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More from Front Page

  • सरकार ने कहा-कोरोना के साथ जीना होगा
  • दैनिक जागरण फिर बना देश का नं. 1 अखबार
  • सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं एक जुलाई से
  • संयुक्त अरब अमीरात में फंसी एक गर्भवती भारतीय महिला को लेकर एयर इंडिया एक्सप्रेस का विशेष विमान शुक्रवार को कोङिाकोड के कालीकट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा ’ जागरण
  • हिमाचल में चार नए मामले, चंबा में दो साल की बच्ची भी पॉजिटिव
  • शराब महंगी, भर्तियों पर अस्थायी रोक
  • औरंगाबाद में ट्रैक पर सोए 16 मजदूर ट्रेन से कटे
  • कैलास मानसरोवर यात्र सुगम, चीन सीमा तक पहुंच
  • 0939093ा092ए093ए091अ0932 * * *मूल्य ै 5.00पृष्ठ 8+4=12

More from Front Page

  • शिमला में अन्य जिलों व राज्यों से नहीं आ सकेंगे
  • खुले में शौच करने पर घुसा दी बोतल
  • अचानक मंडियां बंद होने से आढ़तियों को लग रहा झटका
  • ऊना में पारा 37.8 डिग्री, आज फिर बारिश की आशंका
  • हिमाचलियों को वापस भेजने में आनाकानी कर रहे राज्य
  • डीसी के फोन करते ही पहुंच गया राशन व तेल
  • डॉ. रजनीश पठानिया होंगे आइजीएमसी के नए प्रिंसिपल
  • कफ्यरू में बढ़े ऑनलाइन ठगी के

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  • बिना अंगुली लगाए ही मिलेगा राशन, सरकार ने बदला फैसला
  • इस साल नियुक्तियों के दरवाजे बंद
  • छह अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस
  • धर्मशाला, 9 092ए0908 2020
  • तू कितनी अच्छी है ..
  • पर्यटन निगम के होटलों से मंगवाएं पसंदीदा व्यंजन
  • कोरोना संक्रमित युवक के शव को जलाने की हो उच्चस्तरीय जांच
  • दसवीं और जमा दो के छात्रों को मिलेंगे ग्रेस मास्र्क
  • कफ्यरू उल्लंघन के मामले साढ़े पंद्रह सौ पार

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  • उपेक्षा का दुष्परिणाममहाराष्ट्र के औरंगाबाद में पैदल अपने घर जाने को निकले मजदूरों की मालगाड़ी से कुचल कर मौत मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला हादसा है। यह हादसा केवल इसलिए नहीं हुआ कि थके-हारे मजदूरों ने रेल पटरियों पर सोने की गलती की, बल्कि इसलिए भी हुआ कि कोई यह देखने-सुनने वाला नहीं था कि आखिर वे पैदल सफर करने को क्यों मजबूर हुए? किसी को उन्हें पैदल जाते देखकर रोकना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। यह संभव नहीं कि महाराष्ट्र के शासन-प्रशासन के लोगों ने इन अभागे मजदूरों को पैदल जाते देखा न हो। साधनहीन मजदूरों की दीन दशा देखकर भी उनकी अनदेखी करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन कारणों की तह तक जाने की जरूरत है जिनके चलते श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की घोषणा के बाद भी मजदूर पैदल ही अपने गांव-घर के लिए निकल ले रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में रह रहे मजदूर ही पैदल अपने गावों के लिए कूच कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि अन्य राज्यों में रह रहे कामगार भी ऐसा करने को मजबूर हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने की जो व्यवस्था की गई है उसमें कोई खोट है?आखिर क्या कारण है कि आए दिन ऐसे समाचार आ रहे हैं कि प्रमुख औद्योगिक शहरों में रह रहे मजदूर अपने गांव जाने की मांग को लेकर सड़कों पर निकल आ रहे हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि कुछ राज्य बाहरी मजदूरों से रुकने का आग्रह कर रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा कि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उनके खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाए। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि अनेक स्थानों पर यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं। यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि जिन भी राज्यों से मजदूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल ले रहे हैं उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। आखिर जब देश के कई हिस्सों से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि मजदूर कोई साधन-सवारी न मिलने पर पैदल ही रास्ता नाप रहे हैं तब फिर संबंधित राज्य सरकारों को अपने जिला प्रशासन को ऐसे आदेश-निर्देश जारी करने में क्या कठिनाई है कि वे जहां भी पैदल जाते दिखें उन्हें रोककर उचित तरीके से उनके शहर भिजवाने की व्यवस्था की जाए? यह सही है कि अनिश्चित भविष्य को देखते हुए मजदूर अपने गांव-घर जाने को लेकर बेचैन हो रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बेचैनी की एक वजह उनकी उपेक्षा भी है। यह उपेक्षा यही बताती है कि राज्य सरकारें अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
  • गिनती बढ़ती जा रही दिखे न कोई राह,देखि मौत के आंकड़े मुंह से निकले आह! मुंह से निकले आह नहीं कुछ भी कहि जाए, यह संकट का दौर हमें भगवान बचाए।रहें घरों में लोग यही है सबसे विनती,वरना मुश्किल और होयगी करना गिनती।- ओमप्रकाश तिवारी
  • जन-जागरणप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मनुष्य अपने को सर्वज्ञानी, सर्वश्रेष्ठ, अपराजित मानने का भ्रम पालने लगता है। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश एवं अग्नि को भी अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं छोड़ता। अपनी-अपनी इच्छाओं एवं सामथ्र्य के अनुरूप प्रगति के अंतहीन अंत की ओर निरंतर अग्रसर होने की होड़ में लगा रहता है, परंतु मानव की सब कुछ पा लेने की भूख कभी-कभी किस प्रकार धराशायी होने लगती है, यह हमने आज जाना है।संसार में प्रलय आने में देर नहीं लगती। वह कोरोना के रूप में हो या विश्व युद्ध। हालांकि यह भी सच है कि आज इस वैश्विक मार को सहते हुए इंसानों ने कई सकारात्मक परिवर्तनों को भी अपना लिया है जो उनके जीवन जीने की शैली बनती जा रही है। यदि हम आगे भी इसी जीवनशैली का पालन करते रहे तो जीवन निश्चित रूप से अधिक अर्थपूर्ण होगा। यहां तक कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए एक नवीन जग-जागरण का उदय हुआ है। आज यह समझ में आया है कि हर समस्या का हल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है। कुछ समस्याओं से पार पाने के लिए एक-एक के योगदान का होना अनिवार्य है। ऐसा जन-जागरण न कभी देखा, न सुना जब संपूर्ण समाज स्वेच्छा से एक ध्येय को लेकर आगे बढ़े। कोरोना से इस जंग में हर व्यक्ति अपने आप में एक योद्धा है। सभी ने अपरिमित संयम, अनुशासन का परिचय दिया है।इतनी बड़ी आपदा ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कहां समय था कि हम नीले आकाश को निहारते, पास के गांव में मोर नाचता है, यह जान पाते। जन-जागरण हुआ अपनी आकांक्षाओं पर नियंत्रण पाने का, प्रदूषण के मूल कारण को पहचानने का। प्रकृति के साथ सीमा से अधिक खिलवाड़ हमारे विनाश का कारण बन सकता है। इस भयावह स्थिति से निकल सामान्य जीवन को पटरी पर लाने के लिए वर्तमान जन-जागरण की ऊर्जा व्यर्थ न जाए, यही संकल्प लिए सुंदर भविष्य की ओर अग्रसर हों।छाया श्रीवास्तव
  • जीवनशैली में लाएं बदलावकोरोना वायरस विश्वभर में फैल चुका है। इस वायरस के खात्मे के लिए अभी दवा नहीं बनी है लेकिन इससे जंग लड़ने के लिए कई लोग मुस्तैदी से मोर्चे पर डटे हुए हैं। कोरोना वायरस से बचाव के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। ये प्रयास तभी सफल होंगे जब हम खुद को बदलेंगे। कोरोना से बचाव के लिए जरूरी है कि लोग अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं। योग, व्यायाम, कड़ी मेहनत और उर्वरकों व कीटनाशकों के बिना संतुलित आहार हमें अपनाना होगा। हमें जंगलों और पानी को बचाना होगा। हमारी नदियों व नालों को साफ करना होगा। कोरोना वायरस के संकट की इस घड़ी में यदि एक रास्ता बंद हो गया है कई रास्ते खुल भी गए हैं। हमें अन्य तरीकों की तलाश करनी होगी। अन्य देशों विशेष रूप से चीन पर निर्भरता कम करें। दूसरे देश अपने व्यापारिक लाभ देखते हैं। इसलिए कड़ी मेहनत करें और दुनिया को स्पष्ट संकेत दें। संस्कृति, पर्यावरण और देश को बचाना सिर्फ सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए हम सबको आगे आकर प्रयास करना होगा।-नरेंद्र कुमार, गांव भुजड़ू, डाकघर भराड़ू (जोगेंद्रनगर)दिशानिर्देशों का करें पालनकोरोना वायरस का संक्रमण और न फैले, इसके लिए हिमाचल प्रदेश में इन दिनों कफ्यरू लागू है। कोरोना से बचने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, यह भी सच है कि कोरोना से डरना नहीं चाहिए बल्कि इसका सतर्क रहकर व जागरूक होकर मुकाबला करना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि लोग अब परिस्थिति के मुताबिक खुद में बदलाव लाएं। लोग घर से बाहर तभी निकलें जब उन्हें कोई बहुत जरूरी कार्य हो। कफ्यरू में ढील के दौरान यदि उन्हें बाजार खरीदारी करने के लिए जाना हो तो मास्क जरूर पहनें। बिना मास्क पहने घर से बाहर जाना खतरनाक साबित हो सकता है। घर से बाहर जब भी निकलें तो दूसरे लोगों से शारीरिक दूरी बनाए रखने का नियम न भूलें। कोरोना वायरस से बचाव के लिए यह अति आवश्यक है कि दूसरे लोगों से शारीरिक दूरी बनाकर रखी जाए। लोगों को अपनी दिनचर्या में बदलाव लाना होगा। हमें रोजाना घर से निकलते हुए सैनिटाइजर का प्रयोग करना होगा। घर पहुंचने पर भी सबसे पहले सैनिटाइजर का प्रयोग करें। बार-बार हाथ धोएं। यदि हम इसी तरह से एहतियात बरतेंगे, तभी कोरोना वायरस से बचाव हो सकेगा। सभी लोगों को चाहिए कि वे कोरोना से बचने के लिए सरकार व प्रशासन की ओर से इस संबंध में जारी किए जाने वाले दिशानिर्देशों का पालन करें। लोग कफ्यरू के दौरान बिना वजह घर से न निकलें। ऐसा करने पर आपके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लॉकडाउन के कारण हिमाचल प्रदेश के हजारों लोग अन्य राज्यों में फंस गए थे। इनमें से कई लोगों को प्रदेश में लाया गया है। प्रदेश में इन दिनों ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जिनमें बाहर से आए कुछ लोग क्वारंटाइन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसा करना उचित नहीं है। यह सही है कि क्वारंटाइन के नियमों को तोड़ने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है मगर जरूरत यह है कि लोग नियम न तोड़ें। होम क्वारंटाइन किए गए लोगों की जरा सी लापरवाही उनके अलावा स्वजनों व दूसरे लोगों की जान को जोखिम में डाल सकती है। ऐसे लोग नियमों को तोड़कर अपने व पूरे परिवार के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। लोगों को यह बात समझनी चाहिए कि यदि उन्हें क्वारंटाइन किया गया है तो ऐसा सोच समझकर ही किया गया है। इसलिए जो भी लोग क्वारंटाइन में हैं, उन्हें इसका ईमानदारी से पालन करना चाहिए। कोरोना वायरस से जंग तभी जीती जा सकती है, जब सब लोग सहयोग करेंगे।-¨पकू ठाकुर, कुल्लू
  • भारत को नीचा दिखाने वाला सर्वेक्षण
  • असफलता सफलता की ट्यूशन फीस है
  • कोरोना के सबकप्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना हर व्यक्ति का दायित्व है। आधुनिकीकरण की होड़ में इन्सान ने प्रकृति से खूब खिलवाड़ किया है। जल, जंगल व जमीन से खूब छेड़छाड़ हुई है। प्रकृति समय-समय पर चेताती भी रही लेकिन इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसका खामियाजा भी आपदाओं के रूप में लोग ङोलते भी रहे हैं। अब वैश्विक महामारी कोरोना के कारण पूरा विश्व परेशान है। वायरस के कारण लाखों लोगों की मौत हो चुकी है जबकि सैकड़ों लोग इसकी चपेट में हैं। भारत में भी पचास हजार से अधिक लोग को इस वायरस से संक्रमित हैं और डेढ हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश को भी महामारी ने जख्म दिए हैं। हर आपदा लोगों को कई सबक भी सिखाती है, जरूरत है कि इन पर अमल करने की। कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन है जबकि हिमाचल में कफ्यरू लगाया गया है। इस दौरान हर तरह की गतिविधियां बंद हैं। इससे वातावरण में सुधार आया है। हवा में प्रदूषण की मात्र सामान्य से बहुत कम हो गई है। यहां की नदियों का पानी निर्मल हो गया है। सोलन जिला के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला से निकलने वाली सरसा नदी का पानी काला हो चुका था जो अब निर्मल हो गया है। ऐसा सिर्फ एक नदी में नहीं हुआ है बल्कि प्रदेश की सभी नदियों का पानी स्वच्छ हो गया है। जैसा पानी इन नदियों के उद्गम स्थानों पर होता है वैसा ही पानी मैदानों में है। इसका एक कारण शहरों में गंदगी न होना और औद्योगिक गतिविधियां बंद होना है। प्रदेश में हर साल फायर सीजन में जंगलों में आग की सैकड़ों घटनाएं होती थीं। इस साल अप्रैल में मात्र तीन घटनाएं ही सामने आई हैं। यह सही है कि अब औद्योगिक गतिविधियां भी शुरू होंगे, वाहन भी चलेंगे और अन्य विकास कार्य भी होंगे लेकिन हम सभी को ऐसे प्रयास करने होंगे कि प्रकृति से छेड़छाड़ न हो। प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग न करें। पर्यावरण संरक्षण के लिए हर व्यक्ति जिम्मेदारी निभाएगा तो लोग कई बीमारियों से बचे रहेंगे और देश भी तरक्की की राह पर अग्रसर रहेगा।
  • क्या मैं अपनी तपिश और बढ़ाऊं तो राहत मिलेगी?
  • कोरोना के भय से शवों का निरादर

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  • पहली बार ऑनलाइन होगी एलसैट प्रवेश परीक्षा
  • फीचर फोन वाले कोरोना मरीज भी नहीं दे पाएंगे सरकार को चकमा
  • शराब की ऑनलाइन बिक्री पर विचार करे सरकार : सुप्रीम कोर्ट
  • हरियाणा में तीस मुस्लिम परिवारों ने की हंिदूू धर्म में वापसी
  • आकाशवाणी व दूरदर्शन भी देंगे गिलगिट के मौसम की जानकारी
  • हरिद्वार में गंगा में अस्थि विसर्जन की सशर्त अनुमति
  • एनजीटी ने एलजी पॉलीमर्स पर ठोका 50 करोड़ जुर्माना
  • कोरोना तेरा नाश हो! तू पंकज को ले गया

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  • देश बड़ी बेरोजगारी के मुहाने पर
  • 31 अगस्त तक आए ढांचा ध्वंस मामले पर फैसला
  • पंजाब में खेतों में जा गिरा मिग-29, पायलट सुरक्षित
  • जियो प्लेटफॉर्म्स में एक और बड़ा निवेश
  • जापान ने मांगी कंपनियों के संचालन में मदद
  • राहत पैकेज के इंतजार में टूट रहा उद्यमियों का सब्र
  • द. कोरिया में शुरू हुई फुटबॉल लीग
  • पैकेज में हुई देरी तो बेरोजगारी की आएगी सुनामी : राहुल
  • थोड़ी जानकारी के साथ आना सीखें राहुल : सुधांशु
  • शुक्रिया पीएम मोदी, जो मुङो ईद जैसी खुशियां दीं

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  • किम ने चिन¨फग को कोरोना पर जीत का बधाई संदेश भेजा
  • वैदिक मंत्रों से गूंजा व्हाइट हाउस
  • स्पेन में समुद्र तटों पर जाने की इजाजत
  • इस गांव के खून से समृद्ध एम्स का ब्लड बैंक
  • अमेरिका में भारतवंशी डॉक्टर पिता-पुत्री की कोरोना से मौत
  • महाराष्ट्र में लगातार तीसरे दिन एक हजार से ज्यादा नए मामले
  • पाकिस्तान से जुड़ा मोस्ट वांटेड गैंगस्टर बिल्ला समेत सात गिरफ्तार
  • चीन से कोई बड़ी गलती हुई या फिर वह अक्षम है: ट्रंप

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  • चिकित्सक तैनात न पुलिस, शारीरिक दूरी भी दरकिनार3
  • तूलिका से भरें कल्पना के रंगकोरोना वायरस के कारण प्रदेशभर में कफ्र्यू है। मजबूरन बच्चे घरों में बंद हैं। बेशक बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा कुछ बच्चे रचनात्मक कर रहे हैं। इस दौरान प्रकृति में भी बदलाव आया है। बच्चे घर में बैठकर तूलिका से कल्पना के संसार को भी आकार दे रहे हैं। बच्चे पेंटिंग के साथ अपना चित्र भेजेंगे। इसके साथ वे अपना नाम, कक्षा और स्कूल का नाम दिए वाट्सएप नंबर पर प्रेषित करेंगे। चुनिंदा तस्वीरें दैनिक जागरण में प्रकाशित की जाएंगी।वाट्सएप नंबर 94180-42047, 94181-51122 पर भेज सकते हैं।
  • महिला गृहरक्षक से अभद्र व्यवहार पर चालक के खिलाफ केस
  • पहले ठगे 24 हजार अब बना रहा शादी का दबाव
  • खेत में टेंट लगाकर क्वारंटाइन हुआ कांगड़ा से लौटा युवक
  • इन्होंने दिया सही जवाबअजित शर्मा, विनोद, ऊषा, अचैना बौद्व, नीरज गुप्ता, हरीश ठाकुर, राजेश पठानिया, प्रेम ठाकुर, नीरज, दिशांत, माया, राजेश शालिनी भारद्वाज, नितिन, चंद्रा, मीनू, रूपा, महेंद्र विष्ट, रवि मिन्हास, शमशेर, रिंकु, सुमित ठाकुर, मीना, मानक, चंद्र किरण, ईश्वर, विशाल, गोपाल, पंकज, नरेश, सुभाष, राजू, कुंदन, दीपा, रवि, इंद्र, विनोद, संजीव।
  • गांव में घूम रहा आइजीएमसी से लौटा युवक, लोगों में दहशत
  • पिता का दर्द; न बेटे का अंतिम संस्कार कर सका, न गंगा विसर्जन को अस्थियां मिली
  • गरीब, मजदूरों की सेवा के लिए हेल्पलाइन
  • रंगड़ों के काटने से तीन लोग घायल
  • टकोली सब्जी मंडी में पांच रुपये किलो बिकी फूलगोभी

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  • ाउ सिटी 09150941ल्लू/मंडी
  • आशा वर्कर्स को सुरक्षा मुहैया करवाए सरकार
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  • दो दिन में शुरू होगा सब-वे का कार्य, मिलेगी राहत
  • पाइप चोर गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार
  • सुरंग में रिसाव से सहमे ग्रामीण
  • जोगेंद्रनगर अस्पताल की लिफ्ट फिर बंद
  • मनाली को मिली कोविड-19 के लिए सैंपल टेस्टिंग वैन
  • व्यवस्थित रहें तो समस्या नहीं बनेगा कचरा

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  • मजदूरों को राशन की 120 किटें बांटी
  • चिकित्सक तैनात न पुलिस, शारीरिक दूरी भी दरकिनार
  • व्यंजन बनाना सीख रहे दिव्यांग बच्चे
  • क्वारंटाइन सेंटर में गो¨वद ठाकुर ने जांची सुविधाएं
  • अस्पताल स्टाफ को फूल बरसा किया सम्मानित
  • कोरोना को हराएगा हिमाचल
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