रेलवे के बिजली तारों का पहरेदार बना कर्षण प्रहरी एप

  • July 17, 2019

जागरण संवाददाता, गोरखपुर : अब रेल लाइनों पर बिजली के तार में किसी तरह की खामियों के चलते ट्रेनों का संचलन प्रभावित नहीं होगा। इलेक्टिक इंजनों से चलने वाली गाड़ियां निर्बाध गति से चलती रहेंगी। बिजली के तारों (ट्रैक्शन) की निगरानी के लिए रेलवे ने कर्षण प्रहरी नाम का मोबाइल एप लांच किया है। यह एप ट्रैक्शन की निगरानी करने वाले सभी ट्रैक मेंटनरों के मोबाइल में अनिवार्य रूप से लोड रहेगा। जिससे रेल लाइन पर केसी भी तकनीकी खामी को तत्काल दुरुस्त करा लिया जाएगा। इसके लिए एक कंट्रोल रूम स्थापित रहेगा।

रेल लाइनों पर ट्रैक्शन की निगरानी के लिए पेट्रोलिंग करने वाले रेलकर्मियों के हाथ में मोबाइल होगा। इस दौरान कहीं भी तार ढीला होने, चिंगारी निकलने, बिजली प्रभावित होने या नीचे गिरने पर रेलकर्मी एप के जरिये सीधे कंट्रोल तक सूचना पहुंचा देगा। एप आनलाइन होने के चलते रेल लाइन पर ट्रैक्शन की खामी की जानकारी संबंधित इंजीनियरों को हो जाएगी। समय रहते संबंधित इंजीनियर मौके पर पहुंचकर खामियों को दूर कर देंगे। यही नहीं मोबाइल एप ट्रैक्शन की छोटी तकनीकी खराबी को भी पकड़ लेगा और उसे कंट्रोल तक पहुंचा देगा। एप पर पेट्रोलिंग रूट का विद्युतीकरण पूरी तरह अपडेट रहेगा। कहीं खामी होने पर वह कंट्रोल को सीधे सूचित भी करता रहेगा। इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित रेलकर्मी को किसी अधिकारी से संपर्क करने या औपचारिकताओं को पूरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

दरअसल, भारतीय रेलवे में तेजी के साथ विद्युतीकरण हो रहा है। आने वाले दिनों में इलेक्टिक इंजनों से ही गाड़ियां चलाई जाएंगी। पूवरेत्तर रेलवे के मुख्य मार्ग गोरखपुर के रास्ते बाराबंकी से छपरा और बलिया-वाराणसी रूट पर इलेक्टिक इंजन से ही ट्रेनें चल रही हैं। गोरखपुर-नरकटियागंज रूट का विद्युतीकरण हो चुका है। एप चालू होते ही रेलकर्मियों का लोकेशन भी आनलाइन हो जाएगा। रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन आरडीएसओ ने कर्षण प्रहरी नाम के एप को डेवलप किया है। यह एप ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम पर आधारित होगा।

ट्रैक मेंटेनरों के मोबाइल में लोड होगा एप, तत्काल दुरुस्त होंगी खामियां

रेल फ्रैक्चर बताएगा ट्रैकर

अति आधुनिक उपकरण ट्रैकर रेल फ्रैक्चर की निगरानी करने में जुट गया है। रेल लाइनों की निगरानी करने वाले कीमैनों (ट्रैकमेंटेनरों) को ट्रैकर उपकरण दिया गया है। कीमैन ट्रैकर के जरिये रेल फ्रैक्चर या कोई तकनीकी खामी होने की जानकारी सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचा देते हैं। जिससे समय रहते रेल लाइन को दुरुस्त कर लिया जाता है। ट्रैकर भी जीपीएस पर आधारित है। जिसके आन होते ही कीमैन भी आनलाइन हो जाते हैं।

कर्षण प्रहरी से इलेक्टिफिकेशन से जुड़े फॉल्ट को ट्रैक करने और उसको जल्द रिपेयर करने में मदद मिलेगी। इस एप के जरिए लोकेशन सर्च करने में भी कोई परेशानी नहीं आएगी।

पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनई रेलवे