों में दर्ज
  • पैकेज के इंतजार में टूट रहा सब्र
  • पुराना स्टॉक निकालने के लिए ऑफर की भरमार
  • इकोनॉमी की रिकवरी तय: निर्मला सीतारमण
  • शेयर बाजारों को मिला रिलायंस का दम, लौटी तेजी

More from Front Page

  • द. कोरिया में शुरू हुई फुटबॉल लीग
  • यहां कोरोना वायरस का पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन
  • उप्र में 69000 शिक्षक भर्ती की उत्तरकुंजी जारी, रिजल्ट में टालमटोल
  • मास्क के संपर्क में आते ही वायरस-बैक्टीरिया का हो जाएगा खात्मा
  • भारतीय टीम के क्वारंटाइन के लिए तैयार बीसीसीआइ
  • टैगोर के जन्मदिवस पर ममता बनर्जी के लिखे ‘कोरोना गीत’ गाने के आदेश को लेकर हंगामा
  • भारतीय महिला अंडर-17 फुटबॉल टीम की फिटनेस बेहतर : कोच

More from Front Page

  • उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में कामगारों का हंगामा
  • कोविड-19 से मुकाबले के लिए दो दवाओं के ट्रायल को मंजूरी
  • पंजाब में खेतों में जा गिरा मिग-29, पायलट सुरक्षित
  • कोरोना तेरा नाश हो ! तू पंकज को ले गया
  • हरियाणा में तीस मुस्लिम परिवारों ने की हंिदूू धर्म में वापसी
  • महाराष्ट्र में लगातार तीसरे दिन एक हजार से ज्यादा नए मामले
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा-31 अगस्त तक आए विवादित ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
  • एनजीटी ने एलजी पॉलीमर्स पर ठोका 50 करोड़ जुर्माना
  • चीन पर हर्जाने का दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
  • हिमाचल में लुभा रही निर्मल नदियों की सुखद कल-कल
  • आर्थिक संकट के बावजूद समाचार पत्रों की हरसंभव मदद करेंगे: बघेल

More from Front Page

  • स्वच्छता की आदतों से आधा हो सकता है संक्रमण का खतरा
  • किम ने चिन¨फग को कोरोना पर जीत का भेजा बधाई संदेश
  • चीन में बेटे ने मां को जिंदा दफनाया, तीन दिन बाद बचाया गया
  • पाकिस्तान ने जब्त की अफगान तालिबान प्रमुख की संपत्ति
  • द. कोरिया में 25 नए मामले सामने आए
  • अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री कोरोना वायरस की चपेट में
  • विश्व बैंक ने अपना पहला ऋण फ्रांस को दियावैश्विक वित्तीय संस्था विश्व बैंक ने पहला ऋण 1947 में फ्रांस को दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फ्रांस ने 50 करोड़ डॉलर का कर्ज मांगा था। हालांकि विश्व बैंक ने 25 करोड़ डॉलर का ऋण स्वीकृत किया।
  • स्पेन में समुद्र तटों पर जाने की मिली इजाजत
  • चीन से कोई बड़ी गलती हुई या फिर वह अक्षम है: राष्ट्रपति ट्रंप
  • वैदिक मंत्रों से गूंजा व्हाइट हाउस
  • कोरोना से फैल रही नफरत की सुनामी पर यूएन ने जताई चिंता
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
If text is not readable, Kindly click on download to read newspaper.
ePaper Thumbnail